ट्विशा शर्मा मौत केस में फरार पति समर्थ सिंह जबलपुर कोर्ट से हिरासत में, भेष बदलकर पहुंचा था सरेंडर करने।
भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब करीब 10 दिनों से फरार चल रहे मुख्य आरोपी और मृतका के पति समर्थ सिंह को जबलपुर जिला अदालत परिसर से भोपाल पुलिस ने हिरासत में ले लिया। समर्थ सिंह भेष बदलकर कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा था, लेकिन कोर्ट की कार्यवाही खत्म होने के बाद पुलिस ने उसे दबोच लिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कोर्ट परिसर में हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। मीडिया से बचने के लिए समर्थ ने टोपी, मास्क और गमछे से चेहरा ढका हुआ था, लेकिन पुलिस पहले से अलर्ट थी। मामले में हाई कोर्ट ने ट्विशा शर्मा के दूसरे पोस्टमार्टम की मंजूरी भी दे दी है, जबकि बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने समर्थ सिंह का बार लाइसेंस तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
भेष बदलकर कोर्ट पहुंचा समर्थ, लेकिन पुलिस पहले से थी तैयार
भोपाल की बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले ने पूरे मध्य प्रदेश में सनसनी फैला रखी है। इस केस में लगातार फरार चल रहे ट्विशा के पति और मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को लेकर पुलिस लगातार दबिश दे रही थी। पुलिस की छह अलग-अलग टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई थीं। इसी बीच शुक्रवार को सूचना मिली कि समर्थ सिंह जबलपुर जिला अदालत में सरेंडर करने पहुंच सकता है। सूचना मिलते ही भोपाल पुलिस की टीम तत्काल जबलपुर पहुंच गई।
बताया जा रहा है कि समर्थ सिंह पूरी तैयारी के साथ अदालत पहुंचा था। उसने टोपी, मास्क और गमछे से अपना चेहरा इस तरह ढक रखा था कि कोई उसे पहचान न सके। वह अपने वकील के साथ कोर्ट परिसर में दाखिल हुआ और सरेंडर प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार करने लगा। हालांकि जब तक वह औपचारिक रूप से कोर्ट में पेश होता, तब तक अदालत की कार्यवाही समाप्त हो चुकी थी।
कोर्ट उठने के बाद समर्थ करीब एक घंटे तक परिसर में अलग-अलग जगह छिपकर बैठा रहा। वह मीडिया कैमरों और लोगों की नजरों से बचने की कोशिश करता रहा, लेकिन पुलिस लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। आखिरकार कोर्ट परिसर से बाहर निकलते समय भोपाल पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
कोर्ट परिसर में मचा हंगामा, मीडिया और वकीलों के बीच बहस
समर्थ सिंह की मौजूदगी की खबर फैलते ही जबलपुर जिला अदालत परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई। मीडिया कर्मी लगातार समर्थ की तस्वीर और बयान लेने की कोशिश कर रहे थे। जैसे ही समर्थ बाहर निकला, पत्रकारों ने उसे घेर लिया। हालांकि उसने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया।
स्थिति तब ज्यादा तनावपूर्ण हो गई जब समर्थ जिला बार एसोसिएशन के कमरे की ओर पहुंच गया। यहां मीडिया कर्मियों और कुछ वकीलों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। धक्का-मुक्की जैसे हालात भी बने। पूरे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा। चार से पांच थानों की पुलिस और लाइन से अतिरिक्त फोर्स कोर्ट परिसर में तैनात की गई। पुलिस अधिकारियों ने किसी तरह स्थिति को संभाला और समर्थ सिंह को सुरक्षित तरीके से हिरासत में लेकर भोपाल रवाना कर दिया।
10 दिन तक फरारी, लगातार बदलता रहा ठिकाना
ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई को हुई थी और उसी दिन से समर्थ सिंह फरार बताया जा रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। पुलिस ने उसके खिलाफ इनामी घोषणा भी कर दी थी और इनाम की राशि बढ़ाकर 30 हजार रुपए कर दी गई थी।
समर्थ को पकड़ने के लिए भोपाल पुलिस की छह टीमें अलग-अलग जिलों में दबिश दे रही थीं। जांच एजेंसियां उसके मोबाइल लोकेशन, संपर्कों और रिश्तेदारों पर नजर बनाए हुए थीं। इसी बीच समर्थ ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर दी थी ताकि गिरफ्तारी से बचा जा सके।
हालांकि बाद में उसने अचानक अपनी anticipatory bail application वापस ले ली। इसके बाद से ही माना जा रहा था कि वह सरेंडर की तैयारी कर रहा है। आखिरकार शुक्रवार को वह जबलपुर कोर्ट पहुंचा, लेकिन पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
हाई कोर्ट में एक साथ लगीं चार अहम याचिकाएं
मामले में पैरवी कर रहे अधिवक्ता जयदीप कौरव ने बताया कि हाई कोर्ट में इस केस से जुड़ी चार अहम याचिकाएं एक साथ सूचीबद्ध की गई थीं। इनमें समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका, ट्विशा शर्मा के दूसरे पोस्टमार्टम की मांग वाली रिट याचिका, गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत निरस्त करने का आवेदन और अन्य संबंधित याचिकाएं शामिल थीं।
वकील के मुताबिक समर्थ सिंह ने खुद इच्छा जताई थी कि वह सरेंडर करना चाहता है। इसी कारण कोर्ट की अनुमति से अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली गई। इस घटनाक्रम के बाद मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है।
ट्विशा शर्मा का दोबारा होगा पोस्टमार्टम
इस केस का सबसे बड़ा पहलू ट्विशा शर्मा के दूसरे पोस्टमार्टम को लेकर सामने आया है। हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दूसरे पोस्टमार्टम की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने दिल्ली AIIMS को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित कर भोपाल भेजने के निर्देश दिए हैं।
यह मेडिकल टीम भोपाल पहुंचकर ट्विशा शर्मा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम करेगी। हालांकि अभी पोस्टमार्टम की तारीख तय नहीं हुई है। परिवार और पुलिस दोनों को इस रिपोर्ट का इंतजार है क्योंकि इससे मौत के कारणों को लेकर कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा लगातार शुरुआत से ही निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मामले में कई अहम तथ्यों को छिपाने की कोशिश की गई। दूसरे पोस्टमार्टम की मंजूरी मिलने के बाद परिवार को अब नई जांच से उम्मीदें बढ़ गई हैं।
गिरिबाला सिंह की जमानत पर भी हाई कोर्ट सख्त
मामले में गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत को लेकर भी विवाद बढ़ता जा रहा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से हाई कोर्ट में आवेदन देकर उनकी anticipatory bail रद्द करने की मांग की गई है। हाई कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 25 मई तय की है। माना जा रहा है कि आने वाली सुनवाई में इस केस में कई बड़े कानूनी फैसले सामने आ सकते हैं। पूरे प्रदेश की नजर अब इस मामले की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया का बड़ा एक्शन
ट्विशा शर्मा मौत मामले में बढ़ते विवाद के बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी बड़ा कदम उठाया है। आरोपी समर्थ सिंह का बार लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
बार काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि अगली समीक्षा तक समर्थ सिंह वकालत नहीं कर सकेगा। यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि समर्थ स्वयं पेशे से अधिवक्ता है। इस कार्रवाई के बाद कानूनी जगत में भी इस केस की चर्चा तेज हो गई है।
ट्विशा शर्मा मौत मामला क्यों बना हाई प्रोफाइल?
भोपाल की रहने वाली ट्विशा शर्मा की मौत के बाद से यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। सोशल मीडिया पर भी यह केस तेजी से वायरल हुआ। परिवार की ओर से लगातार निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
मामले में कई सवाल उठ रहे हैं, जिनका जवाब पुलिस और मेडिकल जांच के जरिए तलाशा जा रहा है। समर्थ सिंह की गिरफ्तारी और दूसरे पोस्टमार्टम की मंजूरी के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में यह मामला मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित कानूनी लड़ाइयों में शामिल हो सकता है।


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