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UP में ‘मौत की टंकियां’! एक के बाद एक गिर रहीं पानी की टंकियां, बरेली में 7 दबे… क्या भ्रष्टाचार की नींव पर बना जल जीवन मिशन?



यूपी में पानी की टंकियां गिरने का सिलसिला जारी, बरेली में 7 लोग दबे, कई घायल। जल जीवन मिशन की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल।

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर विवाद के बाद अब जल जीवन मिशन के तहत बनाई जा रही पानी की टंकियां सरकार के लिए बड़ा संकट बनती जा रही हैं, जहां लगातार टंकियों के गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ताजा मामला बरेली का है, जहां पानी की टंकी अचानक ढह गई और उसके नीचे दबकर सात लोग घायल हो गए, जिनमें तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि सिद्धार्थनगर में तेज आंधी और बारिश के बाद एक टंकी का हिस्सा टूटकर गिर गया और बाकी संरचना हवा में झूलती नजर आई, जिससे निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

लगातार हादसों ने बढ़ाई चिंता, हर जिले से आ रही डराने वाली तस्वीरें

उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर पानी की टंकियों का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन इन टंकियों की गुणवत्ता को लेकर अब लगातार सवाल उठ रहे हैं। साल 2024 से लेकर 2026 तक राज्य के कई जिलों में पानी की टंकियां गिरने या क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मथुरा में जून 2024 में हुई घटना ने सबसे पहले इस खतरे का संकेत दिया था, जहां एक पानी की टंकी गिरने से दो महिलाओं की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। इसके बाद 2025 में तो जैसे हादसों की झड़ी लग गई। कानपुर, लखीमपुर खीरी, चित्रकूट, सीतापुर, जालौन और कासगंज जैसे जिलों से एक के बाद एक टंकी गिरने की खबरें सामने आती रहीं। कई मामलों में टंकियां निर्माणाधीन अवस्था में ही धराशाई हो गईं, तो कुछ जगहों पर ट्रायल के दौरान ही उनमें दरारें पड़ गईं।

सीतापुर में करोड़ों रुपये की लागत से बनी टंकी का गिरना और फिर कुछ महीनों बाद उसी जिले में दूसरी टंकी का ट्रायल के दौरान ढह जाना यह दर्शाता है कि समस्या केवल एक जगह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे राज्य में फैली हुई है। फर्रुखाबाद में तो बाढ़ के पानी में टंकी बह जाने की घटना भी सामने आई, जिसने निर्माण की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े किए।

बरेली और सिद्धार्थनगर हादसे ने खोली पोल, कार्रवाई के बाद भी नहीं थम रहा सिलसिला

मई 2026 में सामने आए बरेली और सिद्धार्थनगर के ताजा हादसों ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। बरेली में पानी की टंकी गिरने से सात लोग दब गए, जिनमें तीन की हालत गंभीर बनी हुई है। इस घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया और संबंधित निर्माण कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का नोटिस जारी किया गया है। इसके साथ ही कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और कई अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।

राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के तहत कार्यरत एक जूनियर इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक अन्य जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। जल निगम के एक असिस्टेंट इंजीनियर के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं और अधिशाषी अभियंता से जवाब मांगा गया है। इसके अलावा बरेली जल निगम के कई कर्मचारियों और अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।

वहीं सिद्धार्थनगर में तेज आंधी और बारिश के बाद टंकी का हिस्सा गिरने और बाकी संरचना का हवा में झूलना इस बात का संकेत है कि इन टंकियों का निर्माण प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर नहीं किया जा रहा है। लाखों लीटर पानी का भार सहने के लिए बनाई गई ये टंकियां मामूली मौसम बदलाव में ही जवाब दे रही हैं।

विपक्ष का हमला तेज, ‘भ्रष्टाचार की टंकियां’ बताकर सरकार पर उठाए सवाल

लगातार हो रही इन घटनाओं के बीच विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इन टंकियों को ‘भ्रष्टाचार की टंकियां’ बताते हुए आरोप लगाया है कि निर्माण कार्यों में भारी स्तर पर घोटाला हुआ है। विपक्ष का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद अगर टंकियां इस तरह गिर रही हैं, तो यह साफ तौर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का परिणाम है।

सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन कंपनियों को पहले भी ब्लैकलिस्ट करने का नोटिस दिया गया था, उन्हें दोबारा काम कैसे सौंपा गया। सीतापुर में 2025 में टंकी गिरने के बाद जिस कंपनी को नोटिस दिया गया था, उसी कंपनी को बरेली में भी काम मिला और अब वहां भी हादसा हो गया। इससे यह संकेत मिलता है कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाती है और जमीनी स्तर पर कोई सख्ती नहीं दिखाई जाती।

इन घटनाओं ने जल जीवन मिशन जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसका उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। लेकिन अगर इस मिशन के तहत बनाई जा रही संरचनाएं ही सुरक्षित नहीं हैं, तो यह योजना आम लोगों के लिए राहत के बजाय खतरा बनती जा रही है।

प्रदेश में लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल योजनाओं की घोषणा और बजट आवंटन से काम नहीं चलेगा, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके और लोगों की जान को जोखिम में डालने वाली लापरवाही पर लगाम लगाई जा सके

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