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| सांकेतिक तस्वीर |
खीरी में टब में गिरी मासूम की हालत गंभीर हुई, डॉक्टर कुलदीप ने समय रहते इलाज कर बचाई जान, परिजनों ने बताया देवदूत
अनूप गुप्ता की रिपोर्ट
घर के अंदर खेलते-खेलते हुआ खौफनाक हादसा
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद के कस्बा पसगवां में एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। यह घटना एक सामान्य दिन की तरह शुरू हुई थी, जब घर में खुशियों के बीच खेल रही एक दो साल की मासूम बच्ची अचानक ऐसे हादसे का शिकार हो गई जिसने उसके परिवार की सांसें थाम दीं। बच्ची अपने घर में खेल रही थी, हर तरफ सामान्य माहौल था, परिवार के लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त थे, लेकिन इसी बीच कुछ ऐसा हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
पानी से भरे टब में मुंह के बल गिरी मासूम
जानकारी के अनुसार, घर के एक कोने में पानी से भरा एक टब रखा हुआ था। खेलते-खेलते मासूम बच्ची उसी टब के पास पहुंच गई और अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया। देखते ही देखते वह मुंह के बल सीधे पानी से भरे टब में गिर गई। चूंकि घर के सदस्य अपने-अपने कामों में लगे हुए थे, इसलिए किसी को तुरंत इस घटना का पता नहीं चल सका। कुछ समय तक बच्ची उसी स्थिति में टब के अंदर पड़ी रही, जिससे उसकी हालत तेजी से बिगड़ती चली गई।
देर तक नजर नहीं आई बच्ची तो मची अफरा-तफरी
जब काफी देर तक बच्ची घर में कहीं दिखाई नहीं दी तो परिवार के लोगों को चिंता होने लगी। उसके पिता सचिन और अन्य परिजन उसे ढूंढने लगे। घर के हर कोने में तलाश की गई, लेकिन बच्ची कहीं नहीं मिली। इसी दौरान जब परिजन घर के एक कोने में रखे पानी के टब के पास पहुंचे तो जो दृश्य उन्होंने देखा, वह बेहद भयावह था। बच्ची टब के अंदर मुंह के बल पड़ी हुई थी और उसका शरीर पूरी तरह से नीला पड़ चुका था।
नीला पड़ा शरीर देख उड़ गए होश
बच्ची की हालत देखकर परिवार के लोगों के होश उड़ गए। उसकी सांसें धीमी हो चुकी थीं और शरीर में कोई हलचल नहीं थी। उस समय हर सेकंड बेहद कीमती था। बिना समय गंवाए पिता सचिन ने तुरंत बच्ची को टब से बाहर निकाला और उसे गोद में लेकर आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पसगवां की ओर दौड़ पड़े। रास्ते भर परिवार के लोग दहशत में थे और हर पल यही डर सता रहा था कि कहीं देर न हो जाए।
अस्पताल पहुंचते ही शुरू हुआ जीवन बचाने का संघर्ष
जैसे ही बच्ची को सीएचसी पसगवां लाया गया, वहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर कुलदीप ने बिना समय गंवाए इलाज शुरू कर दिया। उस समय बच्ची की हालत बेहद गंभीर थी। उसके शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम हो चुकी थी और पानी पेट में भर जाने के कारण उसकी सांसें लगभग बंद होने की स्थिति में थीं। डॉक्टर कुलदीप ने तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू किया और पूरी टीम के साथ बच्ची की जान बचाने में जुट गए।
पेट से पानी निकालने की जद्दोजहद
डॉक्टर कुलदीप ने सबसे पहले बच्ची के पेट में भरे पानी को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की। यह एक बेहद नाजुक और चुनौतीपूर्ण स्थिति थी क्योंकि हर सेकंड बच्ची की जिंदगी के लिए निर्णायक साबित हो सकता था। लगातार प्रयास और चिकित्सा प्रक्रिया के जरिए धीरे-धीरे बच्ची के शरीर से पानी निकाला गया। इसके बाद उसे ऑक्सीजन सपोर्ट और अन्य जरूरी उपचार दिए गए।
जिंदगी और मौत के बीच चलता रहा संघर्ष
इलाज के दौरान काफी देर तक बच्ची की स्थिति बेहद नाजुक बनी रही। वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी। अस्पताल में मौजूद हर व्यक्ति की नजरें बच्ची पर टिकी हुई थीं। डॉक्टरों की टीम लगातार प्रयास कर रही थी कि किसी भी तरह उसकी सांसें सामान्य हो जाएं। परिवार के लोग भी अस्पताल में दहशत और उम्मीद के बीच खड़े थे।
आखिरकार लौट आई मासूम की सांसें
काफी देर तक चले इलाज और कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार वह पल आया जब बच्ची ने प्रतिक्रिया देना शुरू किया। धीरे-धीरे उसकी सांसें सामान्य होने लगीं और उसने होश में आना शुरू किया। यह देखकर वहां मौजूद सभी लोगों ने राहत की सांस ली। परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था।
परिजनों ने डॉक्टर को बताया देवदूत
जब बच्ची की हालत में सुधार हुआ और वह खतरे से बाहर आई तो परिवार के लोगों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। उन्होंने डॉक्टर कुलदीप को धन्यवाद देते हुए उन्हें देवदूत बताया। पिता सचिन ने कहा कि अगर थोड़ी सी भी देर हो जाती तो उनकी बेटी को बचाना मुश्किल हो सकता था। उन्होंने डॉक्टर और पूरी मेडिकल टीम का आभार व्यक्त किया।
डॉक्टर कुलदीप ने बताई गंभीर स्थिति
डॉक्टर कुलदीप ने बताया कि जब बच्ची को अस्पताल लाया गया था, उसकी हालत बेहद गंभीर थी। पेट में काफी मात्रा में पानी भर चुका था और शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण उसका पूरा शरीर नीला पड़ गया था। उन्होंने बताया कि अगर बच्ची को कुछ देर और बाद लाया जाता तो उसकी जान बचाना लगभग असंभव हो जाता।
क्षेत्र में डॉक्टर की कार्यशैली की हो रही सराहना
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में डॉक्टर कुलदीप की कार्यशैली की जमकर सराहना हो रही है। स्थानीय लोग उनके इस साहसिक और मानवीय प्रयास की प्रशंसा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने जिस तत्परता और समर्पण के साथ बच्ची की जान बचाई, वह वास्तव में काबिल-ए-तारीफ है।
घरों में सावधानी बरतने की जरूरत
यह घटना एक बड़ा संदेश भी देती है कि घर में छोटे बच्चों के साथ जरा सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। खासकर पानी से भरे बर्तन, टब या टंकी जैसी चीजें बच्चों के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं। ऐसे में अभिभावकों को हमेशा सतर्क रहने की जरूरत है।
मासूम की जिंदगी बनी चमत्कारिक कहानी
पसगवां की यह घटना अब एक चमत्कारिक कहानी बन चुकी है, जिसमें एक मासूम बच्ची मौत के मुंह से वापस लौटी और एक डॉक्टर ने अपनी सूझबूझ और मेहनत से उसकी जिंदगी बचा ली। यह घटना न सिर्फ इंसानियत की मिसाल है बल्कि यह भी दिखाती है कि समय पर लिया गया सही कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है


1 टिप्पणियाँ
डॉक्टर कुलदीप सर को बच्ची को नया जीवनदान देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।
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