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रोजगार बढ़ाने के लिए योगी सरकार का बड़ा प्लान! छोटे उद्यमियों को 90% सरकारी सहायता, बुनकरों-कारीगरों की चमकेगी किस्मत



यूपी सरकार ने छोटे उद्यमियों और बुनकरों को मजबूत करने के लिए 90% सरकारी सहायता वाली CFC परियोजनाओं पर जोर बढ़ाया।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सूक्ष्म उद्यमियों, बुनकरों और कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने साफ किया है कि प्रदेश में चल रही कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) परियोजनाओं का लाभ केवल सीमित लोगों तक नहीं बल्कि ज्यादा से ज्यादा छोटे उद्यमियों तक पहुंचना चाहिए। समीक्षा बैठक में 90 प्रतिशत सरकारी सहायता से संचालित परियोजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने, आधुनिक मशीनरी और स्किल ट्रेनिंग उपलब्ध कराने, बड़े बाजारों से जोड़ने और व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए। बैठक में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की प्राथमिकताओं को सामने रखते हुए कई जिलों की परियोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई।

छोटे उद्यमियों और कारीगरों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की तैयारी

उत्तर प्रदेश सरकार पारंपरिक उद्योगों और हस्तशिल्प को नई पहचान देने की दिशा में लगातार काम कर रही है। सरकार का फोकस इस बात पर है कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट यानी ODOP योजना के तहत स्थापित कॉमन फैसिलिटी सेंटर का फायदा गांवों और छोटे कस्बों में काम कर रहे बुनकरों, कारीगरों और सूक्ष्म उद्यमियों तक पहुंचे।

समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि CFC परियोजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इसके लिए मोबाइल मैसेज, पम्पलेट, मीडिया प्रचार और उद्योग बंधु बैठकों का सहारा लेने की बात कही गई। सरकार चाहती है कि जो लोग अब तक इन योजनाओं की जानकारी से दूर थे, वे भी आधुनिक मशीनरी, डिजाइन सपोर्ट, टेस्टिंग सुविधा और स्किल ट्रेनिंग का लाभ उठा सकें।

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बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि CFC परियोजनाओं में 90 प्रतिशत हिस्सा सरकार द्वारा दिया जा रहा है जबकि केवल 10 प्रतिशत योगदान उद्यमियों को करना पड़ता है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर आर्थिक बोझ कम करना और उन्हें आधुनिक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री Rakesh Sachan ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर CFC में सिटीजन चार्टर लगाया जाए ताकि लोगों को उपलब्ध सुविधाओं की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

बुनकरों को राहत, बिजली योजना और सिल्क उद्योग पर सरकार का बड़ा फोकस

बैठक में बुनकरों और कारीगरों ने बिजली बिल, धागे की बढ़ती कीमत, बाजार में प्रतिस्पर्धा और तकनीकी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे उठाए। इस दौरान सरकार ने बताया कि बुनकरों को राहत देने के लिए फ्लैट रेट विद्युत योजना को लंबे समय तक लागू रखा गया।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2006 से 31 मार्च 2023 तक लगभग 44 करोड़ रुपये का बिजली खर्च सरकार द्वारा वहन किया गया। सरकार का मानना है कि यदि पारंपरिक उद्योगों से जुड़े लोगों को सस्ती बिजली और आधुनिक तकनीक मिलेगी तो वे बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।

अंबेडकर नगर के बुनकर CFC की समीक्षा में लगभग 4 करोड़ रुपये की सहायता से स्थापित परियोजना में अधिक से अधिक लाभार्थियों को जोड़ने पर जोर दिया गया। वहीं वाराणसी के सिल्क उत्पाद CFC में लगभग 9 करोड़ रुपये की सरकारी सहायता से तैयार सुविधाओं को ज्यादा कारीगरों तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा हुई।

सरकार चाहती है कि बनारसी सिल्क और पारंपरिक हस्तशिल्प जैसे उद्योग केवल स्थानीय बाजार तक सीमित न रहें बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बनाएं। इसी उद्देश्य से डिजाइन डेवलपमेंट, क्वालिटी टेस्टिंग और आधुनिक उत्पादन तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

3D प्रिंटिंग से लेकर ब्लैक पॉटरी तक, CFC मॉडल से बदल रही यूपी की तस्वीर

बैठक में कई जिलों की परियोजनाओं को सफलता का उदाहरण बताया गया। गाजियाबाद के इंजीनियरिंग एवं टूल रूम आधारित CFC में CNC मशीन, 3D प्रिंटिंग, मटेरियल टेस्टिंग और स्किल ट्रेनिंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां अब तक 500 से ज्यादा युवाओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

सरकार रक्षा क्षेत्र के लिए कंपोनेंट निर्माण की संभावनाओं पर भी काम कर रही है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और छोटे उद्योगों को बड़े ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी।

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मुरादाबाद के फिजिकल वेपर डिपोजिशन यानी PVD प्लांट को पर्यावरण के अनुकूल तकनीक का मॉडल बताया गया। यहां उत्पादन क्षमता को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई। वहीं संभल के बटन उद्योग CFC में 70 प्रतिशत से अधिक क्षमता उपयोग को सकारात्मक संकेत माना गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बिजली और कच्चे माल की उपलब्धता को और बेहतर बनाया जाए।

खुर्जा ब्लैक पॉटरी CFC को बैठक में सबसे सफल परियोजनाओं में से एक बताया गया। इस परियोजना से 1253 से ज्यादा लाभार्थी जुड़े हुए हैं और कारोबार 15-20 लाख रुपये से बढ़कर करीब 90-95 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। सरकार ने इसे पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने का बेहतरीन उदाहरण बताया।

बैठक में कारीगरों ने मिट्टी भंडारण के लिए अतिरिक्त भूमि की मांग भी रखी। सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक विचार करने के संकेत दिए।

सहारनपुर वुड क्राफ्ट, आगरा लेदर क्लस्टर, बरेली और मेरठ के गुड़ प्रसंस्करण CFC की भी समीक्षा की गई। मेरठ परियोजना में 1800 किसानों को जोड़कर वैल्यू एडिशन के जरिए आय बढ़ाने के प्रयासों की सराहना हुई।

सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उद्योग बंधु बैठकों का आयोजन CFC परिसरों में किया जाए ताकि छोटे उद्यमियों को सीधे उद्योग जगत से जोड़ा जा सके। साथ ही बड़ी कंपनियों और छोटे उद्योगों के बीच सप्लाई चेन नेटवर्क विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

योगी सरकार का मानना है कि यदि पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक तकनीक, मार्केटिंग सपोर्ट और वित्तीय सहायता से जोड़ा जाए तो लाखों युवाओं और कारीगरों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। यही वजह है कि अब सरकार CFC मॉडल को प्रदेश की आर्थिक मजबूती और रोजगार सृजन का बड़ा माध्यम बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

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