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एलिगेटर क्रैकिंग ने ली विक्रमशिला सेतु की जान? बॉल-बियरिंग की अनदेखी से गंगा में समाया 36 मीटर स्पैन, जांच में चौंकाने वाला खुलासा



विक्रमशिला सेतु हादसे में एलिगेटर क्रैकिंग और खराब मेंटेनेंस बड़ा कारण, 36 करोड़ से होगी मरम्मत, बढ़ी लोगों की परेशानी

बिहार के भागलपुर में स्थित विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा अचानक ढह जाने के बाद हुई शुरुआती जांच में बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसमें एलिगेटर क्रैकिंग और समय पर बॉल-बियरिंग न बदले जाने को हादसे की मुख्य वजह बताया गया है, 4 मई की मध्यरात्रि को गंगा नदी में गिरा 36 मीटर का स्पैन अब लाखों लोगों की आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है, जबकि विशेषज्ञों की टीम लगातार मौके पर जांच में जुटी हुई है और सरकार ने 36 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है

एलिगेटर क्रैकिंग और तकनीकी लापरवाही ने बढ़ाया खतरा

जांच में शामिल इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने पाया कि पुल के अंदरूनी हिस्सों में एलिगेटर क्रैकिंग यानी मगरमच्छ की खाल जैसी जालीनुमा दरारें विकसित हो चुकी थीं, जो लंबे समय तक दबाव और कमजोर संरचनात्मक रखरखाव का संकेत देती हैं, इस तरह की दरारें आमतौर पर तब बनती हैं जब कंक्रीट या सड़क की सतह अपनी मजबूती खोने लगती है और उस पर लगातार भारी भार पड़ता रहता है

विशेषज्ञों के अनुसार पुल के जिस हिस्से में यह दरारें सबसे ज्यादा पाई गईं, वहीं से स्लैब के गिरने की शुरुआत हुई, इसके अलावा सबसे बड़ी लापरवाही यह सामने आई कि पुल के महत्वपूर्ण हिस्सों में लगे बॉल-बियरिंग को समय पर नहीं बदला गया, जबकि ये बियरिंग पुल पर पड़ने वाले भार को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाते हैं

इंजीनियरों का मानना है कि यदि समय रहते इन बॉल-बियरिंग को बदला गया होता और नियमित मेंटेनेंस किया गया होता, तो इस बड़े हादसे को टाला जा सकता था, जांच टीम में आईआईटी और एनआईटी के विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जिन्होंने इस तकनीकी खामी को गंभीर माना है

36 करोड़ की मरम्मत योजना, लेकिन लंबी चलेगी परेशानी

सरकारी अधिकारियों के अनुसार इस क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत के लिए करीब 36 करोड़ रुपये की राशि पहले ही स्वीकृत की जा चुकी थी, लेकिन काम शुरू होने से पहले ही हादसा हो गया, अब इस बजट के जरिए पुल के टूटे हुए हिस्से को दुरुस्त किया जाएगा और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी अपनाए जाएंगे

हालांकि मरम्मत कार्य पूरा होने में लंबा समय लग सकता है, क्योंकि यह सिर्फ सतही सुधार नहीं बल्कि पूरी संरचनात्मक मजबूती की जांच और पुनर्निर्माण का मामला है, इंजीनियरों की टीम फिलहाल पुल के बाकी हिस्सों का भी निरीक्षण कर रही है ताकि भविष्य में किसी और हिस्से में खतरा न उत्पन्न हो

इस दौरान बीएसएनएल के कर्मचारी भी मौके पर मौजूद हैं, जो टूटे हुए हिस्से से प्रभावित वायरिंग और संचार व्यवस्था को दुरुस्त करने में लगे हुए हैं, वहीं गंगा नदी और पुल के ऊपर लगातार तकनीकी सर्वे किया जा रहा है

यात्रा पर भारी असर, 15 मिनट का सफर बना 2 घंटे की चुनौती

विक्रमशिला सेतु के इस हिस्से के ढहने के बाद सबसे ज्यादा असर आम लोगों की दैनिक जिंदगी पर पड़ा है, जो सफर पहले महज 15 मिनट में पूरा हो जाता था, अब वही दूरी तय करने में लोगों को करीब 2 घंटे तक का समय लग रहा है

भागलपुर से नवगछिया के बीच की दूरी, जो पहले सड़क मार्ग से लगभग 18 किलोमीटर थी, अब बढ़कर करीब 160 किलोमीटर हो गई है, जिससे लोगों को लंबा चक्कर लगाकर यात्रा करनी पड़ रही है

इसके अलावा कई लोग मजबूरी में नाव का सहारा ले रहे हैं, जिससे जोखिम भी बढ़ गया है और समय भी ज्यादा लग रहा है, लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो चुकी है, खासकर नौकरीपेशा, व्यापारियों और छात्रों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हादसा सिर्फ एक तकनीकी विफलता नहीं बल्कि लंबे समय से नजरअंदाज किए जा रहे रखरखाव का नतीजा है, अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मरम्मत कार्य कितनी तेजी और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाता है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके

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