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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा 100 करोड़ कमाने वाला रेलवे स्टेशन! 5 साल पुरानी बिल्डिंग की छत गिरी, मलबे में दबे स्टेशन मास्टर की ऐसे बची जान



जैसलमेर के सोनू लाइमस्टोन रेलवे स्टेशन की 5 साल पुरानी बिल्डिंग की छत गिरी, स्टेशन मास्टर घायल, निर्माण पर उठे सवाल।

राजस्थान के जैसलमेर स्थित सोनू लाइमस्टोन रेलवे स्टेशन पर रविवार को बड़ा हादसा हो गया, जब स्टेशन मास्टर कार्यालय की छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के वक्त स्टेशन मास्टर मनीष कुमार ड्यूटी पर मौजूद थे और मलबे की चपेट में आकर घायल हो गए। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां फिलहाल उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह बिल्डिंग महज 5 साल पहले बनाई गई थी और यह रेलवे के सबसे ज्यादा कमाई वाले स्टेशनों में शामिल है, जहां से हर महीने 100 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिलता है। घटना के बाद रेलवे के निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार, घटिया सामग्री और अधिकारियों की मिलीभगत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ड्यूटी के दौरान अचानक गिरी छत, बाल-बाल बची स्टेशन मास्टर की जान

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रविवार का दिन सामान्य तरीके से चल रहा था। स्टेशन मास्टर मनीष कुमार अपने कार्यालय में बैठकर नियमित कार्य कर रहे थे। इसी दौरान अचानक जोरदार आवाज हुई और कार्यालय की छत का बड़ा हिस्सा नीचे आ गिरा। कुछ ही सेकंड में पूरा कमरा धूल और मलबे से भर गया। आसपास मौजूद रेल कर्मचारियों और स्टाफ ने तुरंत दौड़कर मनीष कुमार को बाहर निकाला।

हादसे में उनके पैर में गंभीर चोट आई और शरीर के कई हिस्सों पर भी चोटें आईं। मलबे में दबे होने के कारण कुछ समय तक उनकी हालत बेहद खराब बनी रही। घटना के बाद स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारियों ने तुरंत एंबुलेंस की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया।

इस घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया, क्योंकि आगामी 18 मई को मनीष कुमार की सगाई होने वाली है। परिवार में शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन इस हादसे ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया। परिजनों का कहना है कि अगर कुछ सेकंड का भी फर्क होता तो यह हादसा जानलेवा साबित हो सकता था।

100 करोड़ कमाने वाले स्टेशन की बिल्डिंग निकली कमजोर, भ्रष्टाचार पर उठे सवाल

सोनू लाइमस्टोन रेलवे स्टेशन भारतीय रेलवे के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां आसपास की माइन्स से बड़ी मात्रा में स्टील ग्रेड लाइमस्टोन की लोडिंग होती है। यही कारण है कि यह स्टेशन रेलवे को हर महीने 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व देता है। इतनी बड़ी आय देने वाले स्टेशन की बिल्डिंग का महज पांच साल में इस हालत में पहुंच जाना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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स्थानीय लोगों और रेल कर्मचारियों का आरोप है कि निर्माण के दौरान घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। लोगों का कहना है कि अगर सही गुणवत्ता से निर्माण हुआ होता तो इतनी जल्दी बिल्डिंग की छत कभी नहीं गिरती। घटना के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला और कई कर्मचारियों ने निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की आशंका जताई।

रेलवे के कई पूर्व कर्मचारियों का भी कहना है कि हाल के वर्षों में कई सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को नजरअंदाज किया गया है। ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण घटिया सीमेंट, कमजोर सरिया और निम्न स्तर की निर्माण सामग्री का उपयोग किया जाता है, जिसका नतीजा ऐसे हादसों के रूप में सामने आता है।

रेलवे प्रशासन में मचा हड़कंप, जांच के आदेश जारी

हादसे की जानकारी मिलते ही रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत घटनास्थल का निरीक्षण किया और पूरी रिपोर्ट तलब की। रेलवे प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। अब उन इंजीनियरों, ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी जिन्होंने इस भवन के निर्माण और गुणवत्ता प्रमाणन की जिम्मेदारी संभाली थी।

सूत्रों के मुताबिक शुरुआती जांच में निर्माण गुणवत्ता को लेकर कई गंभीर खामियां सामने आ सकती हैं। रेलवे अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर पांच साल पुरानी बिल्डिंग की छत अचानक कैसे गिर गई। साथ ही स्टेशन परिसर की अन्य इमारतों का भी निरीक्षण शुरू कर दिया गया है ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।

घटना के बाद रेलवे कर्मचारियों में भी डर का माहौल है। कर्मचारियों का कहना है कि अगर ऐसी इमारतों की समय रहते जांच नहीं हुई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। फिलहाल रेलवे प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी टीम गठित कर दी है, जो निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच करेगी।

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