खंडवा की जामा मस्जिद में वुजू करते समय हाजी शेख अलीम को आया दिल का दौरा, इशा की नमाज से पहले ही अल्लाह से मुलाकात हो गई।
नमाज की तैयारी में आया अंत का संदेश
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक दर्दनाक और बेहद भावुक कर देने वाली घटना ने न केवल शहर को बल्कि पूरे मुस्लिम समाज को गहरे शोक में डुबो दिया है। खंडवा के हरिगंज इलाके की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में सोमवार की रात एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने अल्लाह की इबादत और मौत की हकीकत दोनों को एक साथ सामने ला दिया। मस्जिद की कमेटी के वरिष्ठ सदस्य और जाने-माने समाजसेवी हाजी शेख अलीम ठेकेदार (56) इशा की नमाज से पहले रोज की तरह वुजू कर रहे थे। लेकिन यह रात उनकी जिंदगी की आखिरी रात बन जाएगी, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।
अल्लाह के घर में अलविदा कह गए हाजी शेख अलीम
रोजाना की तरह वे पैदल चलते हुए मस्जिद पहुंचे थे। उनकी चाल में वही सादगी और चेहरे पर वही इमानदारी की चमक थी, जो पिछले 20 वर्षों से मस्जिद कमेटी में उनकी सेवा का हिस्सा रही थी। मस्जिद में बनी वुजू की जगह पर वे पहुंचे और इत्मीनान से वुजू करना शुरू किया। फिर वह सीढ़ियों पर बैठकर अजान खत्म होने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन तभी अचानक वह पीछे की ओर झुके और जमीन पर गिर पड़े।
कैमरे में कैद हुआ आखिरी लम्हा
यह दृश्य मस्जिद के सीसीटीवी कैमरे में पूरी तरह कैद हो गया। कैमरे की फुटेज में साफ देखा गया कि हाजी साहब वुजू करने के बाद सीढ़ियों पर बैठे और कुछ ही पलों में उनका शरीर एकदम ढीला पड़ गया। पहले तो किसी को समझ नहीं आया कि क्या हुआ, लेकिन जब पास जाकर उन्हें हिलाया गया तो उनकी सांसें थम चुकी थीं। कोई चीख नहीं, कोई कराह नहीं, अल्लाह की इबादगाह में एक सुकून भरी मौत ने उन्हें अपनी गोद में ले लिया।
अस्पताल पहुंचाने की हर मुमकिन कोशिश
घटना के तुरंत बाद मस्जिद में मौजूद लोगों ने उन्हें खंडवा जिला अस्पताल पहुंचाया। रास्ते में हर किसी की आंखें नम थीं और दिल दुआओं में लगा हुआ था कि अल्लाह उनके हाजी को बचा ले। लेकिन अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर जैसे ही बाहर आई, पूरे खंडवा शहर और मुस्लिम समाज में मातम की लहर दौड़ गई।
20 साल से मस्जिद सेवा में समर्पित थे
हाजी शेख अलीम ठेकेदार को खंडवा में एक जिम्मेदार और धार्मिक व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। वह करीब दो दशकों से मस्जिद की हर व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। चाहे रमज़ान के महीने में इफ्तार की तैयारी हो या ईद पर सफाई व्यवस्था, वह हर कार्य में सबसे आगे रहते थे। लोगों का कहना है कि हाजी साहब हर किसी की मदद करने वाले इंसान थे, जिन्हें कभी गुस्से में नहीं देखा गया।
मौत आई पर कोई आहट नहीं हुई
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उन्हें किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या नहीं थी। ना कोई दिल की बीमारी, ना ही कोई अन्य पुरानी तकलीफ। वह पूरी तरह स्वस्थ नजर आते थे। उनके दोस्तों और परिजनों ने बताया कि घटना के कुछ घंटे पहले ही वह मुस्कुराते हुए बातचीत कर रहे थे और घर पर भी सामान्य दिनचर्या में थे।
मस्जिद बनी अंतिम साक्षी
जिस जामा मस्जिद को उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा दिया, वहीं उन्हें अल्लाह से मिलने का मौका भी मिला। यह दृश्य जितना दुखद है, उतना ही गहरा भी कि किसी को मौत उस जगह मिले जहां वह रोज रूह की सच्ची पाकीज़गी के लिए आता रहा हो। मस्जिद के एक अन्य सदस्य ने कहा कि यह मौत शायद उनके अच्छे कर्मों का सिला है कि उन्हें अल्लाह के घर में ही सुकून से बुला लिया गया।
मुस्लिम समाज में गम का माहौल
हाजी शेख अलीम की मृत्यु की खबर ने पूरे मुस्लिम समुदाय को सदमे में डाल दिया। मस्जिद कमेटी से लेकर शहर के प्रमुख उलेमा, व्यापारी वर्ग, रिश्तेदार और मोहल्ले के आम लोग तक, सभी उनके जनाजे में शामिल होने पहुंचे। जनाजे में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए और हर आंख नम थी। दफन के वक्त पूरा कब्रिस्तान सिसकियों से भर गया था।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
मस्जिद के सीसीटीवी में कैद हुई यह घटना जब दो दिन बाद सामने आई, तो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। लोग इस वीडियो को देखकर भावुक हो गए और इसे अल्लाह का बुलावा करार दिया। कई लोगों ने इसे "खुशकिस्मत मौत" बताया और दुआ मांगी कि उन्हें भी ऐसी पाक और शांत मौत नसीब हो।
जिला प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं ने जताया दुख
खंडवा जिला प्रशासन ने हाजी शेख अलीम के निधन पर शोक व्यक्त किया है। स्थानीय विधायक, सांसद और नगरपालिका अध्यक्ष ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। वहीं कई धार्मिक संगठनों ने एक प्रस्ताव पारित कर उनके नाम पर मस्जिद में विशेष दुआ और कुरान खानी आयोजित की है।
अल्लाह की रहमत या कुदरत का पैगाम?
इस घटना ने न केवल मुस्लिम समुदाय को बल्कि अन्य धर्मों के लोगों को भी झकझोर दिया है। यह एक ऐसा पल था जिसने जीवन और मृत्यु के फासले को एक पल में समाप्त कर दिया। एक तरफ जहां लोग नमाज की तैयारी कर रहे थे, वहीं एक इंसान अल्लाह के दरबार में पहुंच गया। यह दृश्य एक सबक भी देता है कि जिंदगी कितनी नाजुक है और मौत कभी भी किसी को बुला सकती है।
अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब
हाजी शेख अलीम का अंतिम संस्कार मंगलवार को किया गया, जिसमें भारी भीड़ उमड़ी। जनाजे की नमाज में खंडवा के सभी प्रमुख धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अंतिम विदाई के वक्त कब्रिस्तान में सिर्फ सिसकियों की गूंज सुनाई दे रही थी।


0 टिप्पणियाँ
आपका विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण है, कृपया अपनी राय नीचे लिखें।