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गोद भराई की दावत बनी मुसीबत! रसगुल्ला खाते ही गांव में मचा हड़कंप, 30 से ज्यादा लोग अस्पताल पहुंचे



बुलंदशहर में गोद भराई की दावत के बाद 30 से ज्यादा लोग फूड पॉइजनिंग का शिकार, रसगुल्ला और खाने के सैंपल जांच को भेजे गए।

बुलंदशहर के जहांगीराबाद क्षेत्र के सालवा गांव में एक गोद भराई समारोह उस वक्त अफरा-तफरी में बदल गया, जब दावत खाने के कुछ ही देर बाद 30 से ज्यादा लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। समारोह में शामिल लोगों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते पूरे गांव में हड़कंप मच गया और कई लोगों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाना पड़ा। प्राथमिक जांच में दावत में परोसे गए मटर पनीर और छेना रसगुल्ले को बीमारी की वजह माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग ने मौके पर पहुंचकर खाने के सैंपल कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

गोद भराई की खुशियां कुछ ही घंटों में मातम जैसे माहौल में बदलीं

जानकारी के मुताबिक सालवा गांव निवासी कलवा उर्फ प्रेम सिंह ने अपनी बेटी मीनाक्षी की गोद भराई का कार्यक्रम रखा था। परिवार में खुशी का माहौल था और बड़ी संख्या में रिश्तेदारों के साथ गांव के लोग भी समारोह में पहुंचे थे। पूरे गांव में जश्न जैसा माहौल दिखाई दे रहा था। दावत में मेहमानों के लिए कई तरह के व्यंजन तैयार किए गए थे, जिनमें मटर पनीर की सब्जी और छेना रसगुल्ला खास आकर्षण बने हुए थे।

ग्रामीणों के अनुसार, कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था और लोग भोजन का आनंद ले रहे थे। लेकिन खाना खाने के कुछ ही घंटों बाद अचानक लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। सबसे पहले कुछ लोगों को पेट दर्द और उल्टी की शिकायत हुई। धीरे-धीरे बीमार होने वालों की संख्या बढ़ती चली गई। कई लोगों को तेज दस्त और चक्कर आने लगे। देखते ही देखते गांव में चीख-पुकार और अफरातफरी का माहौल बन गया।

परिजन तुरंत अपने बीमार रिश्तेदारों को लेकर अस्पतालों की तरफ भागने लगे। कुछ लोगों की हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें स्ट्रेचर पर ले जाना पड़ा। गांव में अचानक फैली इस घटना ने लोगों को दहशत में डाल दिया। कई परिवार पूरी रात अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे।

रसगुल्ला और मटर पनीर पर उठा शक, स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच

ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि ज्यादातर लोगों ने दावत में छेना रसगुल्ला और मटर पनीर खाया था। इसके बाद ही लोगों की तबीयत खराब होने लगी। यही वजह है कि अब फूड पॉइजनिंग का शक इन्हीं खाद्य पदार्थों पर जताया जा रहा है।

घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग तुरंत सक्रिय हो गया। करीब एक दर्जन एंबुलेंस गांव में भेजी गईं। मेडिकल टीम ने गांव पहुंचकर मरीजों की जांच शुरू की और गंभीर रूप से बीमार लोगों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा जिला अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों की निगरानी कर रही है।

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खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और दावत में बने खाने के सैंपल एकत्र किए। अधिकारियों ने मटर पनीर, मिठाई और अन्य खाद्य सामग्री को जांच के लिए लैब भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर किन कारणों से इतने बड़े स्तर पर लोग बीमार हुए।

स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती लक्षण फूड पॉइजनिंग जैसे दिखाई दे रहे हैं। हालांकि लैब रिपोर्ट के बाद ही इसकी आधिकारिक पुष्टि की जाएगी। डॉक्टरों ने बताया कि अधिकतर मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन कुछ लोगों को अभी भी निगरानी में रखा गया है।

गांव में दहशत, प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

इस घटना के बाद सालवा गांव में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है। जिन परिवारों के लोग अस्पताल में भर्ती हैं, वे लगातार उनके स्वास्थ्य को लेकर परेशान हैं। कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पहली बार गांव में इतनी बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ बीमार होते देखा है।

प्रशासन ने गांव में स्वास्थ्य टीमों की तैनाती बढ़ा दी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि गांव में किसी भी नए मरीज की जानकारी तुरंत दर्ज की जाए। एहतियात के तौर पर लोगों को बाहर का खाना न खाने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी के मौसम में खाने-पीने की चीजें जल्दी खराब हो जाती हैं। यदि भोजन सही तरीके से सुरक्षित न रखा जाए तो इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और स्वास्थ्य विभाग लगातार गांव में कैंप कर रहा है।

घटना के बाद पूरे इलाके में इस मामले की चर्चा तेज हो गई है। लोग यह जानने को लेकर उत्सुक हैं कि आखिर दावत का कौन सा खाद्य पदार्थ इतनी बड़ी संख्या में लोगों की तबीयत बिगाड़ने की वजह बना। अब सभी की नजर खाद्य विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में इस पूरे मामले का खुलासा कर सकती है।

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