कानपुर होमगार्ड परीक्षा में AI से नकल कराने वाला गिरोह पकड़ा गया, लेक्चरर मास्टरमाइंड निकला, 3 आरोपी गिरफ्तार
कानपुर में हाईटेक नकल का बड़ा खुलासा
उत्तर प्रदेश के कानपुर में होमगार्ड भर्ती परीक्षा के दौरान हाईटेक नकल का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासन की सतर्कता से एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके अभ्यर्थियों को पास कराने की साजिश रच रहा था। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक कॉलेज का प्रवक्ता भी शामिल है, जिसे इस पूरे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
परीक्षा केंद्र पर संदिग्ध गतिविधि से खुला राज
यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब परीक्षा केंद्र पर तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेट को एक व्यक्ति की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। यह घटना बीएनएसडी इंटर कॉलेज में आयोजित परीक्षा के दौरान हुई, जहां पेन-पेपर मोड में परीक्षा चल रही थी। दोपहर की पाली में जब परीक्षा अपने चरम पर थी, तभी एक व्यक्ति को बार-बार कक्ष से बाहर जाते देखा गया।
जब पुलिस और प्रशासन ने उसे रोका और पूछताछ की, तो उसने खुद को कक्ष निरीक्षक बताया। लेकिन उसकी बातों में विरोधाभास और व्यवहार में घबराहट देखकर अधिकारियों को शक हुआ। तलाशी के दौरान उसके पास ऐसी सामग्री मिली, जिसने पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया।
AI और मोबाइल से चल रहा था नकल का खेल
जांच में सामने आया कि आरोपी परीक्षा कक्ष के अंदर से प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर बाहर भेज रहे थे। बाहर मौजूद उनके साथी इन सवालों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से हल कर रहे थे। इसके बाद तैयार उत्तरों को मिनी पॉकेट प्रिंटर के जरिए प्रिंट किया जा रहा था।
इसके बाद इन उत्तरों को एक ऐसे अभ्यर्थी की ओएमआर शीट में भरने की योजना बनाई गई थी, जो परीक्षा में मौजूद ही नहीं था। इस तरह पूरी प्रक्रिया को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम देने की तैयारी थी, ताकि किसी को शक भी न हो और उम्मीदवार को आसानी से पास कराया जा सके।
कॉलेज का प्रवक्ता निकला मास्टरमाइंड
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी संदीप चंद्र विश्वकर्मा ने अपने साथी निर्मल कुमार का नाम लिया। जब पुलिस ने निर्मल से पूछताछ की, तो पूरे षड्यंत्र की परतें खुलती चली गईं।
जांच में सामने आया कि इस पूरे गिरोह का संचालन बीएनएसडी इंटर कॉलेज के प्रवक्ता और एनसीसी लेफ्टिनेंट अखिलेश सिंह यादव कर रहे थे। उन्होंने फर्जी तरीके से दो लोगों को कक्ष निरीक्षक बनाकर परीक्षा में तैनात कराया था, ताकि अंदर से ही नकल की पूरी व्यवस्था संचालित की जा सके।
फर्जी निरीक्षक बनकर कर रहे थे परीक्षा में घुसपैठ
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जिन दो लोगों को कक्ष निरीक्षक बनाकर भेजा गया था, वे आधिकारिक तौर पर इस परीक्षा से जुड़े ही नहीं थे। उन्हें फर्जी तरीके से अंदर प्रवेश दिलाया गया था।
संदीप चंद्र विश्वकर्मा को जब पकड़ा गया, तो उसने खुद को कक्ष संख्या 12 का निरीक्षक बताया, लेकिन जांच में उसका दावा झूठा निकला। उसके पास से प्रश्नपत्र से जुड़ी सामग्री और संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए, जिससे यह साफ हो गया कि वह नकल गिरोह का हिस्सा है।
OMR शीट से छेड़छाड़ की थी पूरी योजना
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि आरोपी केवल प्रश्नपत्र लीक करने तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने ओएमआर शीट में सीधे उत्तर भरने की योजना भी बना रखी थी।
बताया जा रहा है कि जिस अभ्यर्थी को पास कराने की साजिश थी, उसका नाम राहुल कुमार है, जो आरोपी निर्मल कुमार का करीबी बताया जा रहा है। योजना के तहत राहुल की अनुपस्थिति में उसकी ओएमआर शीट में सही उत्तर भरकर उसे पास कराने की कोशिश की जा रही थी।
पुलिस ने बरामद किए अहम सबूत
नोडल अधिकारी एडीसीपी एलआईयू महेश कुमार के अनुसार आरोपियों के पास से सील्ड प्रश्न-पुस्तिका, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। ये सभी सबूत इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह एक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत नकल गिरोह था।
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ कर्नलगंज थाना में मुकदमा दर्ज कर लिया है और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह के तार अन्य अभ्यर्थियों या बाहरी नेटवर्क से जुड़े हैं या नहीं।
परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके नकल की योजना बनाई गई, उससे साफ है कि अब परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने की जरूरत है।
प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है और संकेत दिए हैं कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, परीक्षा केंद्र के व्यवस्थापन और निगरानी प्रणाली की भी जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।


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