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सिर्फ 2 गाड़ियों के काफिले में निकले PM मोदी! पश्चिम एशिया संकट के बीच ईंधन बचाने का संदेश, मंत्रियों-CM ने भी घटाईं गाड़ियां



पश्चिम एशिया संकट के बीच PM मोदी ने सिर्फ 2 गाड़ियों के काफिले से दिया बड़ा संदेश, मंत्रियों-CM ने भी घटाईं कारें।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईंधन संकट की आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने बुधवार को ऐसा कदम उठाया जिसने पूरे राजनीतिक गलियारे में चर्चा छेड़ दी। प्रधानमंत्री कैबिनेट बैठक में अपने सामान्य लंबे सुरक्षा काफिले की जगह सिर्फ दो गाड़ियों के साथ पहुंचे। इसका वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। प्रधानमंत्री की ईंधन बचाने की अपील का असर अब केंद्र सरकार से लेकर बीजेपी शासित राज्यों तक दिखाई देने लगा है। कई केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने भी अपने सुरक्षा काफिलों में चलने वाली गाड़ियों की संख्या आधी कर दी है।

पश्चिम एशिया संकट के बीच PM मोदी का बड़ा संदेश

हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने दुनियाभर में ऊर्जा सुरक्षा और तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और संभावित सप्लाई संकट को देखते हुए भारत सरकार भी ऊर्जा संरक्षण पर फोकस कर रही है। इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की थी।

प्रधानमंत्री की अपील के कुछ ही समय बाद बुधवार को जब वे कैबिनेट बैठक के लिए अपने आवास से दफ्तर रवाना हुए तो लोगों ने एक अलग ही तस्वीर देखी। आमतौर पर भारी सुरक्षा घेरे और कई वाहनों के साथ चलने वाला प्रधानमंत्री का काफिला इस बार बेहद छोटा दिखाई दिया। वायरल वीडियो में सिर्फ दो गाड़ियां नजर आईं। इस दृश्य ने लोगों का ध्यान तुरंत अपनी ओर खींच लिया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई यूजर्स ने इसे “सादगी का संदेश” और “ऊर्जा बचत की मिसाल” बताया। वहीं कुछ लोगों ने इसे मौजूदा वैश्विक संकट के बीच सरकार की रणनीतिक तैयारी से जोड़कर देखा।

सामान्य तौर पर कितना बड़ा होता है प्रधानमंत्री का काफिला

प्रधानमंत्री की सुरक्षा देश की सबसे हाई-प्रोफाइल सुरक्षा व्यवस्थाओं में गिनी जाती है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तय किए गए ब्लू बुक प्रोटोकॉल के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में प्रधानमंत्री के काफिले में 14 से 17 गाड़ियां शामिल रहती हैं। इनमें सुरक्षा वाहन, संचार वाहन, एम्बुलेंस, स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी SPG की गाड़ियां और कई बैकअप वाहन शामिल होते हैं।

इसके अलावा जिस राज्य में प्रधानमंत्री का दौरा होता है वहां की पुलिस और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियां भी अतिरिक्त गाड़ियां और सुरक्षा बल तैनात करती हैं। ऐसे में कई बार प्रधानमंत्री के काफिले में कुल वाहनों की संख्या 30 से 40 तक पहुंच जाती है।

लेकिन इस बार प्रधानमंत्री का केवल दो गाड़ियों के साथ निकलना एक बड़ा प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सिर्फ ईंधन बचत तक सीमित नहीं है बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र को संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश भी देता है।

अमित शाह से राजनाथ सिंह तक, सभी ने घटाईं गाड़ियां

प्रधानमंत्री की अपील का असर केंद्रीय मंत्रियों के काफिलों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah बुधवार को कैबिनेट बैठक में सिर्फ चार गाड़ियों के साथ पहुंचे। सामान्य तौर पर उनके काफिले में 11 से 12 वाहन शामिल रहते हैं क्योंकि वे Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त नेता हैं।

इसी तरह रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटा दी है। आमतौर पर उनके साथ 11 गाड़ियों का सुरक्षा काफिला चलता है, लेकिन अब उन्होंने इसे घटाकर चार वाहनों तक सीमित कर दिया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री Jagat Prakash Nadda ने भी अपने सुरक्षा काफिले में गाड़ियों की संख्या कम कर दी है। पहले उनके साथ 10 से 11 गाड़ियां चलती थीं लेकिन अब वे केवल चार गाड़ियों के साथ यात्रा कर रहे हैं।

सरकार के भीतर इसे ऊर्जा संरक्षण की दिशा में सामूहिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने भी अपने काफिलों में केवल तीन से चार गाड़ियां रखने का फैसला किया है।

बीजेपी शासित राज्यों में भी दिखने लगा असर

प्रधानमंत्री की अपील का असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने सुरक्षा काफिलों में वाहनों की संख्या घटानी शुरू कर दी है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मंगलवार को अधिकारियों के साथ बैठक कर ऊर्जा संरक्षण को लेकर चर्चा की थी। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार ने भी सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर निर्देश जारी किए हैं।

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कई राज्यों में अब वीआईपी मूवमेंट के दौरान अनावश्यक वाहनों के उपयोग को सीमित करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों को भी सरकारी गाड़ियों के इस्तेमाल में संयम बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

बीजेपी नेताओं ने बताया ‘प्रधानसेवक’ की मिसाल

भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने प्रधानमंत्री के इस कदम की सार्वजनिक रूप से सराहना की है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने एक बार फिर साबित किया है कि वे सही मायनों में देश के “प्रधानसेवक” हैं।

उन्होंने लिखा कि जब नेतृत्व खुद उदाहरण पेश करता है तो वह जन-आंदोलन बन जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बीच संसाधनों का सही उपयोग बेहद जरूरी है और वे खुद भी अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम कर रहे हैं।

बीजेपी नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री का यह कदम आम लोगों को भी ईंधन बचत और ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक करेगा।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

प्रधानमंत्री के छोटे काफिले का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर बहस तेज हो गई। कुछ यूजर्स ने इसे “सादगी की राजनीति” बताया तो कुछ ने इसे “संकट के समय जिम्मेदार नेतृत्व” का उदाहरण कहा।

वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रधानमंत्री का काफिला बेहद सीमित वाहनों के साथ तेज गति से गुजर रहा है। आमतौर पर लंबी गाड़ियों की लाइन देखने के आदी लोगों के लिए यह दृश्य काफी अलग था।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हजारों लोगों ने इस वीडियो को शेयर किया। कई यूजर्स ने लिखा कि अगर देश के शीर्ष नेता ईंधन बचत की पहल कर सकते हैं तो आम नागरिकों को भी इसमें योगदान देना चाहिए।

ऊर्जा संरक्षण को लेकर सरकार का बड़ा फोकस

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में वैश्विक संकट के दौरान तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। सरकार लंबे समय से ऊर्जा संरक्षण और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।

हाल के वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों, एथेनॉल ब्लेंडिंग, सोलर एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों पर तेजी से काम किया गया है। अब पश्चिम एशिया संकट के बीच ईंधन बचत को लेकर सरकार अधिक सतर्क दिखाई दे रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े स्तर पर सरकारी विभाग ईंधन की बचत करते हैं तो इससे करोड़ों लीटर पेट्रोल और डीजल की खपत कम हो सकती है। इसके साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

क्या बदल सकती है VIP मूवमेंट की तस्वीर?

प्रधानमंत्री के इस कदम के बाद अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या भविष्य में वीआईपी मूवमेंट के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। लंबे काफिलों और भारी सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।

हालांकि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि प्रधानमंत्री और अन्य संवेदनशील पदों पर बैठे नेताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। इसलिए सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता। लेकिन जरूरत के हिसाब से संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव है।

राजनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री का यह कदम सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं बल्कि प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का संकेत भी हो सकता है। आने वाले दिनों में सरकारी कार्यक्रमों और वीआईपी यात्राओं में सादगी पर ज्यादा जोर देखने को मिल सकता है।

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