भारत में डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर बड़ा खुलासा, WhatsApp ने 9400+ अकाउंट्स बैन किए, कंबोडिया से चल रहा था इंटरनेशनल फ्रॉड नेटवर्क।
भारत में तेजी से फैल रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर बड़ा खुलासा हुआ है, जहां WhatsApp ने जनवरी से 12 हफ्तों के भीतर 9400 से ज्यादा अकाउंट्स को बैन कर दिया है। यह कार्रवाई सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर की गई, जिसमें सामने आया कि भारतीय यूजर्स को ठगने वाले अधिकतर अकाउंट्स कंबोडिया स्थित स्कैम सेंटर से ऑपरेट हो रहे थे और खुद को पुलिस या जांच एजेंसियों के नाम पर पेश कर लोगों से ठगी कर रहे थे।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर बड़ा खुलासा
देशभर में बढ़ते साइबर फ्रॉड के बीच डिजिटल अरेस्ट स्कैम ने लोगों को दहशत में डाल दिया था। इस स्कैम में अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, CBI अफसर या किसी जांच एजेंसी का सदस्य बताकर लोगों को कॉल या मैसेज करते थे। उन्हें डराया जाता था कि उनके खिलाफ कोई गंभीर मामला दर्ज है और उन्हें तुरंत ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया जा रहा है।
इस दौरान पीड़ितों से कहा जाता था कि वे अपनी बैंक डिटेल्स, OTP या भारी रकम ट्रांसफर करें, ताकि जांच में सहयोग किया जा सके। डर और घबराहट में आकर कई लोग इस जाल में फंस जाते थे।
9400 से ज्यादा अकाउंट्स पर WhatsApp का एक्शन
WhatsApp ने इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए बड़ा कदम उठाया। कंपनी ने जनवरी से शुरू हुई 12 हफ्तों की अवधि में 9400 से अधिक संदिग्ध अकाउंट्स को बैन कर दिया। यह कार्रवाई भारत सरकार की एजेंसियों के साथ साझा इनपुट और जांच के आधार पर की गई।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने इस बात की जानकारी दी, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया।
कंबोडिया से जुड़ा इंटरनेशनल कनेक्शन
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इस पूरे स्कैम का ऑपरेशन भारत में नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों, खासकर कंबोडिया से हो रहा था। वहां मौजूद स्कैम सेंटर भारत के लोगों को निशाना बनाकर WhatsApp अकाउंट्स के जरिए ठगी कर रहे थे।
इससे साफ हुआ कि यह सिर्फ लोकल फ्रॉड नहीं, बल्कि एक संगठित इंटरनेशनल साइबर क्राइम नेटवर्क है, जो भारतीय नागरिकों को बड़े पैमाने पर निशाना बना रहा है।
पुलिस और एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल
ठगों ने लोगों को भ्रमित करने के लिए बेहद चालाक तरीका अपनाया। वे अपने WhatsApp प्रोफाइल में Delhi Police, Mumbai HQ, CBI और ATS जैसे नाम लिखते थे। इतना ही नहीं, प्रोफाइल फोटो में सरकारी लोगो और यूनिफॉर्म जैसी तस्वीरें लगाई जाती थीं, जिससे आम व्यक्ति को यह असली अकाउंट लगे।
इस तरह के नकली प्रोफाइल देखकर लोग आसानी से भरोसा कर लेते थे और ठगी का शिकार हो जाते थे।
सरकार और एजेंसियों के साथ मिलकर कार्रवाई
इस मामले में भारत सरकार की कई एजेंसियों ने अहम भूमिका निभाई। Indian Cyber Crime Coordination Centre, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग ने WhatsApp को जरूरी इनपुट दिए।
इन्हीं सूचनाओं के आधार पर कंपनी ने एक विशेष जांच शुरू की और संदिग्ध अकाउंट्स को चिन्हित कर कार्रवाई की।
नए टूल्स और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
WhatsApp ने बताया कि अब वह केवल शिकायत मिलने पर कार्रवाई नहीं कर रहा, बल्कि एडवांस एनफोर्समेंट टूल्स का इस्तेमाल कर पहले ही ऐसे अकाउंट्स की पहचान कर रहा है जो संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं।
कंपनी ने अपने सिस्टम को और मजबूत करते हुए ऐसे नेटवर्क्स को जड़ से खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
SIM बाइंडिंग और डेटा शेयरिंग पर सहमति
इस मामले में एक और बड़ा कदम सामने आया है। WhatsApp ने सब्सक्राइबर आइडेंटिटी मॉड्यूल यानी SIM बाइंडिंग को लागू करने पर सहमति जताई है। इसका मतलब है कि अब अकाउंट्स की पहचान और भी मजबूत तरीके से की जा सकेगी।
साथ ही कंपनी ने यह भी कहा है कि वह सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के तहत कानूनी और प्राइवेसी सीमाओं का पालन करते हुए समय-समय पर जरूरी डेटा साझा करेगी।
साइबर फ्रॉड के खिलाफ सख्त संकेत
यह पूरा मामला इस बात का संकेत है कि भारत में साइबर अपराध अब एक नए स्तर पर पहुंच चुका है, जहां इंटरनेशनल नेटवर्क्स सक्रिय हैं। लेकिन WhatsApp और सरकारी एजेंसियों की यह संयुक्त कार्रवाई यह भी दिखाती है कि ऐसे अपराधों से निपटने के लिए अब सख्त और तकनीकी रूप से मजबूत कदम उठाए जा रहे हैं।
डिजिटल अरेस्ट जैसे स्कैम्स के खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई आने वाले समय में साइबर अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश मानी जा रही है।


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