लखनऊ में बिजली संकट पर PAC तैनात, अफसरों की स्पेशल ड्यूटी शुरू, ट्रांसफॉर्मर पहुंचे फिर भी जनता परेशान।
उत्तर प्रदेश में अघोषित बिजली कटौती अब सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं बल्कि बड़ा जनाक्रोश बन चुकी है। राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में घंटों बिजली गुल रहने से लोग सड़कों पर उतर आए हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को संवेदनशील बिजली उपकेंद्रों पर PAC तैनात करनी पड़ी। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने 31 मई तक विशेष ड्यूटी लागू करते हुए अधिकारियों को सीधे सब-स्टेशनों पर तैनात कर दिया है। ट्रांसफॉर्मरों और भारी केबलों की सप्लाई शुरू हो चुकी है, लेकिन लगातार बढ़ते लोड, जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर और कर्मचारियों की भारी कमी ने बिजली व्यवस्था की पोल खोल दी है। कई इलाकों में लोगों का गुस्सा इतना बढ़ गया कि बिजली कर्मियों को खुद को ग्रिल के अंदर बंद कर काम करना पड़ा।
लखनऊ में ‘बत्ती गुल’ पर बवाल, सब-स्टेशनों पर PAC तैनात
भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती ने राजधानी लखनऊ में हालात विस्फोटक बना दिए हैं। अलग-अलग इलाकों के लोग लगातार बिजली घरों और सब-स्टेशनों पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। फैजुल्लागंज सब स्टेशन का वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जहां नाराज लोग घंटों हंगामा करते रहे। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि बिजली कर्मचारियों को खुद को लोहे की ग्रिल के अंदर बंद करना पड़ा और वहीं से लोगों की शिकायतें सुननी पड़ीं।
बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से रात के समय बिजली कटौती सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। गर्मी में लगातार बिजली जाने से लोग परेशान हैं। कई मोहल्लों में इन्वर्टर जवाब दे चुके हैं और पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई नहीं कर रहा, जिसके कारण गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
प्रशासन ने हालात को देखते हुए लखनऊ और आसपास के 31 बिजली उपकेंद्रों को संवेदनशील घोषित किया है। इन स्थानों पर PAC की तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह की हिंसक स्थिति को रोका जा सके। कई जगहों पर पुलिस बल भी मौजूद है, लेकिन जनता का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा।
सूत्रों के मुताबिक, बिजली विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में वे मौके पर मौजूद रहेंगे और तत्काल समाधान सुनिश्चित करेंगे। शाम के समय बढ़ने वाले बिजली लोड को देखते हुए ट्रांसफॉर्मर और फीडरों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
सरकार का बड़ा एक्शन, अफसरों की स्पेशल ड्यूटी शुरू
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने बढ़ते संकट के बीच बड़ा फैसला लेते हुए विशेष ड्यूटी व्यवस्था लागू कर दी है। 23 मई से 31 मई 2026 तक संवेदनशील बिजली उपकेंद्रों पर वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई है। इन अधिकारियों को उपभोक्ताओं की शिकायतों का तुरंत समाधान करने की जिम्मेदारी दी गई है।
ऊर्जा विभाग का मानना है कि पीक डिमांड के समय सबसे ज्यादा तकनीकी फॉल्ट सामने आते हैं। इसी वजह से रात के समय विशेष निगरानी बढ़ाई गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी ट्रांसफॉर्मर या फीडर में खराबी आने पर तुरंत मरम्मत कराई जाए और उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली कटौती का सामना न करना पड़े।
बिजली विभाग ने कई महत्वपूर्ण इलाकों में कंट्रोल रूम भी एक्टिव किए हैं। इंजीनियरों और तकनीकी टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। दावा किया जा रहा है कि आने वाले दिनों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार दिखाई देगा।
हालांकि, जमीन पर हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। कई इलाकों के लोगों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद घंटों तक कोई कर्मचारी नहीं पहुंचता। रात के समय तकनीकी फॉल्ट होने पर लोगों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ता है।
नए ट्रांसफॉर्मर पहुंचे लेकिन सिस्टम की कमजोरी आई सामने
लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित पॉवर हाउस पर बड़ी संख्या में नए ट्रांसफॉर्मर पहुंचाए गए हैं। ट्रकों में भरकर भारी क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मर, हाई लोड केबल्स, फ्यूज़, स्विचर्स और अन्य बिजली उपकरण लगातार भेजे जा रहे हैं। तस्वीरों में बड़ी संख्या में बिजली संसाधनों का स्टॉक दिखाई दिया, जिससे साफ है कि विभाग अब बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की तैयारी में जुटा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या बिजली उत्पादन की कमी नहीं बल्कि वितरण व्यवस्था की कमजोरी है। पिछले कुछ वर्षों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी, लेकिन उसी हिसाब से ट्रांसफॉर्मर, तार और उपकरण अपग्रेड नहीं किए गए। नतीजा यह हुआ कि मौजूदा सिस्टम जरूरत से ज्यादा लोड उठाने लगा और लगातार फेल होने लगा।
कई इलाकों में पुराने तार वोल्टेज का दबाव नहीं झेल पा रहे। ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होकर जल रहे हैं। फीडरों में बार-बार फॉल्ट आ रहे हैं। तकनीकी खराबी की संख्या बढ़ने से मरम्मत कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
ऊर्जा मंत्री ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग पिछली सरकारों की तुलना में दोगुने से ज्यादा बढ़ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि सरकार लगातार नई परियोजनाओं और संसाधनों के जरिए मांग को पूरा करने की कोशिश कर रही है। हालांकि विपक्ष इस पूरे संकट को सरकार की नाकामी बता रहा है।
संविदा कर्मियों की कमी ने बढ़ाया संकट
बिजली संकट के पीछे सबसे बड़ा कारण कर्मचारियों की कमी भी माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार हाल के समय में संविदा कर्मियों की संख्या घटाई गई है। नई भर्ती नहीं होने से फील्ड में काम करने वाले तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी हो गई है।
स्थिति यह है कि एक छोटी तकनीकी खराबी को ठीक करने में भी घंटों लग रहे हैं। कई जगहों पर फ्यूज़ बदलने जैसे सामान्य कार्य के लिए भी लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की कमी के कारण रिस्पॉन्स टाइम लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि बिजली व्यवस्था सिर्फ मशीनों से नहीं चलती बल्कि प्रशिक्षित कर्मचारियों की मजबूत टीम की भी जरूरत होती है। लेकिन वर्तमान समय में लेबर शॉर्टेज बड़ा संकट बन चुकी है। बढ़ते लोड के मुकाबले पर्याप्त टेक्निकल स्टाफ उपलब्ध नहीं है।
यही कारण है कि जब किसी इलाके में ट्रांसफॉर्मर खराब होता है या फीडर में फॉल्ट आता है तो मरम्मत में काफी समय लग जाता है। लगातार देरी होने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ता है और फिर सब-स्टेशनों पर हंगामे जैसी स्थिति बन जाती है।
क्या अब सुधरेगी लखनऊ की बिजली व्यवस्था?
सरकार और बिजली विभाग ने हालात संभालने के लिए बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। PAC तैनाती, स्पेशल ड्यूटी, नए ट्रांसफॉर्मर और तकनीकी संसाधनों की सप्लाई से उम्मीद जरूर जगी है। लेकिन असली चुनौती पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह अपग्रेड करने और पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति की है।
अगर बढ़ती बिजली मांग के हिसाब से नेटवर्क को मजबूत नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है। फिलहाल लखनऊ के लोग यही उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार सिर्फ आदेश और दावे नहीं बल्कि जमीन पर भी राहत दिखाई दे, ताकि भीषण गर्मी में बार-बार होने वाली ‘बत्ती गुल’ से उन्हें छुटकारा मिल सके।


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