दिल्ली के सत्य निकेतन में चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिसके मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका है। हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। इसी दौरान मलबे के नीचे से एक छात्र की आवाज सुनाई दी, जो बचाव के लिए ‘भैया हमें बचा लो’ की गुहार लगा रहा था। मौके पर मौजूद बचावकर्मियों ने आवाज की दिशा में सावधानी से मलबा हटाने का प्रयास किया।
सत्य निकेतन में अचानक भरभराकर गिरी चार मंजिला इमारत
दिल्ली के सत्य निकेतन में चार मंजिला इमारत गिरने के बाद कुछ ही समय में पूरा परिसर मलबे में बदल गया। हादसे के समय इमारत के भीतर मौजूद लोगों को संभलने और बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाया। इमारत के गिरते ही आसपास चीख-पुकार मच गई और लोग मलबे के बीच अपने परिचितों की तलाश में जुट गए।
बताया जा रहा है कि इस इमारत में पीजी चल रहा था और ऊपरी मंजिलों पर छात्र रहते थे। अचानक इमारत के ढह जाने से वहां रहने वाले लोगों के सामने जान बचाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया।
मलबे के नीचे से आई छात्र की आवाज
हादसे के बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा और मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। बचावकर्मी जब मलबे को हटाने में जुटे थे, उसी दौरान अंदर से एक छात्र की आवाज सुनाई दी। छात्र मदद के लिए लगातार पुकार रहा था।
मलबे के भीतर से आई उसकी आवाज में वह बचाव के लिए गुहार लगाता सुनाई दिया, ‘भैया हमें बचा लो।’ यह आवाज सुनकर मौके पर मौजूद लोगों और रेस्क्यू टीमों का ध्यान उस दिशा में गया। बचावकर्मियों ने आवाज की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश शुरू की, ताकि छात्र तक सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके।
जहां जिंदा लोगों की आशंका, वहां सावधानी से हटाया गया मलबा
बिल्डिंग गिरने के बाद राहत एवं बचाव अभियान में भारी मलबे को हटाने के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, जिन हिस्सों में किसी व्यक्ति के जिंदा फंसे होने की संभावना थी, वहां मलबा हटाते समय विशेष सावधानी बरती गई।
इसी रेस्क्यू अभियान के दौरान छात्र की आवाज सुनाई देने के बाद उस हिस्से पर बचावकर्मियों का ध्यान केंद्रित हुआ। आवाज की दिशा में मलबा हटाने की प्रक्रिया तेज की गई, ताकि भीतर फंसे व्यक्ति तक जल्द पहुंचा जा सके।
मलबे में फंसे लोगों को ऑक्सीजन देने की कोशिश
बताया जा रहा है कि मलबे में फंसे लोगों को ऑक्सीजन सपोर्ट भी दिया जा रहा था। इसका उद्देश्य उन्हें बाहर निकाले जाने तक सांस लेने में होने वाली परेशानी से बचाने में मदद करना था।
मलबे के नीचे किसी व्यक्ति के जिंदा होने की जानकारी मिलने पर रेस्क्यू टीमों के लिए चुनौती और बढ़ जाती है, क्योंकि भारी मलबे को हटाते समय भीतर फंसे व्यक्ति को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसी वजह से ऐसे स्थानों पर बचाव कार्य सावधानी से किया गया।
कई लोगों के रेस्क्यू की जानकारी, कुछ की मौत
हादसे के बाद अब तक कई लोगों को रेस्क्यू किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, कुछ लोगों की मौत होने की भी जानकारी है। इसके अलावा कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
इसी वजह से घटनास्थल पर राहत और बचाव अभियान लगातार जारी रहा। बचावकर्मियों की कोशिश मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने की रही।
बिल्डिंग की हालत को लेकर उठे सवाल
सत्य निकेतन में हुए इस हादसे के बाद इमारत की हालत को लेकर भी सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बिल्डिंग पहले से ही खराब स्थिति में थी। इसके बावजूद उसमें पीजी चल रहा था और छात्र वहां रह रहे थे।
बताया जा रहा है कि इमारत के निचले हिस्से में निर्माण कार्य भी चल रहा था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि इमारत गिरने की वजह क्या थी। हादसे के बाद फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालना रही।
रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच जारी रही तलाश
चार मंजिला इमारत के ढहने के बाद मौके पर राहत और बचाव टीमों ने लगातार काम किया। भारी मलबे के बीच किसी भी व्यक्ति के जीवित होने की संभावना को देखते हुए तलाश जारी रखी गई।
मलबे के नीचे से छात्र की ‘भैया हमें बचा लो’ वाली पुकार इस हादसे के दौरान सामने आए सबसे भावुक क्षणों में से एक रही। बचावकर्मियों ने आवाज की दिशा में पहुंचने और फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए अभियान जारी रखा।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


0 टिप्पणियाँ
आपका विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण है, कृपया अपनी राय नीचे लिखें।