भोपाल ट्विशा शर्मा केस में 8 दिन बाद भी अंतिम संस्कार नहीं, AIIMS ने शव डीकंपोज होने का खतरा बताया।
भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ मिस्ट्री में अब नया विवाद खड़ा हो गया है। 12 मई को हुई ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के 8 दिन बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है और शव अभी तक AIIMS भोपाल की मर्चुरी में रखा हुआ है। AIIMS ने पुलिस को पत्र लिखकर आशंका जताई है कि लंबे समय तक शव रखने से बॉडी डीकंपोज हो सकती है। इसके बाद पुलिस ने परिवार से शव ले जाने की अपील की है, लेकिन परिवार दोबारा पोस्टमार्टम की मांग पर अड़ा हुआ है। परिजनों का आरोप है कि अगर शव खराब हुआ तो केस के अहम सबूत खत्म हो जाएंगे और उन्हें न्याय नहीं मिल पाएगा।
AIIMS के पत्र से बढ़ी हलचल, शव खराब होने का जताया खतरा
ट्विशा शर्मा केस में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब 18 मई को AIIMS भोपाल प्रशासन की ओर से पुलिस को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया। इस पत्र में कहा गया कि शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अत्यधिक कम तापमान वाली विशेष सुविधा की आवश्यकता होती है, लेकिन फिलहाल ऐसी एडवांस व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। AIIMS ने साफ कहा कि लगातार कई दिनों तक शव रखे जाने से उसके डीकंपोज होने की संभावना बढ़ सकती है।
इस पत्र के सामने आने के बाद भोपाल पुलिस ने ट्विशा शर्मा के परिवार से संपर्क किया और उन्हें शव ले जाने की सलाह दी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल संस्थान की तकनीकी सीमाओं को देखते हुए ज्यादा देर तक शव रखना जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि परिवार ने पुलिस की इस अपील को स्वीकार नहीं किया और दोबारा पोस्टमार्टम की मांग दोहराई।
ट्विशा शर्मा की मौत शुरुआत से ही विवादों में रही है। परिवार लगातार दावा कर रहा है कि यह सामान्य मौत नहीं बल्कि एक संदिग्ध मामला है, जिसमें दहेज प्रताड़ना और हत्या जैसे गंभीर पहलुओं की जांच होनी चाहिए। इसी वजह से परिजन हर मेडिकल और कानूनी प्रक्रिया को लेकर बेहद सतर्क दिखाई दे रहे हैं।
परिवार बोला- “अगर बॉडी खराब हुई तो खत्म हो जाएंगे सबूत”
मृतका के भाई आशीष शर्मा ने पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि AIIMS जैसी बड़ी स्वास्थ्य संस्था में अगर शव सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है तो बॉडी को दिल्ली AIIMS या किसी बड़े सेंटर में भेजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के बड़े अस्पतालों में ऐसे डीप फ्रीजर उपलब्ध होते हैं, जिनमें शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
आशीष शर्मा ने आरोप लगाया कि यदि शव डीकंपोज हो गया तो केस से जुड़े महत्वपूर्ण फॉरेंसिक सबूत नष्ट हो सकते हैं। परिवार का मानना है कि ट्विशा की मौत के पीछे कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब केवल निष्पक्ष जांच और दोबारा पोस्टमार्टम से ही मिल सकता है। इसी वजह से वे अंतिम संस्कार से पहले सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करना चाहते हैं।
परिवार ने यह भी कहा कि उन्हें शुरुआत से जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं रहा। परिजनों का आरोप है कि ससुराल पक्ष प्रभावशाली है और मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। इसी कारण वे लगातार न्यायिक निगरानी में जांच और री-पोस्टमार्टम की मांग उठा रहे हैं।
ट्विशा शर्मा केस सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। “Justice For Twisha” अभियान के जरिए बड़ी संख्या में लोग परिवार के समर्थन में सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर 8 दिन बाद भी मामला साफ क्यों नहीं हो पाया और शव को लेकर इतनी असमंजस की स्थिति क्यों बनी हुई है।
री-पोस्टमार्टम पर अदालत का फैसला बना सबसे बड़ा इंतजार
भोपाल पुलिस कमिश्नर ने पूरे विवाद पर स्पष्ट बयान देते हुए कहा है कि पुलिस अपने स्तर पर दोबारा पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं दे सकती। उन्होंने बताया कि यह अधिकार केवल अदालत के पास है और यदि कोर्ट अनुमति देता है तो री-पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
फिलहाल परिवार ने अदालत का रुख किया हुआ है और कानूनी प्रक्रिया जारी है। अब पूरे मामले में सबसे बड़ा इंतजार कोर्ट के फैसले का है। यदि अदालत री-पोस्टमार्टम की अनुमति देती है तो यह केस एक बार फिर नए सिरे से मेडिकल जांच के दायरे में आ सकता है।
उधर, लगातार बढ़ते विवाद और सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के बीच भोपाल पुलिस भी दबाव में नजर आ रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जा रहा है। परिवार का कहना है कि जब तक उन्हें पूरी तरह संतोषजनक जांच नहीं मिलती, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे।
ट्विशा शर्मा की मौत अब केवल एक संदिग्ध घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह मामला मेडिकल सिस्टम, पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। एक तरफ AIIMS शव के डीकंपोज होने की चेतावनी दे रहा है, तो दूसरी तरफ परिवार सबूत बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला इस हाई प्रोफाइल केस की दिशा तय कर सकता है।


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