कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पंडाल में बारिश के बीच भगदड़ से 19 की मौत, 35 घायल। चश्मदीदों ने बताई हादसे की वजह।
कोलकाता में दुर्गा पूजा की सप्तमी की शाम चोरबागान सार्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में बारिश के दौरान मची भगदड़ में 19 लोगों की जान चली गई, जबकि 35 लोग घायल हो गए। आयोजकों के मुताबिक, बारिश से बचने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडाल के भीतर जाने लगे, जिससे वहां दबाव बढ़ गया। संकरे रास्ते, कम रोशनी और भीड़ के बीच हुई इस घटना के बाद पुलिस और पूजा समिति की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
चोरबागान दुर्गा पंडाल में कैसे हुआ हादसा?
घटना सप्तमी की शाम करीब 7:40 बजे की बताई गई है। उस समय कोलकाता में बारिश शुरू हो गई थी। मौसम विभाग ने पहले ही बारिश की संभावना जताई थी, लेकिन इसके बावजूद शहर के प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार पहुंच रही थी। चोरबागान सार्वजनिन पूजा पंडाल में भी पिछले कई दिनों से बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने आ रहे थे।
बारिश शुरू होते ही श्रद्धालुओं ने पानी से बचने के लिए पंडाल के भीतर जाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते प्रवेश द्वार पर लोगों की भीड़ बढ़ गई। अंदर जाने की कोशिश कर रहे लोगों के बीच धक्का-मुक्की होने लगी और पंडाल के भीतर दबाव बढ़ गया। इसी दौरान भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई, जिसमें लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे और कई लोग भीड़ के नीचे दब गए।
इस हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई और 35 अन्य घायल हो गए। घटना ने दुर्गा पूजा जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
आयोजक ने बताई भगदड़ की वजह
चोरबागान सार्वजनिन पूजा समिति के आयोजक प्रीतम सरकार ने बताया कि बारिश शुरू होने के बाद लोग पानी से बचने के लिए पंडाल के अंदर आने लगे थे। एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के प्रवेश करने से दबाव बढ़ा और पंडाल का एक हिस्सा गिर गया।
उनके मुताबिक, बारिश के कारण रोशनी भी कम थी, जिससे लोगों को साफ दिखाई देने में परेशानी हो रही थी। पंडाल में रोशनी वाले और अंधेरे हिस्सों के बीच आने-जाने के लिए एक ही रास्ता था। यह रास्ता काफी संकरा था, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई।
भीड़ का दबाव बढ़ने और रास्ता संकरा होने के कारण लोगों में अफरा-तफरी फैल गई। लोग बाहर निकलने या खुद को बचाने के लिए भागने लगे। इस दौरान कई लोग गिर गए और दूसरे लोगों के पैरों के नीचे दब गए। आयोजक के बयान के मुताबिक, बारिश, कम दृश्यता और रास्ते की सीमित चौड़ाई ने स्थिति को संभालना मुश्किल बना दिया था।
मां को आंखों के सामने कुचलते देख सहम गया सोनू पाल
इस हादसे में कई परिवारों ने अपने करीबियों को खो दिया। 25 वर्षीय सोनू पाल भी सप्तमी की शाम अपनी मां के साथ चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में दर्शन करने पहुंचा था। सोनू ने अपनी आंखों के सामने अपनी मां को भीड़ में कुचलते देखा। घटना के बाद भी उसके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था।
सोनू कुमारटुली का रहने वाला है। उसके मुताबिक, जब वह अपनी मां के साथ पंडाल पहुंचा, उस समय बाहर बारिश हो रही थी। बारिश के कारण लोग पंडाल से बाहर निकलने के बजाय अंदर ही रहना चाहते थे। दूसरी ओर, प्रवेश द्वार पर खड़े लोग बारिश से बचने के लिए अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे। इस वजह से वहां लगातार धक्का-मुक्की हो रही थी।
सोनू ने बताया कि भीड़ का दबाव इतना बढ़ गया कि पंडाल के अंदर मौजूद लोग अपना संतुलन खोकर गिरने लगे। उसके अनुसार, कई लोग मुंह के बल नीचे गिरे और उठ नहीं पाए।
उसने बताया कि वह खुद भी भीड़ के बीच बुरी तरह फंस गया था। किसी तरह उसने खुद को संभाला और अपनी मां को तलाशने के लिए आगे बढ़ा। लेकिन जब वह उनके पास पहुंचा, तो उसकी मां वहां नहीं थीं। सोनू ने कहा कि उस समय की स्थिति इतनी भयावह थी कि उसे लगा कि शायद वह भी जिंदा नहीं बच पाता।
वॉलंटियर कहां थे? भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था पर उठे सवाल
हादसे के बाद चश्मदीदों और स्थानीय लोगों ने पंडाल में भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल उठाए। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि प्रवेश और निकास के रास्तों को लेकर उचित घोषणाएं नहीं की गई थीं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भी पर्याप्त स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए, जिससे श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पंडाल परिसर में पर्याप्त पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थे। उनके मुताबिक, पुलिस की मौजूदगी मुख्य रूप से वीआईपी प्रवेश द्वार तक सीमित दिखाई दे रही थी। ऐसे में आम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को संभालने में परेशानी हुई।
घटना के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने में प्रशासनिक सहायता को लेकर भी शिकायतें सामने आईं। स्थानीय लोगों का कहना था कि घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए जिस तरह की मदद की जरूरत थी, वह मौके पर दिखाई नहीं दी।
इन आरोपों के बीच सवाल उठ रहा है कि जब दुर्गा पूजा पंडाल में बड़ी संख्या में वॉलंटियर तैनात थे, तो बारिश के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। स्थानीय लोगों ने पुलिस और पूजा समिति की भूमिका पर नाराजगी जताई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों पर पुलिस या पूजा समिति की ओर से कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया गया है।
भगदड़ के बाद मौके पर पहुंची पुलिस, फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीमें
हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घायलों को निकालकर इलाज के लिए कोलकाता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (MCH) भेजा गया। स्थिति को नियंत्रित करने और राहत कार्य तेज करने के लिए लालबाजार कंट्रोल रूम से अतिरिक्त पुलिस बल भेजा गया।
इसके साथ ही फायर ब्रिगेड, कोलकाता पुलिस डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप (DMG), मेडिकल टीमों और एंबुलेंस को भी मौके पर भेजा गया। इन टीमों की मदद से घायलों को निकालने और उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कार्रवाई की गई।
हालांकि, घटना के बाद स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि हादसा होते समय तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया और स्थानीय लोगों को खुद आगे आकर मदद करनी पड़ी।
चश्मदीदों ने सुनाई हादसे की भयावह तस्वीर
घटना के दौरान मौजूद एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि उसने पंडाल का एक हिस्सा गिरने की बात सुनी थी। इसके बाद वहां मौजूद लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। भगदड़ के दौरान लोग एक-दूसरे पर गिरते गए और कई लोग भीड़ के नीचे दब गए, जिससे उनकी मौत हो गई।
एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने भीड़ प्रबंधन को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि वहां बड़ी संख्या में वॉलंटियर और पुलिसकर्मी मौजूद होने के बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं की गई। उसके मुताबिक, हादसा उसकी आंखों के सामने हुआ और मौके पर मौजूद लोगों को स्थिति संभालने में काफी परेशानी हुई।
स्थानीय लोगों का आरोप था कि कोलकाता पुलिस का वाहन घटनास्थल पर खड़ा था, लेकिन पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। उनका यह भी कहना था कि बचाव के लिए स्थानीय लोग आगे आए, जबकि पूजा समिति के सदस्य उस समय दिखाई नहीं दिए।
ये बयान घटनास्थल पर मौजूद लोगों की ओर से लगाए गए आरोप हैं। घटना के दौरान पुलिस, वॉलंटियर और पूजा समिति की वास्तविक भूमिका को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
चोरबागान हादसे ने भीड़ प्रबंधन पर खड़े किए गंभीर सवाल
चोरबागान सार्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में हुई इस घटना में 19 लोगों की मौत और 35 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। आयोजक के बयान में बारिश के कारण बढ़ी भीड़, पंडाल के एक हिस्से का गिरना, कम रोशनी और संकरे रास्ते को हादसे की परिस्थितियों से जोड़ा गया है।
वहीं, चश्मदीदों और स्थानीय लोगों ने प्रवेश-निकास की व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, पुलिस की मौजूदगी और आपातकालीन सहायता को लेकर शिकायतें की हैं। हादसे के बाद इन व्यवस्थाओं और जिम्मेदार पक्षों की भूमिका पर सवाल उठे हैं।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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