कभी खुद को IAS तो कभी ADM बताकर बेरोजगारों को फंसाती थीं 2 बहनें… बरेली में खुला करोड़ों के फर्जी जॉब रैकेट का राज



बरेली में दो बहनों ने खुद को IAS बताकर बेरोजगार युवाओं से लाखों की ठगी की, पुलिस ने गिरोह का पर्दाफाश कर आरोपियों को किया गिरफ्तार।


फर्जी IAS बनकर रचा गया खतरनाक ठगी का खेल

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं की उम्मीदों को झकझोर कर रख दिया है। यहां दो सगी बहनों ने खुद को आईएएस अधिकारी बताकर एक संगठित ठगी का जाल बिछाया हुआ था। ये बहनें कभी खुद को प्रशिक्षु आईएएस बताती थीं तो कभी एडीएम और एसडीएम जैसे बड़े पदों का हवाला देकर लोगों को अपने जाल में फंसाती थीं। इनके आत्मविश्वास भरे अंदाज और सरकारी सिस्टम की जानकारी ने लोगों को इतना प्रभावित किया कि वे बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए इन पर भरोसा कर बैठे।

बेरोजगार युवाओं को बनाया निशाना, नौकरी का दिया झांसा

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों ने खासतौर पर उन युवाओं को निशाना बनाया जो लंबे समय से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे और किसी भी कीमत पर नौकरी पाना चाहते थे। ये बहनें उन्हें भरोसा दिलाती थीं कि उनके पास ऊंचे स्तर तक पहुंच है और वे आसानी से सरकारी विभागों में नियुक्ति करवा सकती हैं। इसके बदले में वे लाखों रुपये की मांग करती थीं और युवाओं को जल्द जॉइनिंग का भरोसा देती थीं।

कई युवाओं ने अपने परिवार की जमा पूंजी, यहां तक कि कर्ज लेकर भी इन बहनों को पैसे दे दिए। लेकिन समय बीतने के बाद जब न तो कोई नियुक्ति हुई और न ही कोई आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हुई, तब जाकर पीड़ितों को शक हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है।

11 लाख से ज्यादा की ठगी का खुलासा

इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब बारादरी थाना क्षेत्र में रहने वाली प्रीति लॉयल समेत चार पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उनसे कुल मिलाकर करीब साढ़े 11 लाख रुपये ठग लिए गए हैं। आरोपियों ने पहले भरोसा जीतने के लिए बड़े-बड़े वादे किए और फिर धीरे-धीरे पैसे ऐंठ लिए।

जब पीड़ितों ने बार-बार नौकरी के बारे में पूछा तो आरोपियों ने तरह-तरह के बहाने बनाने शुरू कर दिए। कभी प्रक्रिया लंबित होने की बात कही गई तो कभी किसी तकनीकी कारण का हवाला देकर समय टाल दिया गया। अंततः जब मामला पूरी तरह संदिग्ध हो गया, तब जाकर पीड़ितों ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

पुलिस जांच में सामने आया पूरा गिरोह

शिकायत मिलते ही पुलिस ने तेजी से कार्रवाई शुरू की और मामले की गहराई से जांच की। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई सामान्य धोखाधड़ी नहीं बल्कि एक संगठित गिरोह का काम है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों बहनों और उनके एक सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं। पुलिस को शक है कि इस गिरोह में और भी लोग शामिल हो सकते हैं जो अलग-अलग जगहों पर इसी तरह की ठगी को अंजाम दे रहे थे। यह गिरोह लंबे समय से बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाकर लाखों रुपये की ठगी कर रहा था।

फर्जी पहचान से लोगों को किया गुमराह

आरोपी बहनें अपने आपको कभी आईएएस अधिकारी, कभी एडीएम और कभी एसडीएम बताकर लोगों के बीच अपनी एक मजबूत छवि बना लेती थीं। वे सरकारी दफ्तरों और प्रक्रियाओं की इतनी सटीक जानकारी देती थीं कि सामने वाला व्यक्ति उनके झांसे में आसानी से आ जाता था। उनकी बातचीत का तरीका, आत्मविश्वास और पेशेवर अंदाज देखकर कोई भी यह सोचने पर मजबूर हो जाता था कि वे सच में प्रशासनिक अधिकारी हैं।

यही वजह रही कि कई पढ़े-लिखे और समझदार लोग भी इनके जाल में फंस गए और अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठे।

कोर्ट में पेशी और आगे की कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं।

अगर जांच में और लोगों के साथ ठगी की पुष्टि होती है तो मामले में और धाराएं जोड़ी जा सकती हैं और गिरोह के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

लोगों से पुलिस की खास अपील

इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने आम जनता से विशेष अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के झांसे में न आएं जो खुद को बड़ा अधिकारी बताकर नौकरी या किसी अन्य काम के लिए पैसे मांगता है। बिना किसी आधिकारिक प्रक्रिया और दस्तावेजों के अगर कोई सीधे पैसे मांगता है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि मामला संदिग्ध है।

सरकारी नौकरियों के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट, नोटिफिकेशन और निर्धारित प्रक्रिया का ही पालन करना चाहिए। किसी भी शॉर्टकट के चक्कर में पड़ना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।

बढ़ते फर्जीवाड़े ने खड़ी की नई चुनौती

बरेली का यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि बेरोजगारी और नौकरी की चाहत किस तरह लोगों को ठगों के जाल में फंसा रही है। ऐसे गिरोह लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इस तरह की घटनाएं न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि युवाओं के मनोबल को भी तोड़ देती हैं।

फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस ठगी रैकेट से जुड़े बाकी लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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