शामली हत्या केस में सपा सांसद इकरा हसन पुलिस पर भड़क गईं। थाने में धरना, हंगामा और तीखी बहस से बढ़ा विवाद।
उत्तर प्रदेश के शामली जिले के जसाला गांव में कश्यप समाज के युवक की हत्या के बाद मंगलवार को सहारनपुर में बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक बवाल खड़ा हो गया। कैराना से समाजवादी पार्टी सांसद इकरा हसन पीड़ित परिवार को लेकर डीआईजी कार्यालय पहुंचीं, जहां पुलिस अधिकारियों के रवैये को लेकर उनकी तीखी नाराजगी सामने आई। मामला इतना बढ़ गया कि सांसद को महिला थाने ले जाया गया, जहां भी उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जमकर बहस की। बाद में सदर बाजार थाने में समर्थकों के साथ धरने पर बैठीं इकरा हसन ने पुलिस पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, “या तो हमें भी जेल भेज दो या लोगों को छोड़ दो… गोली मार दो या फांसी दे दो।” पूरे घटनाक्रम के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गरमा गया और पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर नजर आया।
जसाला गांव हत्या केस से शुरू हुआ पूरा विवाद
शामली जिले के जसाला गांव में कश्यप समाज के एक युवक की हत्या के बाद इलाके में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल बना हुआ था। पीड़ित परिवार लगातार आरोप लगा रहा था कि पुलिस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रही और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही। इसी मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी सांसद इकरा हसन मंगलवार को पीड़ित परिवार के साथ सहारनपुर पहुंचीं।
डीआईजी रेंज कार्यालय में पहुंचकर उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात की और हत्या मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग रखी। बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार अपनी बात अधिकारियों के सामने विस्तार से रखना चाहता था, लेकिन इसी दौरान कुछ पुलिस अधिकारी वहां से निकल गए। इसी बात को लेकर सांसद इकरा हसन भड़क गईं और उन्होंने प्रशासनिक रवैये पर नाराजगी जताई।
डीआईजी कार्यालय के बाहर धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे। कश्यप समाज के लोग और समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस शुरू हो गई और देखते ही देखते स्थिति हंगामे में बदल गई।
डीआईजी ऑफिस के बाहर बढ़ा तनाव, अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा
डीआईजी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन तेज होने लगा तो पुलिस प्रशासन ने अतिरिक्त फोर्स बुला ली। अधिकारियों को आशंका थी कि मामला कानून व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ सकता है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की गई।
इसी दौरान इकरा हसन ने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार के साथ संवेदनशील व्यवहार नहीं किया गया। उनका कहना था कि जब कोई जनप्रतिनिधि न्याय की मांग को लेकर अधिकारियों के पास पहुंचता है तो प्रशासन को गंभीरता दिखानी चाहिए। लेकिन यहां पीड़ित पक्ष की बात पूरी तरह सुने बिना ही अधिकारी वहां से चले गए।
विवाद बढ़ने के बाद पुलिस सांसद इकरा हसन को महिला थाने ले गई। इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म हो गया। समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे जनप्रतिनिधि का अपमान बताते हुए विरोध शुरू कर दिया।
महिला थाने में भी नहीं शांत हुआ सांसद का गुस्सा
महिला थाने पहुंचने के बाद भी इकरा हसन का गुस्सा शांत नहीं हुआ। वहां महिला थाना प्रभारी समेत अन्य अधिकारियों के साथ उनकी तीखी बहस हुई। बताया जा रहा है कि पुलिस की ओर से उन्हें पानी तक ऑफर किया गया, लेकिन उन्होंने नाराजगी में पानी पीने से भी इनकार कर दिया।
करीब दस मिनट तक महिला थाने में माहौल गरमाया रहा। इसके बाद उन्हें वहां से जाने दिया गया। बाहर निकलते ही सांसद ने मीडिया और समर्थकों के सामने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर कोई जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवार के लिए आवाज उठाता है तो उसे थाने ले जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।
उनका कहना था कि प्रशासन न्याय मांगने वालों को दबाने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि जनता का भरोसा व्यवस्था से उठता जा रहा है।
सपा कार्यकर्ताओं में उबाल, थाने के बाहर जुटी भीड़
जैसे ही यह खबर फैली कि सांसद इकरा हसन को महिला थाने ले जाया गया है, समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त नाराजगी फैल गई। बड़ी संख्या में समर्थक महिला थाने और बाद में सदर बाजार थाने के बाहर पहुंचने लगे।
थाने के बाहर नारेबाजी शुरू हो गई और पुलिस प्रशासन को सुरक्षा बढ़ानी पड़ी। हालात को देखते हुए आसपास के इलाकों में भी पुलिस गश्त बढ़ा दी गई। अधिकारियों को डर था कि मामला राजनीतिक रूप से और ज्यादा भड़क सकता है।
उधर पुलिस ने डीआईजी कार्यालय के बाहर जाम लगाने और हंगामे के आरोप में पूर्व मंत्री मांगेराम कश्यप समेत पांच लोगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने कहा कि यातायात बाधित करने और कानून व्यवस्था प्रभावित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
“या हमें जेल भेज दो या लोगों को छोड़ दो”
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब इकरा हसन सीधे सदर बाजार थाने पहुंच गईं। वहां उन्होंने कश्यप समाज के लोगों को शांति भंग की धाराओं में जेल भेजे जाने का विरोध शुरू कर दिया। समर्थकों के साथ थाने पहुंचीं सांसद ने पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस की और हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने की मांग की।
बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। इसी बीच इकरा हसन ने गुस्से में कहा, “अगर प्रशासन सही कार्रवाई करे तो नेताओं को आगे आने की जरूरत ही नहीं पड़े।”
उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर पीड़ित परिवार के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। बहस के दौरान उनका गुस्सा इतना बढ़ गया कि उन्होंने कहा, “या तो हमें भी जेल भेज दो या फिर लोगों को छोड़ दो।”
इसी दौरान उनका एक बयान तेजी से वायरल हो गया, जिसमें वह कहती नजर आईं, “मार दो गोली मार दो, फांसी पर चढ़ा दो, इससे ज्यादा क्या कर लोगे?”
पुलिस ने गिरफ्तारी की खबरों का किया खंडन
घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर इकरा हसन की गिरफ्तारी की खबरें तेजी से फैलने लगीं। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा कि सांसद को गिरफ्तार नहीं किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक उन्हें केवल स्थिति सामान्य करने के उद्देश्य से महिला थाने ले जाया गया था।
एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि डीआईजी कार्यालय के बाहर यातायात बाधित करने और कानून व्यवस्था प्रभावित करने के मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने कहा कि जो लोग नियम तोड़ेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों।
हालांकि समाजवादी पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बताया है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि पीड़ित परिवार के लिए आवाज उठाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई बयानबाजी
इस पूरे मामले के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के कई नेताओं ने पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। वहीं विपक्ष इसे कानून व्यवस्था की विफलता बताकर सरकार को घेरने में जुट गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कश्यप समाज से जुड़े इस मामले ने सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर बड़ा असर पैदा किया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा तूल पकड़ सकता है, क्योंकि समाजवादी पार्टी इसे जनप्रतिनिधियों के अपमान और पीड़ित परिवार की अनदेखी से जोड़कर उठा रही है।
दूसरी ओर पुलिस प्रशासन लगातार यही दावा कर रहा है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं और किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ गलत कार्रवाई नहीं की जाएगी।
थाने के बाहर देर रात तक डटे रहे समर्थक
सदर बाजार थाने के बाहर देर रात तक समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं और कश्यप समाज के लोगों की भीड़ बनी रही। समर्थक लगातार हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने की मांग कर रहे थे। पुलिस भी पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए थी।
इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रखा गया। प्रशासन को आशंका थी कि अगर मामला और बढ़ा तो आसपास के इलाकों में भी प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं।
फिलहाल पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष पीड़ित परिवार और जनप्रतिनिधियों के सम्मान का मुद्दा उठाकर सरकार को घेर रहा है।


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