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स्मार्ट मीटर पर बवाल चरम पर! राहत 2.0 भी बेअसर, UP के कई जिलों में मीटर उखाड़कर सड़कों पर फेंके



यूपी में स्मार्ट मीटर के खिलाफ उग्र प्रदर्शन, राहत 2.0 भी बेअसर, कई जिलों में मीटर तोड़कर फेंके, सरकार पर बढ़ा दबाव

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर विरोध अब बड़े जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है, जहां राहत 2.0 जैसी सरकारी पहल भी लोगों के गुस्से को शांत नहीं कर पाई है और आगरा से लेकर लखनऊ तक कई जिलों में लोग अपने घरों से मीटर उखाड़कर सड़कों पर फेंकते नजर आ रहे हैं, वहीं सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो इस पूरे विवाद को और भड़का रहे हैं, जिससे सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है और लोग पुराने मीटर वापस लगाने की मांग पर अड़े हुए हैं

हर दिन बढ़ता जा रहा विरोध, सड़कों पर उतर रहे लोग

उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में स्मार्ट मीटर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं, जहां लोग अब खुलेआम सड़कों पर उतरकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं, आगरा, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, मेरठ, हमीरपुर, हापुड़ और Lucknow जैसे शहरों में हालात यह हो गए हैं कि लोग मीटर को घरों से उखाड़कर जुलूस निकाल रहे हैं और फिर उन्हें बिजली विभाग के दफ्तरों के बाहर फेंक रहे हैं

कई जगहों पर महिलाएं भी इस आंदोलन का हिस्सा बनती दिखाई दे रही हैं, जो सिर पर स्मार्ट मीटर रखकर प्रदर्शन कर रही हैं और इसे जनआक्रोश का प्रतीक बना रही हैं, यह दृश्य न केवल प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है बल्कि राजनीतिक माहौल को भी गरमा रहा है

राहत 1.0 और राहत 2.0 क्यों नहीं कर पाईं असर

सरकार ने इस विरोध को शांत करने के लिए पहले राहत 1.0 की घोषणा की थी, जिसमें 2 किलोवाट तक के उपभोक्ताओं को तीन दिन का ग्रेस पीरियड दिया गया था और 200 रुपए तक नेगेटिव बैलेंस की अनुमति दी गई थी, साथ ही छुट्टी के दिन बिजली कनेक्शन नहीं काटने की बात कही गई थी

लेकिन जब इससे भी लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ तो 24 अप्रैल को राहत 2.0 लागू की गई, जिसके तहत 1 किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं को 30 दिन तक बिजली कनेक्शन नहीं काटने की छूट दी गई, हालांकि इस योजना का भी कोई खास असर नहीं पड़ा और लोग लगातार विरोध प्रदर्शन करते रहे

जबरन मीटर लगाने के आरोप से बढ़ा विवाद

इस पूरे विवाद में नया मोड़ तब आया जब राज्य उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया कि लोगों के घरों में जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, इस मामले को लेकर विद्युत नियामक आयोग तक शिकायत पहुंचाई गई है और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की गई है

उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें बिना सहमति के स्मार्ट मीटर थमाए जा रहे हैं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जिससे आक्रोश और अधिक बढ़ रहा है

राजनीतिक बयानबाजी से और गरमाया मुद्दा

स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है, जहां Akhilesh Yadav ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि लोग खुद स्मार्ट मीटर तोड़कर फेंक रहे हैं क्योंकि उन्हें इस तकनीक पर भरोसा नहीं है

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने बिजली उत्पादन पर ध्यान नहीं दिया और अब स्मार्ट मीटर के जरिए जनता पर बोझ बढ़ाया जा रहा है, उनके इस बयान के बाद यह मुद्दा पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है

75 लाख मीटर लगने के बाद भी बढ़ रहा अविश्वास

प्रदेश में अब तक करीब 75 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद लोगों का भरोसा लगातार कम होता जा रहा है, उपभोक्ताओं का आरोप है कि ये मीटर तेजी से चलते हैं और बिजली बिल सामान्य से कहीं ज्यादा आता है

कई लोगों का कहना है कि प्रीपेड सिस्टम में बैलेंस तेजी से खत्म हो जाता है और बिना इस्तेमाल किए भी बिल बढ़ता रहता है, एक वायरल वीडियो में एक व्यक्ति दावा करता नजर आ रहा है कि उसका घर बंद था और एमसीबी भी ऑफ थी, इसके बावजूद रोजाना बैलेंस कटता रहा

RDSS योजना और डेडलाइन पर उठे सवाल

स्मार्ट मीटर लगाने का काम Revamped Distribution Sector Scheme के तहत किया जा रहा है, जिसकी डेडलाइन मार्च 2028 तय की गई है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए सवाल उठने लगे हैं कि जब इतनी लंबी समय सीमा है तो इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जल्दबाजी और बिना भरोसा बनाए तकनीक लागू करने से लोगों में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है

अब क्या है लोगों की मांग

लगातार बढ़ते विरोध के बीच अब उपभोक्ताओं की मांग साफ हो गई है, लोग स्मार्ट मीटर को पूरी तरह हटाकर पुराने मीटर वापस लगाने की मांग कर रहे हैं, उनका कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता तब तक वे इस आंदोलन को जारी रखेंगे

प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर जो हालात बने हैं, वे न केवल प्रशासन बल्कि सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं, आने वाले दिनों में कमेटी की रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर ही इस पूरे विवाद का भविष्य निर्भर करेगा

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