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बिजली बिल के 25 हजार डकारे तो दफ्तर के बाहर बनाया ‘मुर्गा’, VIDEO वायरल होते ही मचा सियासी बवाल

 


मुरादाबाद में 25 हजार हड़पने के आरोपी मीटर रीडर को मुर्गा बनाने का वीडियो वायरल, अखिलेश यादव के ट्वीट से बढ़ा विवाद।

मुरादाबाद में बिजली विभाग से जुड़ा एक मामला अब पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है. बिजली बिल जमा कराने के नाम पर उपभोक्ता से 25 हजार रुपये लेने और फर्जी रसीद देने के आरोप में एक संविदा मीटर रीडर को दफ्तर के बाहर कथित तौर पर ‘मुर्गा’ बनाया गया. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो मामला सीधे राजनीति तक पहुंच गया. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने वीडियो शेयर कर सरकार और बिजली विभाग पर सवाल उठाए, जिसके बाद पूरे मामले ने सियासी रंग पकड़ लिया. विभाग ने आरोपी मीटर रीडर की सेवाएं समाप्त कर जांच शुरू कर दी है, जबकि एसडीओ की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

25 हजार रुपये लेकर थमा दी फर्जी रसीद, ऐसे खुला पूरा खेल

पूरा मामला मुरादाबाद के दलपतपुरा बिजलीघर क्षेत्र का बताया जा रहा है. यहां संविदा पर काम करने वाले मीटर रीडर रानू कुमार पर आरोप लगा कि उसने एक उपभोक्ता से बिजली बिल जमा कराने के नाम पर 25 हजार रुपये लिए थे. उपभोक्ता को भरोसा दिलाया गया कि रकम विभाग के खाते में जमा कर दी जाएगी और उसका बकाया खत्म हो जाएगा.

आरोप है कि मीटर रीडर ने पैसे लेने के बाद उपभोक्ता को एक रसीद भी दी, जिसे बाद में फर्जी बताया गया. कुछ दिनों तक उपभोक्ता को किसी तरह की जानकारी नहीं मिली, लेकिन बाद में जब उसके मोबाइल पर बिजली विभाग की तरफ से दोबारा बकाया भुगतान का संदेश पहुंचा तो उसके होश उड़ गए. उसे पता चला कि जिस रकम को जमा बताया गया था, वह विभाग के खाते तक पहुंची ही नहीं.

इसके बाद उपभोक्ता ने स्थानीय लोगों और ग्रामीणों को पूरी बात बताई. मामला बढ़ने पर ग्रामीणों ने मीटर रीडर को पकड़ लिया और उसे लेकर सीधे बिजली विभाग के एसडीओ कार्यालय पहुंच गए. वहां जो हुआ, उसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

दफ्तर के बाहर आधे घंटे तक ‘मुर्गा’, VIDEO ने बढ़ाई मुश्किलें

वायरल वीडियो में मीटर रीडर को दफ्तर के बाहर ‘मुर्गा’ बने देखा जा सकता है. आरोप है कि एसडीओ की मौजूदगी में उसे करीब आधे घंटे तक इसी हालत में बैठाए रखा गया. मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया.

वीडियो वायरल होते ही लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. कुछ लोग इसे उपभोक्ता के साथ हुए कथित धोखे पर तत्काल कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे कानून हाथ में लेने और सरकारी दफ्तर में अपमानजनक व्यवहार का मामला बता रहे हैं.

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सोशल media पर वीडियो वायरल होने के बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे. लोगों का कहना है कि अगर विभागीय निगरानी मजबूत होती तो उपभोक्ता के साथ इस तरह की कथित ठगी नहीं हो पाती. वहीं कुछ लोगों ने यह भी पूछा कि अगर आरोप सही थे तो कानूनी कार्रवाई की जगह सार्वजनिक सजा क्यों दी गई.

घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी काफी चर्चा शुरू हो गई. दलपतपुरा और आसपास के इलाकों में लोग बिजली बिल वसूली और मीटर रीडरों के कामकाज को लेकर सवाल उठाने लगे हैं. कई उपभोक्ताओं ने पुराने मामलों की भी चर्चा शुरू कर दी, जहां कथित तौर पर गलत बिलिंग या भुगतान से जुड़े विवाद सामने आए थे।

अखिलेश यादव के ट्वीट से सियासत गरमाई, विभाग ने शुरू की जांच

मामले ने उस समय बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया. उन्होंने सरकार और बिजली विभाग पर निशाना साधते हुए लिखा कि जब बिजली का मीटर ही गड़बड़ है तो मीटर रीडर से क्या उम्मीद की जा सकती है.

अखिलेश यादव के ट्वीट के बाद विपक्षी दलों ने भी राज्य सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया. विपक्ष का आरोप है कि बिजली विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही लगातार बढ़ रही है, जिसकी वजह से आम उपभोक्ताओं को परेशान होना पड़ रहा है. वहीं सत्तापक्ष के नेताओं का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों पर कार्रवाई होगी.

बिजली विभाग ने भी वायरल वीडियो और पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लिया है. विभागीय अधिकारियों के अनुसार आरोपी मीटर रीडर की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं. साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर उपभोक्ता से ली गई रकम कहां गई और फर्जी रसीद कैसे तैयार की गई.

चीफ इंजीनियर अशोक कुमार चौरसिया ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है. उन्होंने यह भी बताया कि एसडीओ की भूमिका की भी जांच होगी. यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या अनुचित व्यवहार सामने आता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

फिलहाल यह मामला मुरादाबाद से निकलकर पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बन चुका है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, विपक्ष के हमले और विभागीय जांच के बीच अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या खुलासा होता है और जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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