कैमूर के अस्पताल में फ्रैक्चर पैर पर प्लास्टर की जगह गत्ता बांधने का मामला सामने आया। युवक को वाराणसी रेफर किया गया।
बिहार के कैमूर स्थित मोहनियां अनुमंडलीय अस्पताल में लापरवाही की हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। सड़क हादसे में पैर फ्रैक्चर होने पर एक युवक को मेडिकल स्प्लिंट या प्लास्टर लगाने के बजाय गत्ता बांध दिया गया और फिर उसे वाराणसी रेफर कर दिया गया। शहबाजपुर निवासी घायल युवक के साथ हुए इस व्यवहार के बाद अस्पताल की बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दवा लेने जा रहे बाइक सवारों को पिकअप ने मारी टक्कर
रविवार को शहबाजपुर गांव से तीन लोग बाइक पर सवार होकर नुआंव दवा लेने जा रहे थे। इस दौरान मुजान गेट के पास सामने से आ रहे एक पिकअप वाहन ने बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार तीनों लोग सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे को अंजाम देने के बाद पिकअप चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया।
हादसे में तीन लोग घायल, युवक का पैर हुआ फ्रैक्चर
दुर्घटना में घायल लोगों की पहचान शहबाजपुर गांव निवासी दिनेश सिंह की 45 वर्षीय पत्नी उमरावती देवी, उनकी 15 वर्षीय बेटी करिश्मा कुमारी और वकील सिंह के 35 वर्षीय पुत्र प्रिंस कुमार के रूप में हुई। आसपास मौजूद लोगों की सहायता से तीनों घायलों को तुरंत मोहनियां अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच में प्रिंस कुमार के पैर में गंभीर फ्रैक्चर पाया गया।
प्लास्टर और स्प्लिंट की जगह गत्ते का सहारा देकर किया रेफर
अस्पताल में आपातकालीन उपचार के दौरान स्थिति तब चौंकाने वाली बन गई, जब फ्रैक्चर वाले पैर को स्थिर रखने के लिए जरूरी मेडिकल स्प्लिंट या प्लास्टर सामग्री ही उपलब्ध नहीं मिली। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने पैर को सहारा देने के लिए गत्ते का टुकड़ा बांध दिया और मरीज को बेहतर इलाज के लिए वाराणसी रेफर कर दिया। मरीज के परिजनों ने चिंता जताई कि समुचित प्राथमिक सपोर्ट के बिना ले जाने से घायल पैर की हड्डी और आसपास के ऊतकों को अधिक नुकसान पहुंच सकता है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, उपाधीक्षक ने दिया बयान
नेशनल हाईवे के समीप स्थित होने के बावजूद आपातकालीन चिकित्सा सामग्री के अभाव को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। स्थानीय निवासियों ने तंज कसते हुए कहा कि यह कैसी व्यवस्था है, जहां बुनियादी चीजें तक नहीं हैं और अस्पताल केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। मामले पर अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने बताया कि प्रकरण की सूचना उन्हें मिली है। वहीं, स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
साभार: टीवी9


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