बागपत में पुलिस ने अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़ कर 20 तमंचे, बंदूकें और 3 तस्करों को गिरफ्तार किया।
बागपत के बड़ौत इलाके में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक खंडहर भवन में चल रही अवैध हथियार फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में अवैध तमंचे, बंदूकें, कारतूस और हथियार बनाने के उपकरण बरामद किए हैं। इस कार्रवाई में तीन हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जबकि पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड फरार हो गया। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अवैध हथियारों की सप्लाई कर रहा था। मामले का खुलासा होने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।
खंडहर में बन रहे थे तमंचे, पुलिस की रेड से खुला बड़ा राज
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में अवैध हथियार कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को यह बड़ी सफलता मिली। पुलिस अधीक्षक सूरज राय के निर्देश पर बड़ौत कोतवाली पुलिस और अन्य टीमों ने गुप्त सूचना के आधार पर पूर्वी यमुना नहर झाल के पास स्थित एक पुराने खंडहर भवन में छापेमारी की। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी चौंक गए।
खंडहर के भीतर अवैध हथियार बनाने का पूरा सेटअप तैयार किया गया था। वहां अलग-अलग बोर के तमंचे तैयार किए जा रहे थे। पुलिस ने मौके से 315 बोर के 13 तमंचे, 12 बोर के 5 तमंचे, 12 बोर की 2 बंदूकें, जिंदा कारतूस, खोखा कारतूस और अधबनी नालें बरामद कीं। इसके अलावा हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई मशीनरी उपकरण और औजार भी जब्त किए गए।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह कोई छोटा-मोटा नेटवर्क नहीं था बल्कि संगठित तरीके से अवैध हथियार तैयार कर उन्हें अपराधियों तक पहुंचाया जा रहा था। बरामद हथियारों की संख्या और उपकरणों की मौजूदगी से साफ हो गया कि यहां लंबे समय से बड़े पैमाने पर काम चल रहा था।
झोलाछाप डॉक्टर निकला हथियार तस्करी गैंग का सदस्य
इस कार्रवाई में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिनकी पहचान सलीम, फरमान और शौएब के रूप में हुई है। पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में से एक आरोपी झोलाछाप डॉक्टर बताया जा रहा है, जो अवैध हथियारों के कारोबार में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
गिरफ्तार आरोपी सलीम का नाम पहले भी आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ पहले से आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अलग-अलग जिलों में सक्रिय अपराधियों को हथियार सप्लाई करते थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से काम करते थे। फैक्ट्री को सुनसान खंडहर में इसलिए चलाया जा रहा था ताकि किसी को शक न हो। आसपास के लोगों को भी इस बात की भनक नहीं थी कि उनके इलाके में हथियारों का इतना बड़ा नेटवर्क संचालित हो रहा है।
जेल से बाहर आते ही फिर सक्रिय हुआ मास्टरमाइंड
पुलिस जांच में सबसे बड़ा खुलासा इस गैंग के फरार मास्टरमाइंड को लेकर हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक पूरे नेटवर्क का संचालन वही कर रहा था और हाल ही में जेल से जमानत पर बाहर आया था। जेल से छूटते ही उसने फिर से अवैध हथियार कारोबार शुरू कर दिया।
पुलिस का कहना है कि फरार आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और जल्द गिरफ्तारी का दावा किया गया है। अधिकारियों को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार दूसरे जिलों और राज्यों तक भी जुड़े हो सकते हैं।
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जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि अब तक कितने हथियार तैयार कर सप्लाई किए जा चुके हैं और किन अपराधियों तक ये हथियार पहुंचे। पुलिस को यह भी शक है कि आगामी चुनावों और गैंगवार जैसी घटनाओं में इस्तेमाल के लिए इन हथियारों की मांग बढ़ रही थी।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई से अपराधियों में मचा डर
इस पूरे ऑपरेशन के बाद बागपत पुलिस की कार्रवाई की जमकर चर्चा हो रही है। पुलिस अधीक्षक सूरज राय ने कार्रवाई करने वाली टीम की सराहना करते हुए 25 हजार रुपये के नकद इनाम की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि जिले में अपराध और अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
एसपी ने कहा कि अवैध हथियार समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं क्योंकि इनका इस्तेमाल हत्या, लूट, रंगदारी और गैंगवार जैसी घटनाओं में किया जाता है। ऐसे में इस तरह की फैक्ट्रियों पर कार्रवाई बेहद जरूरी है।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और संपर्कों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
पश्चिमी यूपी में अवैध हथियार कारोबार बना बड़ी चुनौती
पश्चिमी उत्तर प्रदेश लंबे समय से अवैध हथियारों के कारोबार को लेकर चर्चा में रहा है। कई जिलों में पहले भी ऐसी मिनी फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं जहां देसी तमंचे और बंदूकें तैयार की जाती थीं। इन हथियारों की मांग अपराध जगत में लगातार बनी रहती है क्योंकि इन्हें सस्ते दामों में आसानी से हासिल किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अवैध हथियार छोटे अपराधों को बड़े गैंग अपराधों में बदलने का काम करते हैं। यही वजह है कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऐसे नेटवर्क पर नजर बनाए रखती हैं।
बागपत में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर कानून को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पुलिस भी उनके खिलाफ लगातार सख्त अभियान चला रही है।


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