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शिवा शर्मा केस: नेपाल भागने का नाटक और नागपुर में गिरफ्तारी... STF ने 12 घंटे में कैसे दबोचा श्रद्धा दुबे को?


शिवा शर्मा मर्डर केस की आरोपी श्रद्धा दुबे को यूपी एसटीएफ ने 12 दिन की फरारी के बाद नागपुर के होटल से गिरफ्तार कर लिया है।

​लखनऊ के बहुचर्चित शिवा शर्मा हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे को यूपी एसटीएफ ने महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार कर लिया है। पिछले 12 दिनों से पुलिस को लगातार चकमा दे रही श्रद्धा को एसटीएफ ने केस हाथ में लेने के महज 12 घंटे के भीतर धर दबोचा। वह अपनी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश के साथ एक होटल में छिपी थी। अब एसटीएफ टीम ट्रांजिट रिमांड हासिल कर उसे नागपुर कोर्ट से लखनऊ ला रही है।

​9 अक्टूबर की रात से शुरू हुआ फरारी का खेल

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 9 अक्टूबर की रात हुई, जब श्रद्धा के फ्लैट से संदिग्ध हालात में गिरकर शिवा शर्मा की मौत हो गई थी। हादसे के बाद सबसे पहले ड्राइवर दानिश नीचे पहुंचा, जिसके बाद श्रद्धा और उसकी बहन रश्मि भी वहां आ गईं। आनन-फानन में शिवा को केजीएमयू ले जाया गया। वहां दानिश ने फोन पर शिवा की मां को घटना की सूचना दी। अस्पताल में शिवा के परिवार वालों और दानिश के बीच विवाद हो गया, जिसका फायदा उठाकर श्रद्धा, रश्मि और दानिश वहां से भाग निकले।

​नेपाल का रास्ता और दुबई भागने का नाकाम प्लान

अस्पताल से फरार होने के बाद श्रद्धा सीधे बहराइच पहुंची। वहां अपनी गाड़ी छोड़कर उसने एक टैक्सी किराए पर ली और 10 अक्टूबर को महराजगंज के सोनौली बॉर्डर से नेपाल में दाखिल हो गई। उसका असली मंसूबा नेपाल के रास्ते दुबई भागने का था, लेकिन कोई जुगाड़ न बैठ पाने के कारण उसे भारत लौटना पड़ा। वापस आकर वह कुछ दिनों तक यूपी सीमा से सटे एक जिले में रुकी और फिर लखनऊ लौटकर किसी परिचित के यहां छिप गई। इसी बीच रायबरेली से भी उसका एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया।

​मॉल के बेसमेंट में इंटरव्यू और सरेंडर की शर्तें

नेपाल से लौटने के बाद श्रद्धा लगातार पुलिस के सामने सरेंडर करने की योजना बना रही थी। सूत्रों के अनुसार, उसकी शर्त थी कि इस हत्या के मामले को आत्महत्या करार दिया जाए। इसके अलावा वह खुद को सरकारी गवाह बनाने और अपनी बहन रश्मि को इस केस से बाहर रखने की मांग कर रही थी। अपनी इन्हीं शर्तों का दबाव बनाने के लिए उसने 18 अक्टूबर को लखनऊ के एक मॉल के बेसमेंट में न्यूज एजेंसी एएनआई को कैमरे पर बयान भी दिया। लेकिन पुलिस ने उसकी ये शर्तें खारिज कर दीं, जिसके बाद वह दोबारा अंडरग्राउंड हो गई।

​पुलिस की किरकिरी और STF का 12 घंटे में एक्शन

फरार आरोपी का मीडिया में इंटरव्यू वायरल होने के बाद लखनऊ पुलिस की भारी फजीहत हुई। इस लापरवाही पर कड़ा एक्शन लेते हुए हजरतगंज कोतवाल, डीसीपी सेंट्रल और सीओ हजरतगंज को उनके पदों से हटा दिया गया। इसके तुरंत बाद मामले की जांच मौखिक रूप से यूपी एसटीएफ को सौंप दी गई। एसटीएफ चीफ अमिताभ यश के निर्देश पर टीम ने काम शुरू किया और चंद घंटों में ही श्रद्धा की लोकेशन नागपुर में ट्रेस कर ली। महज 12 घंटे के भीतर एक विशेष टीम नागपुर पहुंची और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

​आगरा में बुर्का और नागपुर के होटल में गिरफ्तारी

लखनऊ में मीडिया को बयान देने के बाद श्रद्धा किस रास्ते से नागपुर पहुंची, इसकी पूरी कड़ियां अभी जुड़नी बाकी हैं। हालांकि, पुलिस सूत्रों का कहना है कि वह लखनऊ एक्सप्रेसवे के रास्ते आगरा पहुंची थी। आगरा के एक सीसीटीवी फुटेज में उसे बुर्का पहने हुए भी देखा गया है। आगरा से निकलकर वह सीधे महाराष्ट्र के नागपुर पहुंची, जहां वह 'होटल ओम पैलेस' में अपने साथियों के साथ छिपी हुई थी और यहीं से एसटीएफ ने उसे दबोच लिया।

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​साभार: मीडिया रिपोर्ट्स

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