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रोज ₹500 कमाने वाली महिला के नाम पर 15 करोड़ का खेल! ई-रिक्शा चालक को आया इनकम टैक्स नोटिस, उड़ गए होश


कानपुर की ई-रिक्शा चालक महिला के नाम पर 15 करोड़ का लेन-देन, इनकम टैक्स नोटिस आते ही खुला बड़ा फर्जीवाड़ा।

कानपुर में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां रोजाना कुछ सौ रुपये कमाकर परिवार चलाने वाली ई-रिक्शा चालक महिला को 15 करोड़ रुपये के लेन-देन का आयकर नोटिस भेज दिया गया। नोटिस मिलते ही महिला के पैरों तले जमीन खिसक गई। जांच में सामने आया कि जालसाजों ने महिला के आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर उसके नाम पर फर्जी बैंक खाते खोल दिए और करोड़ों रुपये का संदिग्ध ट्रांजैक्शन किया। अब पीड़िता पुलिस और प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रही है।

ई-रिक्शा चलाकर परिवार पालने वाली महिला पर टूटा मुसीबतों का पहाड़

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर से सामने आई यह घटना हर किसी को चौंका रही है। पीड़ित महिला अर्चना मिश्रा बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं और ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का खर्च चलाती हैं। दिनभर मेहनत कर वह मुश्किल से इतना कमा पाती हैं कि घर का गुजारा हो सके, लेकिन अचानक उनके नाम पर करोड़ों रुपये के लेन-देन का मामला सामने आने से पूरा परिवार सदमे में है।

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले अर्चना मिश्रा को आयकर विभाग की ओर से एक नोटिस मिला। इस नोटिस में उनके नाम से करीब 15 करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन का जिक्र था। नोटिस पढ़ते ही महिला के होश उड़ गए क्योंकि उन्होंने जिंदगी में कभी लाखों रुपये तक नहीं देखे, करोड़ों का सवाल ही नहीं उठता।

महिला ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद कोई गलती हुई है, लेकिन जब उन्होंने दस्तावेजों की जांच कराई तो पता चला कि उनके नाम पर बैंक खातों और वित्तीय गतिविधियों का इस्तेमाल किया गया है। इसके बाद उन्हें समझ आया कि उनके साथ बड़ा साइबर और बैंकिंग फ्रॉड हुआ है।

आधार-पैन का दुरुपयोग कर खोले गए फर्जी खाते

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जालसाजों ने महिला के आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया। आरोप है कि किसी तरह महिला के दस्तावेज हासिल कर लिए गए और फिर उनके नाम पर कई बैंक खाते खोल दिए गए।

इन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपये का ट्रांजैक्शन किया गया। जांच एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल हवाला, टैक्स चोरी या किसी बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े में किया गया हो सकता है। फिलहाल पुलिस बैंक खातों की डिटेल, मोबाइल नंबर और केवाईसी रिकॉर्ड खंगाल रही है।

सूत्रों के मुताबिक कई बार गरीब और कम पढ़े-लिखे लोगों को बैंक खाता खुलवाने, सरकारी योजना दिलाने या लोन दिलाने के नाम पर उनके दस्तावेज ले लिए जाते हैं। बाद में उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनियां, खाते और लेन-देन किए जाते हैं। कानपुर का यह मामला भी कुछ इसी तरह का माना जा रहा है।

अर्चना मिश्रा ने पुलिस को बताया कि उन्होंने कभी किसी बड़े बिजनेस, कंपनी या करोड़ों के लेन-देन से कोई संबंध नहीं रखा। वह सिर्फ मेहनत-मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण करती हैं। ऐसे में उनके नाम पर 15 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन होना साफ तौर पर किसी बड़े गिरोह की साजिश की ओर इशारा करता है।

आयकर नोटिस मिलते ही सदमे में पहुंचा परिवार, पुलिस जांच में जुटी

आयकर विभाग का नोटिस मिलने के बाद महिला और उनका परिवार पूरी तरह टूट गया। परिवार को डर सताने लगा कि कहीं उन्हें जेल न जाना पड़े या भारी टैक्स और कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े। आसपास के लोगों को जब इस मामले की जानकारी मिली तो इलाके में भी हड़कंप मच गया।

इसके बाद अर्चना मिश्रा ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया और पूरे मामले की लिखित शिकायत दी। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल और आर्थिक अपराध शाखा से भी मदद ली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर महिला के दस्तावेज किसने इस्तेमाल किए और करोड़ों रुपये का पैसा कहां से आया और कहां गया।

पुलिस अब उन बैंक खातों की डिटेल जुटा रही है जिनमें यह संदिग्ध लेन-देन हुआ। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि खातों के संचालन में किन मोबाइल नंबरों, ईमेल आईडी और आईपी एड्रेस का इस्तेमाल हुआ। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए आरोपियों तक पहुंचा जा सकेगा।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आम लोगों के दस्तावेज कितने सुरक्षित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को अपने आधार, पैन और बैंक डिटेल किसी अनजान व्यक्ति या संस्था को देने से बचना चाहिए। साथ ही समय-समय पर अपने पैन कार्ड और बैंकिंग गतिविधियों की जांच करते रहना जरूरी है ताकि किसी भी तरह के फ्रॉड का समय रहते पता चल सके।

कानपुर का यह मामला अब तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। एक गरीब ई-रिक्शा चालक महिला के नाम पर 15 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन होना न सिर्फ सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि साइबर और वित्तीय अपराधी किस तरह आम लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। फिलहाल पीड़िता को उम्मीद है कि पुलिस जांच के जरिए सच सामने आएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

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