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कारोबार में डूबे करोड़ों, रिश्तों में दरार और बढ़ता तनाव… क्या इसी दबाव ने ले ली प्रतीक यादव की जान?


प्रतीक यादव की मौत के पीछे कारोारी नुकसान, करोड़ों के विवाद और मानसिक तनाव की कहानी सामने आई है।

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav के छोटे भाई Prateek Yadav की अचानक हुई मौत ने राजनीतिक और कारोारी गलियारों में हलचल मचा दी है। परिवार जहां इसे स्वास्थ्य संबंधी समस्या बता रहा है, वहीं कारोबारी दुनिया से जुड़े सूत्रों का दावा है कि पिछले एक साल से करोड़ों रुपये के निवेश में नुकसान, करीबी साझेदारों से विवाद और लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव ने प्रतीक यादव को मानसिक रूप से तोड़ दिया था। रियल एस्टेट और फिटनेस कारोबार में सक्रिय प्रतीक कई विवादों में घिरे हुए थे। साले अमन सिंह बिष्ट के साथ रिश्तों में खटास, कारोबारी साझेदार कृष्णानंद पांडे से करोड़ों की ठगी का विवाद और नोएडा के निवेश को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था। अब उनकी मौत के बाद इन सभी मामलों की जांच और तेज हो गई है।

KGMU पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे अखिलेश यादव, बयान से बढ़ीं अटकलें

लखनऊ स्थित King George's Medical University के पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे अखिलेश यादव बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी प्रतीक से लगभग दो महीने पहले मुलाकात हुई थी। उस दौरान उन्होंने प्रतीक को स्वास्थ्य का ध्यान रखने और कारोबार को संभालने की सलाह दी थी। अखिलेश ने कहा कि कारोबार में नुकसान इंसान को अंदर से तोड़ देता है।

अखिलेश यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक और कारोारी हलकों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या भारी आर्थिक दबाव और लगातार विवादों ने प्रतीक यादव को मानसिक तनाव में डाल दिया था। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में प्रतीक काफी परेशान रहने लगे थे। वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी कम दिखाई देने लगे थे और कई बार करीबी लोगों से भी दूरी बना रहे थे।

सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव अपने कारोबार को लेकर बेहद महत्वाकांक्षी थे। उन्होंने फिटनेस इंडस्ट्री और रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े स्तर पर निवेश किया था। लेकिन कई निवेश उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हुए, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ता चला गया।

आयरन कोर फिट जिम से शुरू हुआ विवादों का सिलसिला

गोमतीनगर के मनोज पांडेय चौराहे पर स्थित प्रतीक यादव की जिम “आयरन कोर फिट” इलाके की चर्चित फिटनेस सेंटर मानी जाती थी। इस जिम को हाई-प्रोफाइल ग्राहकों और राजनीतिक परिवारों के युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय माना जाता था। फिटनेस इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए प्रतीक ने करोड़ों रुपये का निवेश किया था।

बताया जाता है कि इस कारोबार को संभालने में उनकी पत्नी Aparna Yadav के भाई अमन सिंह बिष्ट उनकी मदद कर रहे थे। अमन बिष्ट ने 2012 के बाद कई कंपनियां रजिस्टर कराईं। इनमें से अधिकतर कंपनियां रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़ी थीं। हालांकि, आधिकारिक दस्तावेजों में कंपनियों का संचालन अमन के नाम पर दिखाई देता था, लेकिन वास्तविक निर्णय लेने का अधिकार प्रतीक यादव के पास माना जाता था।

कारोबार में नुकसान बढ़ने के बाद दोनों के रिश्तों में तनाव शुरू हो गया। सूत्रों का दावा है कि प्रतीक यादव को लगने लगा था कि कई निवेश गलत दिशा में जा रहे हैं। इसी कारण उन्होंने अमन बिष्ट को जिम ऑफिस खाली करने तक के लिए कह दिया था।

हालांकि, इन तनावों के बावजूद प्रतीक की मौत के समय अमन बिष्ट उनके साथ मौजूद थे। वे एंबुलेंस में भी दिखाई दिए और पोस्टमॉर्टम हाउस तक पहुंचे। इस घटना ने पूरे मामले को और अधिक रहस्यमय बना दिया है।

करोड़ों के निवेश को लेकर कृष्णानंद पांडे से बढ़ा विवाद

प्रतीक यादव का दूसरा बड़ा विवाद कारोबारी साझेदार Krishnanand Pandey के साथ सामने आया। बताया जा रहा है कि दोनों ने मिलकर रियल एस्टेट सेक्टर में करोड़ों रुपये का निवेश किया था। शुरुआत में कारोबार तेजी से बढ़ा, लेकिन बाद में पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद शुरू हो गया।

सूत्रों के अनुसार, जब प्रतीक यादव ने अपने निवेश की रकम वापस मांगी तो उन्हें कथित रूप से धमकियां मिलने लगीं। मामला इतना बढ़ गया कि 2025 में लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। इस FIR में कृष्णानंद पांडे, उनकी पत्नी वंदना पांडे और पिता अशोक पांडे के खिलाफ 4 से 5 करोड़ रुपये की ठगी और 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप लगाए गए।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है। आर्थिक अपराध शाखा भी इस विवाद से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि निवेश के नाम पर कितनी रकम ट्रांसफर हुई और किन कंपनियों के जरिए लेनदेन किया गया।

सूत्रों का दावा है कि इस विवाद के बाद प्रतीक यादव मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगे थे। वे अपने करीबी लोगों से लगातार इस बात का जिक्र करते थे कि उनका पैसा फंस गया है और वे कानूनी लड़ाई में उलझते जा रहे हैं।

अमन सिंह बिष्ट पर भी दर्ज हुआ धोखाधड़ी का केस

इसी बीच अमन सिंह बिष्ट का नाम एक अन्य विवाद में भी सामने आया। 20 सितंबर 2025 को ठाकुर सिंह नामक व्यक्ति ने कोर्ट के आदेश पर अमन बिष्ट के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया।

आरोप लगाया गया कि अमन बिष्ट ने 2019 में सरोजनीनगर क्षेत्र के सरसावा और अहमऊ गांव में लगभग 22 बीघा जमीन बेचने का दावा किया था। इसके एवज में लाखों रुपये लिए गए, लेकिन जमीन का सौदा पूरा नहीं किया गया।

शिकायतकर्ता का दावा था कि भुगतान अमन की कंपनी “मोनाल इंफ्राहाइट्स” के खाते में ट्रांसफर हुआ था। बाद में जब जमीन का कब्जा नहीं मिला तो मामला कोर्ट तक पहुंच गया। अब इस केस की भी पुलिस जांच कर रही है।

इस पूरे विवाद का असर प्रतीक यादव के कारोबार पर भी पड़ रहा था। सूत्र बताते हैं कि इन मामलों के कारण उनकी कारोबारी साख प्रभावित हो रही थी और कई निवेशक पीछे हटने लगे थे।

नोएडा निवेश में फंसे करोड़ों, बढ़ता गया मानसिक दबाव

सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव ने नोएडा में भी एक बड़े कारोबारी के साथ करोड़ों रुपये का निवेश किया था। शुरुआत में इस निवेश से भारी मुनाफे की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन बाद में पैसा फंस गया।

बताया जा रहा है कि जब प्रतीक ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की तो कारोबारी ने भुगतान करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मामला कानूनी विवाद की ओर बढ़ने लगा।

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करीबी लोगों का कहना है कि इसी घटना के बाद प्रतीक यादव गहरे तनाव में चले गए थे। वे कई बार अपने दोस्तों और परिवार के सामने यह चिंता जाहिर करते थे कि उनकी मेहनत की बड़ी रकम अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में फंस चुकी है।

सूत्रों के अनुसार, प्रतीक ने अपनी दोनों बेटियों के साथ इंग्लैंड शिफ्ट होने का प्लान भी बनाया था। वे भारत छोड़कर नई शुरुआत करना चाहते थे, लेकिन फंसे हुए निवेश और अधूरे कारोबारी विवादों के कारण ऐसा नहीं हो सका।

परिवार ने स्वास्थ्य समस्या बताया, लेकिन सवाल बरकरार

यादव परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि प्रतीक यादव पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी जूझ रहे थे। परिवार सार्वजनिक रूप से कारोबारी विवादों को उनकी मौत का सीधा कारण मानने से बच रहा है।

हालांकि, अखिलेश यादव के बयान और सामने आ रहे कारोबारी विवादों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस फिलहाल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और कारोबारी दस्तावेजों की जांच कर रही है।

प्रतीक यादव की मौत के बाद अब उनके सभी कारोबारी साझेदारों, कंपनियों और निवेश से जुड़े मामलों की निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस और जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या आर्थिक तनाव और कानूनी विवादों का उनकी मानसिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा था।

राजनीतिक परिवार से जुड़े होने के कारण यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम के अंतिम निष्कर्ष इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकते हैं।

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