न्यूज़ फ़्लैश

5/recent/ticker-posts

बड़ी खबरें

Recent/hot-post

बरगी डैम का मौत वाला क्रूज! ‘लाइफ जैकेट तक नहीं दी…’ चश्मदीद का सनसनीखेज खुलासा, 9 की मौत, 6 लापता — प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल



बरगी डैम क्रूज हादसे में 9 मौतें, 6 लापता। चश्मदीद ने सुरक्षा लापरवाही का किया खुलासा, रेस्क्यू जारी।

जबलपुर के बरगी डैम में हुआ क्रूज हादसा अब एक दर्दनाक त्रासदी में बदल चुका है, जहां अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है और 6 लोग अभी भी लापता हैं। इस बीच हादसे से बाल-बाल बची दिल्ली की संगीता कोरी ने जो खुलासे किए हैं, उन्होंने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। उनका आरोप है कि क्रूज पर यात्रियों को लाइफ जैकेट तक नहीं पहनाई गई थी और जब स्थिति बिगड़ी तो सबकुछ बहुत देर हो चुकी थी। तेज हवाओं और खराब मौसम के बीच चालक की लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी ने इस हादसे को और भयावह बना दिया।

हादसे की शाम: जब सैर मौत में बदल गई

गुरुवार शाम करीब 6 बजे का समय था, जब पर्यटकों से भरा क्रूज बरगी डैम में सैर करके वापस लौट रहा था। मौसम अचानक बदलने लगा और तेज हवाओं के साथ पानी की लहरें उफान पर आ गईं। शुरुआत में यात्रियों को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही मिनटों में उनकी यह यात्रा जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष में बदल जाएगी।

क्रूज में सवार लोगों के मुताबिक अचानक पानी अंदर भरने लगा और नाव का संतुलन बिगड़ने लगा। देखते ही देखते अफरा-तफरी मच गई। कोई अपने बच्चों को संभाल रहा था, तो कोई मदद के लिए चिल्ला रहा था। लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह था कि सुरक्षा के इंतजाम आखिर कहां थे।

“लाइफ जैकेट तक नहीं दी गई” — चश्मदीद का बड़ा आरोप

दिल्ली से अपने परिवार के साथ घूमने आईं संगीता कोरी ने जो बताया, वह बेहद चौंकाने वाला है। उनके अनुसार, क्रूज पर सवार किसी भी यात्री को पहले से लाइफ जैकेट नहीं पहनाई गई थी। जब स्थिति बिगड़ी और क्रूज डूबने लगा, तब जाकर स्टोर रूम से जैकेट निकालने की कोशिश की गई।

लेकिन तब तक हालात बेकाबू हो चुके थे। यात्रियों के बीच जान बचाने की होड़ मच गई। लोग एक-दूसरे से जैकेट छीनने लगे। इस अफरा-तफरी के बीच संगीता के भाई ने हिम्मत दिखाते हुए स्टोर रूम का दरवाजा तोड़ा और जैकेट निकालकर लोगों को देने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

चालक की लापरवाही ने बढ़ाया खतरा

संगीता ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के समय किनारे पर मौजूद स्थानीय लोग लगातार चिल्लाकर और इशारे करके चालक को सुरक्षित दिशा में जाने के लिए कह रहे थे। लेकिन चालक ने उनकी एक नहीं सुनी।

उन्होंने कहा कि चालक को पर्याप्त अनुभव नहीं था और उसने समय रहते सही फैसला नहीं लिया। यही वजह रही कि एक सामान्य सी स्थिति कुछ ही मिनटों में बड़े हादसे में बदल गई।

रेस्क्यू ऑपरेशन: सेना और NDRF की जंग

हादसे के बाद शुक्रवार सुबह से रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया गया। सेना और NDRF की टीमों ने मोर्चा संभाल लिया है। गोताखोर लगातार पानी के भीतर तलाश अभियान चला रहे हैं।

भारी मशीनों की मदद से क्रूज के मलबे तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। पत्थरों के बीच रास्ता बनाकर जेसीबी और हाइड्रोलिक मशीनें नीचे उतारी गई हैं। गैस कटर से क्रूज के हिस्सों को काटा जा रहा है, क्योंकि आशंका है कि कुछ शव अभी भी अंदर फंसे हो सकते हैं।

अब तक 22 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 9 शव बरामद किए जा चुके हैं। 6 लोगों की तलाश अभी भी जारी है।

क्षमता से ज्यादा सवार थे यात्री?

इस हादसे में एक और बड़ा सवाल सामने आया है कि क्या क्रूज में क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक क्रूज में 29 पर्यटक और 2 क्रू मेंबर थे।

लेकिन चश्मदीदों के अनुसार, क्रूज में करीब 40 लोग मौजूद थे, जिनमें 10-12 बच्चे भी शामिल थे जिनका टिकट तक नहीं लिया गया था। अगर यह बात सही साबित होती है, तो यह सीधी-सीधी नियमों की अनदेखी और लालच का मामला बनता है।

प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे हादसे के बाद प्रशासन और क्रूज प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर बिना लाइफ जैकेट के यात्रियों को क्यों सैर कराई जा रही थी? मौसम खराब होने के बावजूद क्रूज को क्यों नहीं रोका गया? क्या सुरक्षा नियम सिर्फ कागजों तक सीमित थे?

मौके पर मौजूद अधिकारियों ने जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन इस हादसे ने यह साफ कर दिया है कि लापरवाही और सिस्टम की कमजोरी ने कई जिंदगियों को निगल लिया।

नेताओं और अधिकारियों की मौजूदगी

घटना के बाद पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई कमी न रहे और लापता लोगों को जल्द से जल्द खोजा जाए।

एक हादसा, कई सवाल

बरगी डैम का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई सवालों का आईना बन गया है। पर्यटन के नाम पर हो रही लापरवाही, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक ढिलाई ने इस त्रासदी को जन्म दिया है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ