उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में तेंदुओं के लगातार हमलों के बीच उन्हें पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरों के पास लोगों की लापरवाही चिंता बढ़ा रही है। बच्चे पिंजरों के आसपास खेल रहे हैं और युवा सेल्फी व रील्स बना रहे हैं। कई जगह पिंजरे के लिए लगाए गए मुर्गे और बकरे भी चोरी होने की बात सामने आई है। वन विभाग ने लोगों से दूरी बनाए रखने की अपील की है।
पांच साल में 200 से ज्यादा लोगों पर तेंदुओं ने किया हमला
बिजनौर में पिछले पांच वर्षों से तेंदुओं का आतंक लोगों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में तेंदुओं ने 200 से ज्यादा लोगों पर जानलेवा हमला किया है। इन हमलों में 75 लोगों की मौत हुई है। तेंदुओं के बढ़ते हमलों को देखते हुए वन विभाग ने जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में तेंदुओं को पकड़ने के लिए करीब 120 पिंजरे लगाए हैं।
अब तक करीब 112 तेंदुओं का रेस्क्यू
वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरों की मदद से अब तक करीब 112 तेंदुओं को रेस्क्यू किया जा चुका है। रेस्क्यू किए गए तेंदुओं को जंगलों और चिड़ियाघरों में भेजा गया है। हालांकि, तेंदुओं को पकड़ने के लिए लगाए गए इन पिंजरों के आसपास लोगों की बढ़ती भीड़ अब एक अलग समस्या बनती दिखाई दे रही है।
पिंजरों के पास बच्चे खेल रहे, युवा बना रहे रील्स
गांवों में तेंदुए को पकड़ने के लिए जब गन्ने के खेतों या आबादी के नजदीक पिंजरा लगाया जाता है, तो उसके आसपास लोगों की भीड़ जुट जाती है। बच्चे पिंजरे के पास खेलते नजर आते हैं और कई बार उसके अंदर छिपने का नाटक भी करते हैं।
युवा भी इन पिंजरों को सेल्फी और वीडियो बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ लोग पिंजरे के अंदर जाकर तस्वीरें खिंचवाने से भी पीछे नहीं हटते। सोशल मीडिया के लिए रील्स और वीडियो बनाने की कोशिश में लोग इस बात को नजरअंदाज कर रहे हैं कि ये पिंजरे मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि खतरनाक जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए लगाए गए हैं।
तेंदुए को फंसाने के लिए बांधे जाते हैं मुर्गे और बकरे
तेंदुए को पिंजरे तक आकर्षित करने के लिए वन विभाग कई स्थानों पर मुर्गे और बकरे चारे के तौर पर बांधता है। इन जानवरों को पिंजरे में रखकर तेंदुए को वहां आने के लिए आकर्षित करने की कोशिश की जाती है।
हालांकि, ग्रामीणों पर इन चारे के जानवरों को चोरी कर ले जाने के आरोप भी लगे हैं। बताया जा रहा है कि अब तक करीब 30 मुर्गे और 10 बकरे चोरी हो चुके हैं। इससे तेंदुओं को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे अभियान में इस्तेमाल होने वाले चारे को लेकर भी परेशानी सामने आई है।
लोगों की भीड़ से प्रभावित हो सकता है रेस्क्यू अभियान
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, पिंजरे के आसपास लगातार लोगों की मौजूदगी तेंदुए को वहां आने से रोक सकती है। भीड़ और शोर के साथ इंसानों की गंध भी तेंदुए को उस स्थान से दूर रख सकती है। ऐसी स्थिति में तेंदुए को पिंजरे में फंसाने की वन विभाग की कोशिश प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा, अगर पिंजरे के आसपास लोगों की भीड़ मौजूद हो और उसी दौरान तेंदुआ वहां पहुंच जाए, तो स्थिति खतरनाक हो सकती है। अचानक तेंदुए के सामने आने से भगदड़ की स्थिति बन सकती है और लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
DFO जय सिंह कुशवाहा ने लोगों से की दूरी बनाए रखने की अपील
बिजनौर के DFO जय सिंह कुशवाहा ने पिंजरों के आसपास बढ़ती भीड़ और लोगों की लापरवाही पर चिंता जताई है। उन्होंने ग्रामीणों से पिंजरों से उचित दूरी बनाए रखने की अपील की है।
वन विभाग का कहना है कि पिंजरे किसी खिलौने या पिकनिक स्पॉट की तरह इस्तेमाल करने के लिए नहीं लगाए जाते। इन्हें संवेदनशील इलाकों में तेंदुओं को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के उद्देश्य से लगाया जाता है।
पिंजरे से छेड़छाड़ पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पिंजरे के साथ छेड़छाड़ करना या तेंदुए को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा डालना गंभीर मामला है। विभाग के अनुसार, ऐसा करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तेंदुओं के हमलों से प्रभावित बिजनौर में वन विभाग की ओर से लगाए गए पिंजरों का उद्देश्य जंगली जानवरों को सुरक्षित तरीके से पकड़ना है। ऐसे में पिंजरों के आसपास भीड़ जुटाना, उनके साथ छेड़छाड़ करना या वहां मौजूद चारे को ले जाना रेस्क्यू अभियान के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


0 टिप्पणियाँ
आपका विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण है, कृपया अपनी राय नीचे लिखें।