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ITBP जवान की मां का कटा हाथ बना सिस्टम पर सवाल! दोबारा जांच में खुला अस्पतालों का काला खेल, अब डॉक्टरों पर FIR तय


कानपुर में ITBP जवान की मां का हाथ काटने केस में दो अस्पताल दोषी पाए गए, अब डॉक्टरों और प्रबंधन पर FIR होगी।

कानपुर में आईटीबीपी जवान विकास सिंह की मां का हाथ काटे जाने का मामला अब बड़ा कानूनी मोड़ ले चुका है. स्वास्थ्य विभाग की दोबारा जांच में कृष्णा हॉस्पिटल और पारस हॉस्पिटल दोनों को लापरवाही का दोषी पाया गया है. पहले मिली क्लीन चिट पर सवाल उठने के बाद आईटीबीपी कमांडेंट ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद जांच दोबारा कराई गई. अब पुलिस कमिश्नर ने दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों और प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं. इस पूरे मामले ने कानपुर के स्वास्थ्य सिस्टम, मेडिकल नेग्लिजेंस और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सांस की तकलीफ से शुरू हुआ मामला, मां का हाथ कटने तक पहुंची कहानी

यह पूरा मामला कानपुर के महाराजपुर स्थित आईटीबीपी कैंप में तैनात जवान विकास सिंह की मां से जुड़ा है. परिवार के मुताबिक विकास सिंह की मां को अचानक सांस लेने में परेशानी हुई थी, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही हुई, जिसकी वजह से उनके हाथ में संक्रमण फैल गया.

परिजनों का कहना है कि अस्पताल स्टाफ ने समय पर सही इलाज नहीं किया और न ही संक्रमण की गंभीरता को समझा. जब हालत बिगड़ने लगी तो विकास सिंह अपनी मां को वहां से निकालकर दूसरे अस्पताल ले गए. लेकिन तब तक स्थिति काफी गंभीर हो चुकी थी.

इसके बाद विकास सिंह अपनी मां को बिठूर स्थित पारस हॉस्पिटल लेकर पहुंचे. यहां डॉक्टरों ने कथित तौर पर कहा कि मरीज की जान बचाने के लिए हाथ काटना ही एकमात्र विकल्प बचा है. परिवार के सामने बेहद दर्दनाक स्थिति पैदा हो गई और आखिरकार महिला का दाहिना हाथ काट दिया गया.

इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया. विकास सिंह का आरोप है कि अगर पहले अस्पताल में सही इलाज मिलता तो उनकी मां का हाथ बचाया जा सकता था. यही आरोप अब जांच रिपोर्ट में भी गंभीर रूप से सामने आया है.

तीन दिन तक कटा हाथ लेकर इंसाफ मांगता रहा जवान

मामले ने उस वक्त पूरे शहर का ध्यान खींचा जब आईटीबीपी जवान विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर न्याय की गुहार लगाते नजर आए. बताया गया कि वह लगातार तीन दिनों तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे.

विकास सिंह पहले रेल बाजार थाने पहुंचे, जहां उन्होंने अस्पतालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की. लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर वह कई अधिकारियों से मिले. इसके बाद वह सीधे पुलिस कमिश्नर ऑफिस पहुंचे और अपनी मां के साथ हुई घटना की पूरी जानकारी दी.

इस दौरान सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल होने लगा. लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि आखिर एक जवान, जो देश की सुरक्षा करता है, उसे अपनी मां के लिए इंसाफ मांगने के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है.

जनता के बढ़ते दबाव और मीडिया में मामला उछलने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया. कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जांच के आदेश दिए.

पहली जांच में मिली क्लीन चिट, फिर खड़े हुए बड़े सवाल

शुरुआती जांच में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दोनों अस्पतालों को क्लीन चिट दे दी थी. रिपोर्ट में कहा गया था कि इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही सामने नहीं आई है. लेकिन इस रिपोर्ट के सामने आते ही विवाद शुरू हो गया.

विकास सिंह और उनके परिवार ने जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए. उनका कहना था कि बिना निष्पक्ष जांच के अस्पतालों को बचाने की कोशिश की जा रही है. परिवार का आरोप था कि मेडिकल सिस्टम निजी अस्पतालों के दबाव में काम कर रहा है.

इसी बीच विकास सिंह ने पूरे मामले की जानकारी अपने आईटीबीपी मुख्यालय को दी. मामला सुरक्षा बलों के उच्च अधिकारियों तक पहुंचा तो स्थिति बदलती नजर आई.

कमांडेंट की एंट्री से मचा हड़कंप

आईटीबीपी कमांडेंट गौरव खुद कानपुर पहुंचे और उन्होंने जवान विकास सिंह से पूरे मामले की जानकारी ली. इसके बाद वह करीब 50 जवानों की एक छोटी टुकड़ी के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे.

कुछ ही देर में पुलिस कमिश्नरेट परिसर में भारी संख्या में आईटीबीपी जवानों की मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई. शहर में तरह-तरह की बातें फैलने लगीं. कई लोगों ने दावा किया कि आईटीबीपी जवानों ने कमिश्नर ऑफिस का घेराव कर लिया है.

हालांकि बाद में आईटीबीपी कमांडेंट गौरव ने साफ किया कि वे किसी विरोध प्रदर्शन के लिए नहीं बल्कि पुलिस कमिश्नर से मुलाकात करने पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि मामले की जांच में कई गंभीर बिंदु नजर आए हैं और इन्हीं पर चर्चा करने के लिए वे अधिकारियों से मिले थे.

कमांडेंट ने यह भी कहा कि एक जवान की मां के साथ हुई घटना बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है. उन्होंने दोबारा जांच की मांग की, जिसे पुलिस कमिश्नर ने स्वीकार कर लिया.

दोबारा जांच में खुल गई अस्पतालों की पोल

कमिश्नर के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने मामले की दोबारा जांच शुरू की. इस बार जांच टीम ने इलाज से जुड़े दस्तावेज, डॉक्टरों की रिपोर्ट, संक्रमण की स्थिति और ऑपरेशन से जुड़ी प्रक्रियाओं की विस्तार से समीक्षा की.

सूत्रों के मुताबिक दोबारा जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं. जांच रिपोर्ट में कहा गया कि इलाज के दौरान आवश्यक मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया. संक्रमण की स्थिति को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया और मरीज की हालत बिगड़ती चली गई.

जांच में यह भी पाया गया कि दोनों अस्पतालों के बीच इलाज को लेकर समन्वय की कमी थी. मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और संक्रमण की गंभीरता को लेकर पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई.

इसी आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने दोनों अस्पतालों को दोषी माना है. रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर को सौंप दी गई है.

अब डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर होगी FIR

दोबारा जांच रिपोर्ट आने के बाद कानपुर पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है. पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने कृष्णा हॉस्पिटल और पारस हॉस्पिटल के प्रबंधन के साथ संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मेडिकल नेग्लिजेंस, लापरवाही और मरीज की जान को खतरे में डालने जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है. अब इस केस में संबंधित डॉक्टरों से पूछताछ भी की जाएगी.

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जांच में आरोप साबित होते हैं तो अस्पतालों के लाइसेंस और डॉक्टरों की प्रैक्टिस पर भी असर पड़ सकता है.

मेडिकल नेग्लिजेंस पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और मेडिकल जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है. अक्सर ऐसे मामलों में परिवार न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़ते नजर आते हैं. लेकिन इस केस में आईटीबीपी जवान की लगातार कोशिशों और दबाव के बाद प्रशासन को दोबारा जांच करनी पड़ी.

स्वास्थ्य विभाग की पहली जांच पर भी अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर शुरुआत में अस्पतालों को क्लीन चिट कैसे दे दी गई थी. लोग पूछ रहे हैं कि अगर दोबारा जांच नहीं होती तो क्या पूरा मामला दब जाता.

इस केस ने यह भी दिखाया कि मेडिकल सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी जरूरी है. फिलहाल पूरे कानपुर में इस मामले की चर्चा हो रही है और लोग अब पुलिस कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं.

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