बरगी डैम क्रूज हादसे में बड़ा खुलासा, इंजन खराब होने की चेतावनी के बावजूद चला क्रूज, 13 पर्यटकों की गई जान।
जबलपुर के बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने अब एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। जिस क्रूज में सवार होकर पर्यटक घूमने निकले थे, उसके इंजन महीनों पहले ही खराब घोषित किए जा चुके थे। विशेषज्ञों ने साफ चेतावनी दी थी कि यह क्रूज किसी भी वक्त बड़ा हादसा कर सकता है, लेकिन इसके बावजूद उसे लगातार पानी में उतारा जाता रहा। 30 अप्रैल 2026 को आखिर वही हुआ जिसका डर जताया गया था। बरगी डैम की लहरों के बीच क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई पर्यटक जिंदगी और मौत के बीच घंटों संघर्ष करते रहे। अब सामने आए दस्तावेजों ने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे से पहले ही दी गई थी खतरे की लिखित चेतावनी
बरगी डैम हादसे के बाद सामने आए दस्तावेजों ने प्रशासनिक लापरवाही की पूरी कहानी उजागर कर दी है। जानकारी के मुताबिक मैकल रिसोर्ट के मैनेजर ने एक मार्च 2026 को मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम यानी MPSTDC के क्षेत्रीय प्रबंधक को एक विस्तृत पत्र लिखा था। इस पत्र में साफ तौर पर बताया गया था कि क्रूज की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है और इसे चलाना किसी भी समय खतरनाक साबित हो सकता है।
पत्र में यह भी बताया गया कि 14 जनवरी 2025 को एक राउंड के दौरान क्रूज के दोनों इंजन अचानक सीज हो गए थे। उस वक्त डैम में तेज हवाएं चल रही थीं और ऊंची लहरों के बीच क्रूज बीच पानी में फंस गया था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि स्पीड बोट की मदद से उसे खींचकर किनारे तक लाना पड़ा। इस घटना के बाद भी क्रूज की तकनीकी समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
पत्र में यह भी उल्लेख था कि दूसरे इंजन को स्टार्ट करने में बार-बार दिक्कत आती थी। सेल्फ की गरारी फंस जाती थी, जिससे कई बार सेवाएं बंद करनी पड़ती थीं। पर्यटक नाराज होते थे, लेकिन विभाग ने इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। मैनेजर ने साफ लिखा था कि यदि जल्द सुधार कार्य या इंजन बदलने की प्रक्रिया नहीं हुई तो किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
20 साल पुराना था क्रूज, स्पेयर पार्ट्स तक नहीं मिल रहे थे
बरगी डैम में चल रहा ‘मैकल सुता’ नाम का यह क्रूज करीब 20 साल पुराना बताया जा रहा है। इसे वर्ष 2006 में लाया गया था और तब से लगातार उपयोग किया जा रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विशेषज्ञों ने पहले ही इस क्रूज को तकनीकी रूप से आउटडेटेड घोषित कर दिया था।
मैनेजर ने अपने पत्र में हैदराबाद बोट बिल्डर्स के विशेषज्ञों की ईमेल रिपोर्ट का भी हवाला दिया था। इस रिपोर्ट में साफ लिखा गया था कि क्रूज के इंजन इतने पुराने हो चुके हैं कि उनके स्पेयर पार्ट्स तक बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। विशेषज्ञों ने सुरक्षा के लिहाज से इंजन तुरंत बदलने की सलाह दी थी।
इसके बावजूद पर्यटन विभाग ने न तो इंजन बदले और न ही क्रूज संचालन रोका। पर्यटक सीजन के दौरान अधिक कमाई और पर्यटन गतिविधियों को जारी रखने के लिए इस जर्जर क्रूज को लगातार पानी में उतारा जाता रहा। सवाल यह उठ रहा है कि जब विभाग को खतरे की जानकारी थी तो आखिर पर्यटकों की जान जोखिम में क्यों डाली गई।
हादसे वाले दिन क्या हुआ था?
30 अप्रैल 2026 को बरगी डैम में पर्यटकों से भरा यह क्रूज नियमित सैर पर निकला था। शुरुआत में सबकुछ सामान्य था, लेकिन बीच डैम में पहुंचने के बाद मौसम अचानक बिगड़ गया। तेज हवाओं और ऊंची लहरों के बीच क्रूज का संतुलन बिगड़ने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ देर बाद इंजन ने जवाब देना शुरू कर दिया।
क्रूज में सवार लोग घबराकर चीखने लगे। कई यात्रियों ने लाइफ जैकेट तक नहीं पहनी हुई थी। कुछ लोगों ने तैरकर खुद को बचाने की कोशिश की, जबकि कई पर्यटक पानी में डूब गए। मौके पर मौजूद स्थानीय नाविकों और बचाव दल ने बड़ी मशक्कत के बाद 28 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन 13 पर्यटकों की जान नहीं बच सकी।
इस हादसे ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। सोशल मीडिया पर लोगों ने पर्यटन विभाग और प्रशासन के खिलाफ जमकर गुस्सा जाहिर किया। मृतकों के परिवारों ने आरोप लगाया कि अगर समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो उनके अपने आज जिंदा होते।
पर्यटकों की शिकायतें पहले भी पहुंच रही थीं
बताया जा रहा है कि बरगी डैम में चल रहे इस क्रूज को लेकर पहले भी कई शिकायतें सामने आती रही थीं। पर्यटकों ने कई बार बीच सफर में क्रूज बंद होने, इंजन में आवाज आने और तकनीकी दिक्कतों की शिकायत की थी। कई बार सेवाएं अचानक रोकनी पड़ी थीं, जिससे पर्यटक घंटों परेशान होते थे।
इसके बावजूद विभाग ने केवल अस्थायी मरम्मत कराकर क्रूज को फिर से संचालन में लगा दिया। सुरक्षा ऑडिट और तकनीकी निरीक्षण जैसी प्रक्रियाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रहीं। अब जब हादसे में 13 लोगों की मौत हो चुकी है, तब यह सवाल और बड़ा हो गया है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
हाई कोर्ट ने लिया सख्त रुख
बरगी डैम हादसे के बाद मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंचा। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि अगले तीन महीनों तक पूरे प्रदेश में नाव, बोट क्लब और क्रूज संचालन जैसी सभी गतिविधियां बंद रहेंगी।
इस आदेश में एमपी टूरिज्म के साथ-साथ निजी संचालकों द्वारा चलाई जा रही सभी नाव और क्रूज सेवाएं भी शामिल हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक सुरक्षा मानकों की पूरी समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक किसी भी तरह का जल पर्यटन संचालन नहीं किया जाएगा।
हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि सभी पर्यटन स्थलों पर लाइफ जैकेट, प्रशिक्षित गोताखोर, इमरजेंसी रेस्क्यू सिस्टम और अन्य सुरक्षा इंतजामों की जांच की जाए। कोर्ट ने कहा कि बरगी डैम जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना सरकार की जिम्मेदारी है।
अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल उन अधिकारियों पर उठ रहा है जिन्हें पहले से खतरे की जानकारी थी। जब लिखित शिकायतें मौजूद थीं, विशेषज्ञ चेतावनी दे चुके थे और तकनीकी खराबियां सामने थीं, तो फिर आखिर संचालन की अनुमति क्यों दी गई?
सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियां अब उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं जिन्होंने क्रूज की फिटनेस रिपोर्ट को मंजूरी दी थी। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में कई अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
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पर्यटन विभाग के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि बजट की कमी और प्रशासनिक देरी के कारण इंजन बदलने का फैसला टाल दिया गया था। हालांकि अब यह दलील लोगों के गुस्से को शांत नहीं कर पा रही। मृतकों के परिवारों का कहना है कि यह सिर्फ हादसा नहीं बल्कि सरकारी लापरवाही से हुई मौतें हैं।
ज्यूडिशियल कमेटी करेगी पूरे मामले की जांच
मध्य प्रदेश सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए ज्यूडिशियल कमेटी गठित करने का फैसला लिया है। यह कमेटी हादसे की तकनीकी, प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी सभी पहलुओं की जांच करेगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्रूज की फिटनेस जांच कब हुई थी, किन अधिकारियों ने अनुमति दी थी और सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया गया था। इसके अलावा यह भी जांच होगी कि हादसे के वक्त पर्याप्त लाइफ सेविंग उपकरण मौजूद थे या नहीं।
बरगी डैम हादसा अब केवल एक दुर्घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकारी तंत्र की लापरवाही और पर्यटन सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता का प्रतीक बन चुका है। 13 लोगों की मौत ने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है और अब हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि दोषियों पर आखिर क्या कार्रवाई होती है।


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