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ममता का ‘आखिरी दांव’ भी फेल! राज्यपाल ने भंग कर दी बंगाल विधानसभा, BJP की ऐतिहासिक जीत के बाद सत्ता से बाहर हुईं दीदी


पश्चिम बंगाल में BJP की प्रचंड जीत के बाद राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा भंग की, ममता सरकार का कार्यकाल खत्म।

पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव के बाद बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद राज्यपाल आरएन रवि ने संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी कर दिया। इस फैसले के साथ ही 17वीं विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया और राज्य में नई भाजपा सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है। अब 9 मई को कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में नई सरकार का भव्य शपथ ग्रहण समारोह होने जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हो सकते हैं।

चुनाव नतीजों के बाद बंगाल में बढ़ा राजनीतिक टकराव

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदलकर रख दिया। लगभग डेढ़ दशक तक सत्ता पर काबिज रही ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा ने 293 सीटों में से 207 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। यह पहली बार है जब बंगाल में भाजपा अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची है।

चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी ने हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने दावा किया कि कई सीटों पर वोट चोरी हुई है और चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी। ममता ने आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत हराया गया है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से भी इनकार कर दिया, जिससे राज्य में संवैधानिक संकट जैसे हालात बनने लगे।

राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा थी कि आखिरकार राज्यपाल क्या कदम उठाएंगे। भाजपा लगातार यह मांग कर रही थी कि जनादेश का सम्मान किया जाए और नई सरकार को गठन का मौका मिले। इसी बीच राज्यपाल आरएन रवि ने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए विधानसभा भंग करने का बड़ा फैसला ले लिया।

अनुच्छेद 174 के तहत राज्यपाल का बड़ा फैसला

राज्यपाल आरएन रवि ने संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी किया। यह आदेश 6 मई 2026 को विशेष गजट नोटिफिकेशन के जरिए प्रकाशित किया गया। नोटिफिकेशन नंबर 275-P.A./1L-03/2026 में स्पष्ट किया गया कि 7 मई 2026 से पश्चिम बंगाल की मौजूदा विधानसभा औपचारिक रूप से भंग मानी जाएगी।

इस आदेश पर राज्यपाल के हस्ताक्षर होने के बाद इसे राज्य के मुख्य सचिव दुष्यंता नरियाला द्वारा सार्वजनिक किया गया। सरकार के संसदीय कार्य विभाग की ओर से जारी इस अधिसूचना ने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया।

संवैधानिक विशेषज्ञों के मुताबिक चुनाव के बाद पुरानी विधानसभा को भंग कर नई विधानसभा के गठन का रास्ता साफ करना एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है। हालांकि इस बार मामला इसलिए ज्यादा चर्चाओं में रहा क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हार के बावजूद पद छोड़ने से इनकार कर दिया था।

राज्यपाल के इस फैसले के बाद अब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद पर नहीं मानी जाएंगी और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह बंगाल की राजनीति में सबसे बड़े सत्ता परिवर्तन में से एक माना जा रहा है।

ममता बनर्जी के आरोपों ने बढ़ाया सियासी तापमान

चुनाव परिणामों के बाद ममता बनर्जी लगातार चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधती रहीं। उन्होंने दावा किया कि करीब 100 सीटों पर धांधली हुई है। ममता ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी कराई गई।

टीएमसी नेताओं ने भी कई जगहों पर प्रदर्शन किए और चुनाव परिणामों को चुनौती देने की बात कही। हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। भाजपा नेताओं का कहना था कि बंगाल की जनता ने भ्रष्टाचार, हिंसा और तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ मतदान किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, शिक्षक भर्ती घोटाला और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे भाजपा के पक्ष में गए। भाजपा ने “परिवर्तन” के नारे के साथ चुनाव लड़ा था और उसे इसका फायदा मिला।

चुनाव के बाद बंगाल के कई इलाकों में तनाव की खबरें भी सामने आईं। सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की हिंसा को रोका जा सके।

भाजपा ने शुरू की नई सरकार बनाने की तैयारी

भाजपा ने विधानसभा भंग होने के बाद नई सरकार गठन की प्रक्रिया तेज कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार रात कोलकाता पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई गई है, जिसमें नए नेता का चुनाव किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री पद के लिए कई बड़े नामों पर चर्चा चल रही है। भाजपा हाईकमान अंतिम फैसला विधायक दल की बैठक के बाद करेगा। पार्टी इस शपथ ग्रहण समारोह को ऐतिहासिक और शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश करना चाहती है।

बताया जा रहा है कि 9 मई को कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। यह वही ब्रिगेड ग्राउंड है जहां भाजपा ने चुनाव से पहले कई बड़ी रैलियां की थीं। अब उसी मैदान से भाजपा बंगाल में अपने नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत करेगी।

ब्रिगेड मैदान में होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोह

भाजपा ने शपथ ग्रहण समारोह को भव्य बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। कार्यक्रम रवींद्र जयंती के मौके पर आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।

ब्रिगेड मैदान में लाखों लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा इसे “डबल इंजन सरकार” की शुरुआत के तौर पर पेश कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बंगाल अब विकास और निवेश के नए दौर में प्रवेश करेगा।

सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए SPG, कोलकाता पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात किया जाएगा। पूरे कार्यक्रम स्थल और आसपास के इलाकों में कड़ी निगरानी रखी जाएगी। ड्रोन कैमरों और हाईटेक सर्विलांस सिस्टम की मदद से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

15 साल बाद खत्म हुआ ममता युग

2011 में पहली बार मुख्यमंत्री बनीं ममता बनर्जी ने लगातार तीन चुनाव जीतकर बंगाल की राजनीति पर मजबूत पकड़ बनाई थी। उन्होंने वामपंथी शासन को खत्म कर खुद को बंगाल की सबसे बड़ी नेता के रूप में स्थापित किया था। लेकिन 2026 का चुनाव उनके राजनीतिक करियर के सबसे कठिन दौर के रूप में देखा जा रहा है।

भाजपा ने इस बार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जबरदस्त प्रदर्शन किया। कई ऐसे इलाकों में भी भाजपा को बढ़त मिली जहां पहले टीएमसी का दबदबा माना जाता था। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की जनता बदलाव चाहती थी और इसी वजह से भाजपा को भारी जनादेश मिला।

ममता बनर्जी की हार को राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बड़ा झटका माना जा रहा है। विपक्षी गठबंधन की राजनीति में उनकी भूमिका काफी अहम मानी जाती थी। अब भाजपा की बंगाल में सरकार बनने से राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

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नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया शुरू

विधानसभा भंग होने के बाद अब 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। चुनाव आयोग जल्द ही निर्वाचित विधायकों की सूची राज्यपाल को सौंपेगा। इसके बाद नई विधानसभा का पहला सत्र बुलाया जाएगा।

संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पहले मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद को शपथ दिलाई जाएगी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा। माना जा रहा है कि भाजपा सरकार शुरुआती दिनों में कानून व्यवस्था, उद्योग और रोजगार जैसे मुद्दों पर बड़े फैसले ले सकती है।

बंगाल की राजनीति में यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि राज्य के राजनीतिक इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ माना जा रहा है। अब पूरे देश की नजर 9 मई को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह और नई सरकार की पहली घोषणाओं पर टिकी हुई है।

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