प्रतीक यादव की मौत की पूरी टाइमलाइन सामने आई। मेदांता इलाज, ब्लड क्लॉट, पोस्टमार्टम और चोटों ने बढ़ाए सवाल।
समाजवादी पार्टी संस्थापक Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे और बीजेपी नेता Aparna Yadav के पति Prateek Yadav की अचानक हुई मौत ने पूरे राजनीतिक और कारोारी जगत को झकझोर दिया है। बुधवार तड़के तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह ‘मेसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएंबोलिज्म’ यानी फेफड़ों में खून का बड़ा थक्का बताया गया है। हालांकि शरीर पर मिले छह चोटों के निशान और कुछ चोटों का मौत से पहले लगना अब कई सवाल खड़े कर रहा है। मेदांता अस्पताल में इलाज, पैर की सर्जरी, देर रात अचानक बिगड़ी हालत और पोस्टमार्टम तक की पूरी टाइमलाइन अब चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गई है।
मेदांता में इलाज, पैर की सर्जरी और लगातार बिगड़ती तबीयत
परिवार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव पिछले काफी समय से फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बताया जा रहा है कि उन्हें ब्लड क्लॉटिंग और पल्मोनरी एम्बोलिज्म की शिकायत थी, जिसके कारण उनका लंबे समय से इलाज चल रहा था। जानकारी के अनुसार 30 अप्रैल को उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां वह करीब तीन दिनों तक एडमिट रहे और इसी दौरान उनके बाएं पैर की सर्जरी भी हुई थी।
बताया जा रहा है कि मेदांता अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग की डॉक्टर रचिता शर्मा की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। अस्पताल सूत्रों के अनुसार प्रतीक यादव बीच-बीच में कई बार 24-24 घंटे के लिए भी अस्पताल में भर्ती हुए थे। उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी और पैर में सूजन कम नहीं हो रही थी। यही कारण था कि पिछले कुछ दिनों से उन्होंने घर से बाहर निकलना भी लगभग बंद कर दिया था।
मेदांता अस्पताल के डायरेक्टर राकेश कपूर ने भी माना कि प्रतीक यादव की तबीयत लंबे समय से खराब चल रही थी। सूत्रों का दावा है कि डॉक्टरों ने उन्हें लगातार निगरानी में रहने और आराम करने की सलाह दी थी, लेकिन कुछ दिन बाद उन्होंने खुद को डिस्चार्ज करवा लिया था। इसके बाद भी उनका इलाज जारी था और दवाइयां चल रही थीं।
रात 11:30 बजे बिगड़ी हालत, सुबह अस्पताल पहुंचने से पहले थम चुकी थीं सांसें
परिवार के करीबी लोगों के अनुसार मंगलवार रात करीब 11:30 बजे प्रतीक यादव की अचानक तबीयत बिगड़ गई। बताया जा रहा है कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और हालत तेजी से खराब होने लगी थी। इसके बाद ड्राइवर और स्टाफ की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की गई।
सूत्रों का दावा है कि देर रात उन्हें सिविल अस्पताल ले जाया गया था, जहां कुछ समय तक इलाज भी चला, लेकिन इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। सिविल अस्पताल प्रशासन के अनुसार बुधवार सुबह करीब 5 बजे अस्पताल प्रशासन को फोन पर सूचना मिली कि प्रतीक यादव की हालत बेहद गंभीर है।
इसके बाद सिविल अस्पताल से फार्मासिस्ट और अन्य मेडिकल स्टाफ उनके घर भेजा गया। जब मेडिकल टीम मौके पर पहुंची तो प्रतीक यादव के शरीर में कोई रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा था। मेडिकल टीम ने तत्काल उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला किया।
सुबह करीब 5 बजकर 55 मिनट पर उन्हें सिविल अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों ने उनके वाइटल्स की जांच की। ईसीजी किया गया लेकिन शरीर में कोई लाइफ साइन नहीं मिला। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ घोषित कर दिया। यानी अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी।
सुबह 6 बजे तक अस्पताल प्रशासन ने आधिकारिक रूप से मृत्यु की पुष्टि कर दी और कुछ ही देर में यह खबर पूरे राजनीतिक गलियारे में फैल गई। उस समय अपर्णा यादव लखनऊ में नहीं थीं। बताया गया कि वह असम दौरे पर थीं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, शरीर पर चोटों ने बढ़ाए सवाल
शुरुआत में परिवार प्रतीक यादव के शव को सीधे घर ले जाने की तैयारी में था, लेकिन अचानक पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया गया। इसके बाद शव को KGMU पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया। डॉक्टरों की विशेष टीम बनाई गई, जिसमें KGMU और सीएमओ कार्यालय के डॉक्टर शामिल थे।
करीब दो घंटे तक चले पोस्टमार्टम के बाद रिपोर्ट सामने आई, जिसमें मौत की वजह ‘कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स’ बताई गई। रिपोर्ट के अनुसार फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में बड़े पैमाने पर खून के थक्के बनने से अचानक हार्ट और रेस्पिरेटरी सिस्टम फेल हो गया था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हार्ट और फेफड़ों से मिले थ्रोम्बोएम्बोलिक मैटेरियल को हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा विसरा को केमिकल एनालिसिस के लिए भी संरक्षित किया गया है। इसका मतलब है कि डॉक्टर अभी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं और आगे की फॉरेंसिक जांच बेहद अहम होगी।
सबसे ज्यादा चर्चा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों को लेकर हो रही है। रिपोर्ट में शरीर पर कुल छह चोटों का जिक्र किया गया है। इनमें छाती, हाथ और कलाई पर चोटें शामिल हैं। कई चोटों के नीचे खून जमने यानी इकाइमोसिस के संकेत भी मिले हैं।
डॉक्टरों ने साफ लिखा है कि ये सभी चोटें ‘एंटेमॉर्टम’ थीं, यानी मौत से पहले लगी थीं। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ चोटें 7 से 10 दिन पुरानी थीं, जबकि कुछ चोटें लगभग एक दिन पहले की बताई गई हैं। यही तथ्य अब पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना रहा है।
अखिलेश यादव के बयान ने भी बढ़ाई चर्चा
पोस्टमार्टम के दौरान Akhilesh Yadav भी KGMU पहुंचे और करीब आधे घंटे तक डॉक्टरों से बातचीत की। बाहर निकलने के बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रतीक यादव को बचपन से देखा था और वह अपने स्वास्थ्य को लेकर हमेशा सजग रहते थे।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि उन्होंने करीब दो महीने पहले प्रतीक यादव से मुलाकात की थी और उन्हें स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दी थी। उन्होंने कारोबार में नुकसान और मानसिक तनाव का भी जिक्र किया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
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हालांकि परिवार की ओर से अब तक किसी तरह का सार्वजनिक आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और शरीर पर मिले चोटों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग भी कर दी है।
अपर्णा यादव पहुंचीं घर, अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा हुजूम
पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद परिवार अपर्णा यादव के आने का इंतजार कर रहा था। जानकारी थी कि वह गुवाहाटी से लौटकर सीधे KGMU जाएंगी, लेकिन फ्लाइट देरी से पहुंची। इसके बाद वह सीधे घर पहुंचीं।
दोपहर करीब 1:30 बजे प्रतीक यादव का शव भी घर पहुंचा। इसके बाद मुलायम परिवार के सदस्य लगातार पहुंचने लगे। सबसे पहले Shivpal Singh Yadav पहुंचे। उनके बाद डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और अखिलेश यादव भी पहुंचे।
बीजेपी नेताओं ने भी परिवार से मुलाकात की। शाम तक Yogi Adityanath भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे। घर के बाहर समर्थकों और शुभचिंतकों की भारी भीड़ जमा रही।
परिवार के अनुसार प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार गुरुवार दोपहर लखनऊ में किया जाएगा। बताया जा रहा है कि उनका अंतिम संस्कार उसी घाट पर होगा, जहां उनकी मां साधना यादव का अंतिम संस्कार किया गया था। फिलहाल पूरा परिवार गहरे सदमे में है और प्रतीक यादव की अचानक हुई मौत को लेकर लगातार चर्चाएं जारी हैं।


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