सिद्धार्थनगर में रील बनाते समय टंकी से गिरकर 13 वर्षीय किशोर की मौत, 2 घायल, 2 फंसे—बड़ी लापरवाही उजागर
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में सोशल मीडिया रील बनाने का खतरनाक जुनून एक दर्दनाक हादसे में बदल गया, जहां पानी की टंकी पर चढ़े पांच किशोरों में से एक की मौत हो गई, दो गंभीर रूप से घायल हो गए और दो अब भी टंकी पर फंसे हुए हैं, जिन्हें बचाने के लिए राहत और बचाव अभियान जारी है।
रील बनाने का खतरनाक खेल बना मौत का कारण
शनिवार दोपहर सिद्धार्थनगर जिले की काशीराम आवासीय कॉलोनी में स्थित एक पुरानी और जर्जर पानी की टंकी पर पांच किशोर रील बनाने के उद्देश्य से चढ़ गए। सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह में ये किशोर बिना किसी सुरक्षा के ऊंचाई पर पहुंच गए। वहां उन्होंने वीडियो शूट किया और जब नीचे उतरने लगे, तभी यह हादसा हो गया जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।
एक ही सीढ़ी पर चढ़े तीन किशोर, अचानक टूटी सीढ़ी
जानकारी के अनुसार, रील शूट करने के बाद जब ये किशोर नीचे उतर रहे थे, तभी तीन बच्चे एक साथ एक ही सीढ़ी पर आ गए। टंकी की पुरानी और कमजोर सीढ़ी उनका भार सहन नहीं कर सकी और अचानक टूट गई। सीढ़ी टूटते ही तीनों किशोर सीधे जमीन पर गिर पड़े। यह गिरावट इतनी भयावह थी कि मौके पर मौजूद लोग दहशत में आ गए।
13 साल के सिद्धार्थ की मौके पर मौत
हादसे के बाद स्थानीय लोग तुरंत तीनों घायलों को पास के कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने 13 वर्षीय सिद्धार्थ को मृत घोषित कर दिया। सिद्धार्थ मोहाना थाना क्षेत्र के झूलनीपुर गांव का निवासी था और काशीराम कॉलोनी में अपने रिश्तेदारों के यहां आया हुआ था। उसकी अचानक मौत से परिवार में कोहराम मच गया है।
दो किशोरों की हालत गंभीर, अस्पताल में भर्ती
इस हादसे में 11 वर्षीय सनी और 14 वर्षीय गोलू गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। दोनों के सीने में गंभीर चोटें आई हैं और उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत नाजुक बनी हुई है और लगातार निगरानी में रखा गया है।
दो किशोर टंकी पर फंसे, नीचे उतरने का रास्ता नहीं
सीढ़ी टूटने के बाद स्थिति और भी भयावह हो गई क्योंकि टंकी पर मौजूद बाकी दो किशोर वहीं फंस गए। उनके पास नीचे उतरने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा। काफी देर तक वे टंकी के ऊपर ही खड़े रहे और मदद का इंतजार करते रहे।
प्रशासन और रेस्क्यू टीम मौके पर, SDRF को बुलाया गया
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई, लेकिन पर्याप्त संसाधनों की कमी के कारण तुरंत रेस्क्यू संभव नहीं हो पाया। इसके बाद जिला प्रशासन ने गोरखपुर से एसडीआरएफ टीम को बुलाया, जो रास्ते में है। टीम के पहुंचने के बाद फंसे हुए दोनों किशोरों को सुरक्षित नीचे उतारने की योजना बनाई गई है।
डीएम और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी शिव शरणप्पा, अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जल्द से जल्द रेस्क्यू पूरा करने का प्रयास कर रहा है।
जर्जर टंकी बनी हादसे की बड़ी वजह
जिलाधिकारी ने बताया कि जिस पानी की टंकी पर यह हादसा हुआ, वह काफी समय से कंडम घोषित थी। बावजूद इसके वहां कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी और न ही किसी तरह की रोकथाम की गई थी। इसी लापरवाही के चलते बच्चे आसानी से टंकी पर चढ़ गए और यह हादसा हो गया।
इलाके में दहशत और गुस्से का माहौल
इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ने पहले ही इस जर्जर टंकी को सुरक्षित कर दिया होता या वहां प्रवेश पर रोक लगा दी होती, तो यह हादसा टल सकता था।
सोशल मीडिया के चक्कर में बढ़ते खतरनाक स्टंट
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज के लिए युवा किस हद तक जोखिम उठा रहे हैं। रील बनाने का जुनून अब जानलेवा साबित हो रहा है, जहां थोड़ी सी लापरवाही सीधे मौत में बदल सकती है।
जांच के आदेश और जिम्मेदारी तय करने की तैयारी
प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। यह देखा जा रहा है कि आखिर इतनी खतरनाक और जर्जर टंकी तक बच्चों की पहुंच कैसे हुई और सुरक्षा के क्या इंतजाम थे। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही जा रही है।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे ने एक परिवार से उसका मासूम छीन लिया, जबकि दो अन्य परिवारों के बच्चे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। वहीं, टंकी पर फंसे बच्चों के परिवारों की सांसें अटकी हुई हैं और वे जल्द से जल्द सुरक्षित रेस्क्यू की दुआ कर रहे हैं।
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही, जागरूकता की कमी और सोशल मीडिया के अंधे जुनून का खतरनाक परिणाम बनकर सामने आया है


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