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6 टीमें, 10 हजार का इनाम और फरार पति की तलाश… ट्विशा शर्मा केस में समर्थ की बढ़ी मुश्किलें!


भोपाल के ट्विशा शर्मा मौत मामले में फरार पति समर्थ सिंह पर 10 हजार का इनाम, 6 टीमें तलाश में जुटीं।

भोपाल में पूर्व मिस पुणे ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब और ज्यादा उलझता जा रहा है. फरार पति समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 10 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया है और छह अलग-अलग टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं. दूसरी तरफ कोर्ट में अग्रिम जमानत को लेकर जोरदार बहस हुई, जहां बचाव पक्ष ने परिवार पर मीडिया ट्रायल का आरोप लगाया तो मृतका के परिजनों ने आरोपी की जमानत का कड़ा विरोध किया. मामले में अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है, जबकि व्हाट्सऐप चैट और आखिरी कॉल अब जांच का सबसे अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं.

ट्विशा शर्मा मौत केस में पुलिस ने तेज की कार्रवाई

भोपाल का चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. मामले में फरार चल रहे पति समर्थ सिंह की गिरफ्तारी अब पुलिस की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुकी है. DCP जोन-2 विकास सहवाल ने घोषणा करते हुए कहा कि समर्थ सिंह की गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने वाले व्यक्ति को 10 हजार रुपए का इनाम दिया जाएगा.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी लगातार लोकेशन बदल रहा है और इसी वजह से उसे पकड़ने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है. SIT हेड ACP डॉ. रजनीश कश्यप के नेतृत्व में छह अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं जो भोपाल समेत दूसरे शहरों में लगातार दबिश दे रही हैं. पुलिस मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों के आधार पर आरोपी तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी. शुरुआती जांच के बाद परिवार ने कई गंभीर सवाल उठाए थे, जिसके बाद मामला हाई प्रोफाइल बन गया. अब पुलिस का मानना है कि समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के बाद कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं जो मौत की असली वजह को साफ कर देंगे.

कोर्ट में 50 मिनट चली तीखी बहस, जमानत पर फैसला सुरक्षित

मामले में समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर अदालत में लंबी सुनवाई हुई. दशम अपर सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी की अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों ने करीब 50 मिनट तक अपना पक्ष रखा. सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम का माहौल बेहद गंभीर बना रहा.

समर्थ सिंह की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ईनोश जॉर्ज कार्लोस ने कोर्ट में कहा कि मृतका के परिजन पूरे मामले को मीडिया ट्रायल का रूप दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि ट्विशा किसी तरह की प्रताड़ना का शिकार थीं.

बचाव पक्ष ने कोर्ट को यह भी बताया कि घटना से लगभग 15 मिनट पहले ट्विशा अपने परिवार से फोन पर बातचीत कर रही थीं और उस समय घर में अन्य लोग भी मौजूद थे. वकील का तर्क था कि यदि मृतका मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना झेल रही होतीं तो वह परिवार को जरूर बतातीं.

सुनवाई के दौरान दोबारा पोस्टमार्टम का मुद्दा भी उठा. समर्थ सिंह के वकील ने कहा कि यदि परिवार चाहे तो दोबारा पोस्टमार्टम दिल्ली AIIMS या विदेश में भी कराया जा सकता है और बचाव पक्ष को इससे कोई आपत्ति नहीं है.

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वहीं मृतका ट्विशा शर्मा के परिवार की ओर से अधिवक्ता अंकुर पांडे ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया. उन्होंने कोर्ट में कहा कि आरोपी फरार है और जांच को प्रभावित कर सकता है, इसलिए उसे अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए.

दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया. कोर्ट रूम खाली कराने के निर्देश दिए गए और अब सभी की नजरें न्यायालय के फैसले पर टिक गई हैं.

व्हाट्सऐप चैट और आखिरी कॉल बने जांच का सबसे बड़ा एंगल

ट्विशा शर्मा केस में अब डिजिटल सबूत सबसे अहम कड़ी बनते जा रहे हैं. सुनवाई के दौरान व्हाट्सऐप चैट्स का भी जिक्र हुआ, जिसने पूरे मामले को और ज्यादा रहस्यमयी बना दिया है.

समर्थ सिंह के वकील ने अदालत में दावा किया कि चैट्स के बीच काफी लंबा गैप दिखाई दे रहा है. बचाव पक्ष का कहना है कि इन चैट्स की फॉरेंसिक जांच जरूरी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना से पहले वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां ट्विशा के मोबाइल डेटा, चैट बैकअप, कॉल रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया गतिविधियों को खंगाल रही हैं. घटना से पहले की आखिरी बातचीत और संदेशों को विशेष रूप से जांचा जा रहा है.

मृतका के परिजन लगातार आरोप लगा रहे हैं कि ट्विशा मानसिक दबाव में थीं और कई बातें परिवार से छिपाई जा रही थीं. वहीं बचाव पक्ष का कहना है कि सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए आरोपी को पहले ही दोषी साबित करने की कोशिश की जा रही है.

जांच एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल एविडेंस इस केस की दिशा तय कर सकता है. यही वजह है कि पुलिस हर छोटे से छोटे तकनीकी पहलू की जांच कर रही है.

भोपाल का यह मामला अब सिर्फ एक संदिग्ध मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें रिश्तों, मानसिक दबाव, डिजिटल सबूत और कानूनी लड़ाई के कई पहलू सामने आ रहे हैं. फरार पति समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के बाद ही इस हाई प्रोफाइल केस के कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद की जा रही है।

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