BHU में पद्मश्री डॉ. टीके लाहिड़ी से कथित मारपीट, एक हफ्ते बाद भी FIR नहीं होने पर परिजनों ने कार्रवाई मांगी।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा संस्थान में पद्मश्री वरिष्ठ कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. टीके लाहिड़ी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि उनके ही विभाग के चिकित्सक डॉ. अरविंद पांडेय ने अस्पताल परिसर में उनके साथ हाथापाई की। शिकायत के करीब एक सप्ताह बाद भी FIR दर्ज नहीं होने का आरोप है, जिसके बाद परिजनों ने मामले में कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
BHU अस्पताल परिसर में कथित मारपीट का मामला
मामला काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अस्पताल परिसर स्थित चिकित्सा संस्थान से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, डॉ. टीके लाहिड़ी और डॉ. अरविंद पांडेय दोनों चिकित्सा सेवा से जुड़े हैं। आरोप है कि किसी विवाद के बाद डॉ. अरविंद पांडेय ने वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. टीके लाहिड़ी के साथ कथित तौर पर हाथापाई और मारपीट की।
घटना के बाद यह मामला अस्पताल और विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का विषय बन गया। मामले को लेकर संबंधित स्तर पर शिकायत किए जाने की बात सामने आई है।
पद्मश्री से सम्मानित हैं डॉ. टीके लाहिड़ी
डॉ. टीके लाहिड़ी चिकित्सा क्षेत्र में प्रतिष्ठित नाम हैं। उन्हें चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। ऐसे वरिष्ठ चिकित्सक के साथ अस्पताल परिसर में कथित मारपीट की घटना सामने आने के बाद मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
घटना ने अस्पताल परिसर में चिकित्सकों के बीच अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल भी खड़े किए हैं। हालांकि, मारपीट के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायत के बाद भी FIR दर्ज नहीं होने का आरोप
मामले में सबसे प्रमुख आरोप यह है कि घटना के करीब एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की है। पीड़ित पक्ष की ओर से शिकायत किए जाने के बावजूद FIR नहीं होने की बात सामने आने के बाद परिजनों और समर्थकों में नाराजगी बताई जा रही है।
परिजनों की मांग है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच की जाए और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
CCTV और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान की जांच की मांग
शिकायत के आधार पर मामले की जांच में घटनास्थल के CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को देखा जा सकता है। इससे घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ, इसे स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में जांच की स्थिति और इन साक्ष्यों के आधार पर किसी निष्कर्ष तक पहुंचने की पुष्टि नहीं हुई है।
BHU प्रशासन की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि आरोपी चिकित्सक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के बजाय मामले को टालने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में अब तक क्या आधिकारिक कदम उठाए हैं और FIR दर्ज कराने के संबंध में पुलिस को क्या जानकारी दी गई है। ऐसे में प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
घटना को लेकर विश्वविद्यालय के चिकित्सकों और कर्मचारियों के बीच भी चर्चा होने की बात सामने आई है। मामले में मांग की जा रही है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।
परिजनों की ओर से कार्रवाई की मांग ऐसे समय में सामने आई है जब शिकायत के करीब एक सप्ताह बाद भी FIR दर्ज नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। फिलहाल मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की ओर से आधिकारिक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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