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NEET-UG 2026 पेपर लीक का सबसे बड़ा खुलासा! नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से शुरू हुआ करोड़ों का खेल, टेलीग्राम से 10 राज्यों तक पहुंचा पेपर



NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में नासिक प्रिंटिंग प्रेस से लेकर टेलीग्राम नेटवर्क तक बड़े खुलासे, CBI जांच तेज।

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं. सीबीआई की शुरुआती जांच में पता चला है कि इस पूरे खेल की शुरुआत महाराष्ट्र के नासिक स्थित प्रिंटिंग प्रेस से हुई, जहां मेडिकल प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र छापे जा रहे थे. आरोप है कि अंदरूनी पहुंच रखने वाले लोगों ने पेपर बाहर निकाला और फिर इसे “गेस पेपर” बताकर करोड़ों रुपये में अलग-अलग राज्यों में बेचा गया. जांच एजेंसियों के मुताबिक टेलीग्राम चैनलों और एजेंटों के नेटवर्क के जरिए यह पेपर परीक्षा से कई सप्ताह पहले ही देशभर में फैल चुका था. अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और सीबीआई लगातार पूरे नेटवर्क की परतें खोल रही है.

नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से कैसे शुरू हुआ पूरा खेल

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET-UG 2026 अब शिक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है. जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का एपिक सेंटर महाराष्ट्र का नासिक बना, जहां प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग प्रक्रिया चल रही थी. सूत्रों के अनुसार शुभम खैरनार नाम का व्यक्ति प्रिंटिंग प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था और उसी पर सबसे पहले पेपर बाहर निकालने का शक जताया गया है.

जांच में सामने आया है कि पेपर लीक करने वालों ने बेहद सुनियोजित तरीके से काम किया. सीधे “असली पेपर” बेचने के बजाय इसे “हाई लेवल गेस पेपर” या “स्पेशल प्रैक्टिस सेट” के नाम से छात्रों तक पहुंचाया गया. इसका मकसद था कि यदि मामला सामने आए तो कोई भी तुरंत इसे असली प्रश्नपत्र साबित न कर सके.

बताया जा रहा है कि लीक नेटवर्क में शामिल लोगों ने मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों और उनके अभिभावकों को टारगेट किया. कई छात्रों को दावा किया गया कि यह “इनसाइड सोर्स” से आया हुआ पेपर है, जबकि कुछ लोगों को इसे केवल संभावित सवालों का सेट बताकर बेचा गया.

सीबीआई की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक यही चाल इस गैंग के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बनी. क्योंकि जब तक परीक्षा नहीं हुई, तब तक किसी को यह यकीन नहीं हुआ कि वायरल हो रहे सवाल असली प्रश्नपत्र से जुड़े हो सकते हैं.

पुणे से सीकर तक फैला एजेंटों का नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार प्रश्नपत्र बाहर निकलने के बाद इसकी पहली बड़ी डील महाराष्ट्र के पुणे में हुई. यहीं से दलालों और एजेंटों का नेटवर्क सक्रिय हो गया. सूत्रों का दावा है कि पेपर को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर विभिन्न राज्यों के एजेंटों तक पहुंचाया गया.

राजस्थान का सीकर इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया है. सीकर को देश का बड़ा मेडिकल कोचिंग हब माना जाता है और यहां हजारों छात्र NEET की तैयारी करते हैं. जांच में आरोप सामने आया है कि कई छात्रों को परीक्षा से पहले यही “गेस पेपर” उपलब्ध कराया गया था.

सूत्रों के मुताबिक कुछ एजेंट छात्रों से लाखों रुपये तक वसूल रहे थे. कई अभिभावकों को भरोसा दिलाया गया कि पेपर बेहद भरोसेमंद स्रोत से आया है. कुछ मामलों में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने अपने परिचित छात्रों और रिश्तेदारों को भी यही प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया.

जांच एजेंसियों के हाथ ऐसे डिजिटल रिकॉर्ड लगे हैं जिनमें संदिग्ध चैट, पेमेंट डिटेल्स और छात्रों से बातचीत के सबूत होने की बात कही जा रही है. अधिकारियों का मानना है कि यह केवल स्थानीय स्तर का नेटवर्क नहीं था, बल्कि इसमें कई राज्यों के लोग शामिल थे.

वायरल “गेस पेपर” से खुला सबसे बड़ा राज

पेपर लीक मामले का सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब परीक्षा खत्म होने के बाद वायरल हुए सवालों का असली प्रश्नपत्र से मिलान किया गया. जांच में पता चला कि वायरल “गेस पेपर” के 120 से ज्यादा सवाल हूबहू असली प्रश्नपत्र से मैच कर रहे थे.

यहीं से पूरे मामले ने राष्ट्रीय स्तर का रूप ले लिया. छात्रों और कोचिंग संस्थानों के बीच पहले से घूम रहे पीडीएफ और चैट्स की जांच शुरू हुई. इसके बाद कई राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां एक्टिव हो गईं.

जांच अधिकारियों के मुताबिक इतना बड़ा मैच केवल संयोग नहीं हो सकता. यही वजह है कि अब यह माना जा रहा है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से काफी पहले ही लीक हो चुका था. सूत्रों के अनुसार यह सामग्री परीक्षा से लगभग तीन सप्ताह पहले सर्कुलेशन में आ गई थी.

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह दावा पूरी तरह सही साबित होता है तो यह देश की सबसे बड़ी परीक्षा सुरक्षा विफलताओं में से एक माना जाएगा.

टेलीग्राम चैनलों से देशभर में फैलाया गया पेपर

जांच में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका भी बेहद अहम मानी जा रही है. सीबीआई और अन्य एजेंसियों को संदेह है कि टेलीग्राम चैनलों के जरिए पेपर तेजी से फैलाया गया. कई प्राइवेट ग्रुप्स और सीक्रेट चैनलों में कथित प्रश्नपत्र और उत्तर साझा किए गए.

सूत्रों के मुताबिक नेटवर्क राजस्थान, दिल्ली, बिहार, आंध्र प्रदेश समेत करीब 10 राज्यों तक पहुंच चुका था. एजेंसियां अब उन टेलीग्राम एडमिन्स और डिजिटल हैंडलर्स की पहचान करने में जुटी हैं जो इस नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे थे.

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बताया जा रहा है कि कई ग्रुप्स में छात्रों को “VIP Material”, “Final Leak”, “Confirmed Questions” जैसे नामों से फाइलें भेजी गईं. इसके बदले मोटी रकम ली गई. कुछ मामलों में डिजिटल पेमेंट ऐप्स और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की भी जांच की जा रही है.

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल पेपर लीक नहीं बल्कि एक संगठित साइबर और एजुकेशन फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है.

CBI जांच में लगातार हो रहे बड़े खुलासे

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी. अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है जबकि कई संदिग्धों से लगातार पूछताछ जारी है.

मंगलवार रात सीबीआई की टीम जयपुर पहुंची जहां राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) मुख्यालय में अधिकारियों के साथ लंबी बैठक हुई. माना जा रहा है कि राजस्थान जांच का बड़ा केंद्र बन चुका है क्योंकि यहां से कई अहम सुराग मिले हैं.

सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां अब प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों, डिजिटल चैट्स, कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन, टेलीग्राम चैनलों और संदिग्ध छात्रों के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही हैं.

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या किसी कोचिंग नेटवर्क या शिक्षा माफिया का इस पूरे रैकेट से संबंध था. कई कोचिंग संचालकों और एजेंटों पर भी एजेंसियों की नजर बनी हुई है.

शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

NEET-UG जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है. सोशल मीडिया पर लगातार परीक्षा सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने महीनों और वर्षों की मेहनत की, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं ने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं अभिभावकों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत बनाया जाए.

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और अंदरूनी मिलीभगत की वजह से अब परीक्षा सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गई है. ऐसे में केवल प्रिंटिंग प्रेस की निगरानी ही नहीं बल्कि साइबर ट्रैकिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग को भी मजबूत करना होगा.

फिलहाल सीबीआई पूरे मामले की परत-दर-परत जांच कर रही है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.

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