25 साल तक कानून को चकमा देता रहा ‘यूट्यूबर कातिल’! 13 साल के मासूम की हत्या का राज खुलते ही लोनी से दबोचा गया Ex-मुस्लिम सलीम वास्तिक



25 साल बाद पकड़ा गया 13 साल के बच्चे का कातिल सलीम वास्तिक, पहचान बदलकर छिपा था, दिल्ली पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा

31 साल पुराने अपहरण और हत्या केस ने फिर मचाई सनसनी

गाजियाबाद के लोनी इलाके से सामने आई एक गिरफ्तारी ने पूरे उत्तर भारत में सनसनी फैला दी है, जहां एक ऐसा शख्स पुलिस के हत्थे चढ़ा है जो पिछले ढाई दशक से कानून की आंखों में धूल झोंककर जी रहा था। यह मामला किसी साधारण अपराधी का नहीं बल्कि एक ऐसे व्यक्ति का है जो सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हुए अपनी अलग पहचान बना चुका था, लेकिन उसके अतीत में एक ऐसा खौफनाक राज दफन था जिसे जानकर हर कोई सिहर उठा।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी को आखिरकार पकड़ लिया है, जो साल 1995 में हुए एक 13 वर्षीय बच्चे के अपहरण और हत्या के मामले में दोषी था। यह गिरफ्तारी इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि आरोपी ने अपनी पहचान बदलकर और खुद को मृत घोषित कर कानून से बचने की पूरी साजिश रची थी।

मासूम संदीप बंसल के अपहरण से शुरू हुआ था खौफनाक खेल

यह पूरा मामला साल 1995 का है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक कारोबारी के 13 वर्षीय बेटे संदीप बंसल का अचानक अपहरण हो गया था। परिवार के लिए यह घटना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं थी। अपहरण के ठीक अगले दिन घरवालों को एक फोन कॉल आया, जिसमें 30,000 रुपये की फिरौती मांगी गई। फोन करने वाले ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर रकम नहीं दी गई तो बच्चे की जान ले ली जाएगी।

उस समय परिवार और पुलिस दोनों ही इस मामले को लेकर बेहद गंभीर थे, लेकिन हालात तेजी से बिगड़ते चले गए। फिरौती की रकम समय पर नहीं पहुंच सकी और कुछ ही समय बाद बच्चे की हत्या कर दी गई। इस खबर ने पूरे इलाके में भय और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया था।

मार्शल आर्ट्स टीचर निकला कातिल, जांच में खुला बड़ा राज

जांच के दौरान पुलिस को शक एक ऐसे युवक पर गया जो बच्चे के स्कूल में मार्शल आर्ट्स सिखाया करता था। उसका नाम सलीम खान था। पुलिस ने जब उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसकी निशानदेही पर संदीप बंसल का शव बरामद किया गया, जिससे पूरे मामले का खुलासा हो गया।

इस खुलासे ने सभी को चौंका दिया, क्योंकि जिस व्यक्ति पर बच्चे की सुरक्षा और अनुशासन की जिम्मेदारी थी, वही उसकी जान का दुश्मन बन गया था। पुलिस ने इस मामले में सलीम खान के साथ उसके साथी अनिल को भी गिरफ्तार किया और दोनों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाए गए।

अदालत से उम्रकैद, फिर जमानत और फरारी का खेल

इस सनसनीखेज केस में अदालत ने साल 1997 में सलीम खान और उसके साथी को उम्रकैद की सजा सुनाई। ऐसा लगा कि न्याय मिल गया है, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। साल 2000 में सलीम खान को दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई, जिसने इस पूरे केस को एक नया मोड़ दे दिया।

जमानत मिलने के बाद सलीम अदालत में दोबारा पेश नहीं हुआ और फरार हो गया। इसके बाद वह लगातार पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। साल 2011 में हाईकोर्ट ने उसकी सजा को बरकरार रखा, लेकिन तब तक वह पूरी तरह गायब हो चुका था और उसकी तलाश लगातार जारी रही।

पहचान बदलकर बना ‘सलीम वास्तिक’, खुद को बताया मृत

कानून से बचने के लिए सलीम ने जो चाल चली, वह बेहद चौंकाने वाली थी। उसने अपनी असली पहचान को खत्म कर दिया और खुद को मृत घोषित कर दिया, ताकि पुलिस उसकी तलाश बंद कर दे। इसके बाद उसने नया नाम सलीम अहमद उर्फ सलीम वास्तिक रख लिया।

नई पहचान के साथ वह हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में छिपकर रहने लगा। धीरे-धीरे उसने गाजियाबाद के लोनी इलाके को अपना ठिकाना बना लिया, जहां उसने कपड़ों का कारोबार शुरू किया और सामान्य जिंदगी जीने लगा।

सोशल मीडिया और यूट्यूब पर बनाई नई पहचान

सिर्फ यही नहीं, सलीम वास्तिक ने सोशल मीडिया और यूट्यूब पर भी अपनी सक्रियता बढ़ाई। वह अपने विवादित बयानों और विचारों के कारण चर्चा में रहने लगा। लोगों के बीच उसकी एक अलग छवि बन चुकी थी, लेकिन कोई नहीं जानता था कि यह वही शख्स है जो एक मासूम बच्चे की हत्या का दोषी है।

हाल ही में उस पर हमला भी हुआ था, जिससे वह एक बार फिर सुर्खियों में आया। इसी दौरान पुलिस की नजर उस पर पड़ी और पुराने रिकॉर्ड से उसकी कड़ियां जुड़ने लगीं।

फिंगरप्रिंट और रिकॉर्ड ने खोला 25 साल पुराना राज

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस केस को फिर से खंगालना शुरू किया। पुराने दस्तावेज, फिंगरप्रिंट और फोटो का मिलान किया गया। जांच में जो सामने आया, उसने सबको चौंका दिया। सलीम वास्तिक की पहचान उसी सलीम खान के रूप में हुई जो 1995 के हत्या केस में दोषी था।

इसके बाद पुलिस ने लंबे समय तक निगरानी रखी और सही मौके का इंतजार किया। आखिरकार लोनी इलाके से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ जारी है और कई अन्य खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

25 साल बाद गिरफ्तारी ने उठाए कई सवाल

इस गिरफ्तारी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर एक दोषी व्यक्ति 25 साल तक कैसे फरार रह सकता है और अपनी पहचान बदलकर खुलेआम जिंदगी जी सकता है। यह मामला न सिर्फ पुलिस व्यवस्था बल्कि न्यायिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़ा करता है।

साथ ही यह घटना यह भी दिखाती है कि अपराधी चाहे कितना भी चालाक क्यों न हो, कानून की पकड़ से हमेशा के लिए बच नहीं सकता। 25 साल बाद ही सही, लेकिन आखिरकार एक मासूम बच्चे को न्याय दिलाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है

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