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जलते उपलों के बीच 4 घंटे तक बैठते हैं बाबा! उज्जैन में संत की अग्नि तपस्या ने सबको किया स्तब्ध



उज्जैन में बाबा भरत दास की अग्नि तपस्या चर्चा में, भीषण गर्मी में जलते उपलों के बीच घंटों साधना कर रहे हैं

उज्जैन की पवित्र धरती पर एक संत की ऐसी कठिन साधना सामने आई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। भीषण गर्मी में जहां आम लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं, वहीं बाबा भरत दास रोजाना जलते उपलों के बीच बैठकर घंटों तक अग्नि तपस्या कर रहे हैं और लगातार “नारायण-नारायण” का जाप कर रहे हैं। यह तपस्या न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन गई है, बल्कि इसे देखने वाले इसे अलौकिक अनुभव बता रहे हैं।

अग्नि के बीच साधना, तपस्या का अद्भुत दृश्य

राम जनार्दन मंदिर के सामने स्थित नारायण गोसेवा आश्रम में बाबा भरत दास, जिन्हें लोहा लंगड़ी वाले बाबा के नाम से भी जाना जाता है, इन दिनों कठोर तप में लीन हैं। हर दिन सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक वे अपने चारों ओर जलते हुए उपलों का घेरा बनाकर उसके बीच बैठते हैं। इतना ही नहीं, वे अपने सिर पर भी जलते हुए उपले रखते हैं और बिना विचलित हुए लगातार मंत्र जाप करते रहते हैं। तेज धूप, आग की लपटें और धुएं के बीच उनका शांत और स्थिर भाव श्रद्धालुओं को चौंका देता है।

बिना जल और भोजन के निभाते हैं कठिन नियम

बाबा भरत दास की तपस्या केवल दिखावे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सख्त अनुशासन और नियम हैं। वे निर्धारित समय के दौरान न तो जल ग्रहण करते हैं और न ही कोई आहार लेते हैं। भीषण गर्मी में इस तरह की तपस्या करना सामान्य व्यक्ति के लिए असंभव माना जाता है, लेकिन बाबा हर वर्ष इसी तरह यह साधना करते हैं। आश्रम के सेवादारों के अनुसार, यह तप केवल शारीरिक सहनशक्ति नहीं बल्कि गहरी आध्यात्मिक शक्ति और आत्मसंयम का प्रतीक है।


बसंत पंचमी से गंगा दशमी तक चलता है तप

बताया जाता है कि बाबा की यह अग्नि तपस्या बसंत पंचमी से शुरू होकर गंगा दशमी तक लगातार चलती है। इस अवधि में वे प्रतिदिन इसी प्रक्रिया को दोहराते हैं और भगवान नारायण एवं महाकाल शिव की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तरह की कठोर तपस्या अक्सर बड़े धार्मिक आयोजनों जैसे सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान देखने को मिलती है, लेकिन बाबा भरत दास की यह साधना अपने आप में अलग और अनोखी मानी जा रही है।

इस अद्भुत तपस्या को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आश्रम पहुंच रहे हैं। जलते उपलों के बीच बैठकर साधना करते बाबा का दृश्य लोगों के लिए आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक बन गया है, जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि आखिर इतनी भीषण परिस्थितियों में भी यह साधना कैसे संभव है।

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