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भोजशाला के बंद कमरे में ऐसा क्या मिला! जिससे हाई कोर्ट ने कहा- ‘यह मस्जिद नहीं, मंदिर है’, ASI रिपोर्ट से पलटा पूरा मामला


धार भोजशाला केस में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, ASI सर्वे में मिली मूर्तियों और साक्ष्यों ने बदला पूरा मामला।

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद में इंदौर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए इसे मां वाग्देवी यानी मां सरस्वती का मंदिर माना है। अदालत ने ASI की 2100 पन्नों की वैज्ञानिक रिपोर्ट, पुरातात्विक साक्ष्यों, शिलालेखों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर कहा कि भोजशाला परिसर में मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हैं। ASI सर्वे के दौरान बंद कमरे का ताला खुलने पर भगवान गणेश, महिषासुर मर्दिनी, हनुमान जी समेत कई देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां मिलीं, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। कोर्ट ने ASI के 2003 वाले आदेश भी रद्द कर दिए और फैसले के बाद पूरे धार जिले में हाई अलर्ट घोषित कर 1200 पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई।

बंद कमरे का ताला खुलते ही सामने आ गईं प्राचीन मूर्तियां

भोजशाला विवाद में सबसे बड़ा मोड़ उस समय आया जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI ने परिसर के भीतर मौजूद एक बंद कमरे का वैज्ञानिक सर्वे किया। यह कमरा लंबे समय से बंद था और इसके भीतर क्या मौजूद है, इसे लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं। जैसे ही ASI की टीम ने कमरे का ताला खोला, अंदर से कई प्राचीन मूर्तियां और धार्मिक अवशेष मिले।

इनमें भगवान गणेश की प्रतिमा, महिषासुर मर्दिनी स्वरूप में मां भगवती की मूर्ति, हनुमान जी की आकृतियां और अन्य देवी-देवताओं से जुड़े अवशेष शामिल बताए गए। ASI अधिकारियों ने इन सभी वस्तुओं का दस्तावेजीकरण किया और उनकी संरचनात्मक तथा ऐतिहासिक जांच की। हिंदू पक्ष ने अदालत में दावा किया कि ये मूर्तियां इस बात का सीधा प्रमाण हैं कि भोजशाला मूल रूप से एक हिंदू मंदिर था।

ASI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि परिसर के भीतर मिले कई स्तंभ, नक्काशीदार पत्थर, कमल और शंख जैसे धार्मिक प्रतीक मंदिर वास्तुकला की ओर संकेत करते हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि बाद के समय में मूल संरचना के ऊपर नया निर्माण किया गया और प्राचीन मंदिर के कई हिस्सों का पुनः उपयोग हुआ।

2100 पन्नों की ASI रिपोर्ट ने बदल दिया पूरा केस

भोजशाला मामले में ASI ने करीब 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। इस दौरान ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार तकनीक, खुदाई, पत्थरों की संरचनात्मक जांच और ऐतिहासिक अध्ययन के जरिए साक्ष्य जुटाए गए। इसके बाद ASI ने इंदौर हाई कोर्ट में 2100 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की।

रिपोर्ट में बताया गया कि परिसर में मौजूद कई स्थापत्य अवशेष परमारकालीन मंदिर शैली से मेल खाते हैं। कई पत्थरों पर हिंदू धार्मिक चिह्न और संस्कृत शिलालेख भी पाए गए। ASI ने अदालत को बताया कि परिसर की मूल नींव प्राचीन हिंदू संरचना जैसी दिखाई देती है और बाद के काल में उस पर अन्य निर्माण किए गए।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ASI की रिपोर्ट केवल अनुमान नहीं बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन और पुरातात्विक तथ्यों पर आधारित है। कोर्ट ने माना कि परिसर में मां सरस्वती मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र होने के पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐतिहासिक स्थलों और धार्मिक प्रतीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। अदालत ने गर्भगृह और धार्मिक महत्व वाली प्रतिमाओं के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया।

अयोध्या मॉडल का जिक्र, मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीन का सुझाव

इंदौर हाई कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित कानूनी सिद्धांतों का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि जब किसी धार्मिक स्थल के ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्य स्पष्ट रूप से एक पक्ष की ओर संकेत करते हों, तब उन तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने ASI के 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें हिंदू पक्ष को पूर्ण पूजा अधिकार नहीं दिए गए थे। साथ ही मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति देने वाले आदेश को भी निरस्त कर दिया गया।

अदालत ने मुस्लिम पक्ष को सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो तो वे सरकार से वैकल्पिक भूमि की मांग कर सकते हैं। हालांकि भोजशाला परिसर के अंतिम प्रबंधन और उपयोग को लेकर निर्णय केंद्र सरकार और ASI पर छोड़ दिया गया है।

फैसले के बाद पूरे मामले की राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है। कई हिंदू संगठनों ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया है जबकि मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने के संकेत दिए हैं।

धार में हाई अलर्ट, 12 लेयर सुरक्षा व्यवस्था लागू

भोजशाला फैसले के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में दिखाई दिया। धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया गया। पुलिस कंट्रोल रूम में करीब 1200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

जिले को 12 अलग-अलग सुरक्षा जोन में बांटा गया है। रिजर्व पुलिस फोर्स, रैपिड एक्शन फोर्स और स्थानीय पुलिस को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। एसपी सचिन शर्मा ने खुद सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की और अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए।

प्रशासन ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग भी शुरू कर दी है ताकि किसी प्रकार की अफवाह या भड़काऊ पोस्ट को तुरंत रोका जा सके। शहर के संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है।

2022 में दायर याचिका से शुरू हुआ था विवाद

भोजशाला विवाद का कानूनी मोड़ वर्ष 2022 में आया था जब हिंदू पक्ष की ओर से अदालत में याचिका दायर की गई। याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने, नियमित पूजा की अनुमति देने और एक ट्रस्ट के गठन की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि भोजशाला प्राचीन काल में मां सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। उन्होंने अदालत में ऐतिहासिक ग्रंथों, शिलालेखों और स्थापत्य अवशेषों को प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया।

अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने परमार राजा भोज द्वारा रचित ‘समरांगण सूत्रधार’ ग्रंथ का उल्लेख करते हुए कहा कि भोजशाला की संरचना मंदिर निर्माण की पारंपरिक शैली से पूरी तरह मेल खाती है।

याचिका में ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग भी शामिल थी। हिंदू पक्ष का कहना था कि यह प्रतिमा मूल रूप से भोजशाला परिसर की थी।

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दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने इसे ऐतिहासिक मस्जिद बताते हुए कहा कि यहां लंबे समय से नमाज अदा की जाती रही है। हालांकि अदालत ने ASI रिपोर्ट और पुरातात्विक साक्ष्यों को अधिक महत्व देते हुए अपना फैसला सुनाया।

अब केंद्र सरकार और ASI पर टिकी सबकी नजर

हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका केंद्र सरकार और ASI की मानी जा रही है। अदालत ने साफ कहा है कि परिसर के प्रबंधन, धार्मिक उपयोग और संरक्षण को लेकर आगे की प्रक्रिया सरकार और पुरातत्व विभाग तय करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भोजशाला परिसर के संरक्षण, पूजा व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने की संभावना भी बनी हुई है।

फिलहाल धार भोजशाला का मामला पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और ASI सर्वे में मिले प्राचीन अवशेषों ने इस ऐतिहासिक विवाद को पूरी तरह नई दिशा दे दी है।

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