GPS से चोर के घर तक पहुंची मुंबई की लड़की, काशी में अस्सी घाट से डेढ़ लाख का मोबाइल चोरी; पुलिस सुस्ती पर उठे सवाल



काशी में अस्सी घाट से चोरी हुआ डेढ़ लाख का मोबाइल मुंबई की युवती ने GPS से खुद ढूंढ निकाला, चोर के कमरे से मिले 20 फोन।

काशी दर्शन के दौरान शुरू हुई एक आम शाम, जो बन गई असाधारण कहानी

उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी वाराणसी की गलियों और घाटों पर हर दिन हजारों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। गंगा आरती, संकरी सड़कें, भक्ति और भीड़—इन सबके बीच 29 दिसंबर 2025 की शाम एक ऐसी घटना घटी, जिसने न केवल स्थानीय पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि यह भी दिखा दिया कि तकनीक और दृढ़ इच्छाशक्ति मिल जाएं तो आम नागरिक भी असंभव को संभव बना सकता है। मुंबई से काशी घूमने आई एक युवती अंकिता गुप्ता की कहानी अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बन चुकी है।

अस्सी घाट पर आरती, भीड़ और पलक झपकते गायब हुआ मोबाइल

मुंबई के घाटकोपर इलाके में रहने वाले उमेश गुप्ता अपनी बेटी अंकिता गुप्ता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ काशी दर्शन पर आए थे। शाम के समय वे सभी अस्सी घाट पहुंचे, जहां रोज़ की तरह भव्य गंगा आरती चल रही थी। आरती समाप्त होने के बाद जब परिवार घाट से बाहर निकल रहा था, तभी भीड़ का फायदा उठाकर किसी ने अंकिता की जैकेट की जेब से उनका कीमती मोबाइल फोन निकाल लिया। यह फोन डेढ़ लाख रुपये से अधिक कीमत का था, जिसे अंकिता ने हाल ही में खरीदा था और जिसकी ईएमआई अभी चल रही थी।

भीड़ में शक, लेकिन यकीन तब हुआ जब जेब हुई खाली

अंकिता को भीड़ में हल्की सी हलचल महसूस हुई, लेकिन उस समय उन्हें अंदाजा नहीं हुआ कि उनके साथ चोरी हो चुकी है। कुछ दूर चलने के बाद जब उन्होंने जैकेट की जेब टटोली, तो मोबाइल गायब था। भाई के फोन से कॉल मिलाई गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। दो-तीन बार रिंग जाने के बाद फोन अचानक स्विच ऑफ हो गया। उसी क्षण अंकिता को यकीन हो गया कि उनका मोबाइल चोरी हो चुका है।

थाने में शिकायत, लेकिन कार्रवाई ठहरी कागजों तक

मोबाइल चोरी की पुष्टि होते ही अंकिता परिवार के साथ सीधे भेलूपुर थाना पहुंचीं। वहां उन्होंने पूरी घटना की जानकारी देते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई। मोबाइल का बिल, आईएमईआई नंबर, ईएमआई से जुड़े दस्तावेज और पहचान पत्र—सब कुछ पुलिस को सौंपा गया। अंकिता ने पुलिस से आग्रह किया कि फोन ट्रैकिंग के जरिए लोकेशन पता कर जल्द कार्रवाई की जाए, लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच की रफ्तार लगभग थम सी गई।

तकनीक जानने वाली युवती, जो हार मानने वालों में नहीं

अंकिता पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और तकनीक की अच्छी समझ रखती हैं। जब उन्हें लगा कि पुलिस की ओर से ठोस प्रयास नहीं हो रहे, तो उन्होंने खुद पहल करने का फैसला किया। एक मोबाइल ट्रैकिंग ऐप की मदद से उन्होंने फोन की लोकेशन चेक की, जो पहली बार बनारस रेलवे स्टेशन के आसपास दिखी। यह जानकारी लेकर वे दोबारा पुलिस के पास पहुंचीं और स्टेशन क्षेत्र में तलाशी की मांग की।

‘100-200 मीटर का फर्क होता है’, कहकर टालती रही पुलिस

पुलिस का जवाब अंकिता के लिए निराशाजनक था। उन्हें कहा गया कि जीपीएस लोकेशन में 100-200 मीटर का अंतर हो सकता है और स्टेशन जैसा घना इलाका होने के कारण फोन मिलना मुश्किल है। इस जवाब ने अंकिता को और अधिक बेचैन कर दिया। उन्हें लगा कि यदि वे खुद प्रयास नहीं करेंगी, तो उनका फोन कभी वापस नहीं मिलेगा।

रात 10 बजे खुद पहुंचीं संदिग्ध लोकेशन पर

हार न मानने वाली अंकिता ने एक बार फिर फोन की लोकेशन ट्रैक की। इस बार लोकेशन लगातार एक ही जगह पर स्थिर दिख रही थी। रात करीब 10 बजे अंकिता अपने भाई और फूफा के साथ उस लोकेशन पर पहुंच गईं। स्थानीय इलाके में पूछताछ की गई और पुलिस को भी मौके पर बुलाया गया। पुलिस आई जरूर, लेकिन न तो किसी की तलाशी ली गई और न ही किसी को हिरासत में लिया गया। औपचारिकता निभाकर पुलिस वापस लौट गई।

अगली सुबह फिर बदली नहीं लोकेशन, बढ़ा अंकिता का संदेह

मंगलवार की सुबह जब अंकिता ने फिर से ट्रैकिंग की, तो मोबाइल की लोकेशन बिल्कुल वही दिख रही थी। इससे उनका संदेह और पुख्ता हो गया कि फोन उसी इलाके में मौजूद है। उन्होंने दोबारा मौके पर जाकर स्थानीय लोगों से बातचीत शुरू की। पूछताछ में पता चला कि एक संदिग्ध युवक चांदपुर चौराहा जीटी रोड स्थित एक मकान में किराए पर रहता है और अक्सर महंगे मोबाइल बेचने की कोशिश करता रहता है।

कमरे का ताला खुलते ही सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

स्थानीय लोगों की मदद से उस कमरे का ताला खुलवाया गया। जैसे ही दरवाजा खुला, सभी हैरान रह गए। कमरे के अंदर 15 से 20 महंगे मोबाइल फोन पड़े थे, जिनमें तीन-चार आईफोन भी शामिल थे। अंकिता ने तुरंत अपना मोबाइल पहचान लिया। हालांकि तब तक आरोपी युवक फरार हो चुका था।

सूचना मिलते ही हरकत में आई पुलिस, मोबाइल जब्त

कमरे से मिले मोबाइलों की सूचना पुलिस को दी गई। इस बार पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सभी फोन जब्त कर लिए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद मोबाइलों के आधार पर अन्य पीड़ितों की पहचान की जा रही है और फरार आरोपी की तलाश जारी है। आशंका जताई जा रही है कि यह एक संगठित मोबाइल चोर गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जो घाटों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सक्रिय है।

मुंबई लौटी अंकिता, लेकिन छोड़ गईं कई सवाल

अपना मोबाइल वापस मिलने के बाद अंकिता अपने भाई और फूफा के साथ मुंबई लौट गईं। हालांकि उनकी इस पूरी यात्रा ने वाराणसी की पुलिस व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल छोड़ दिए हैं। जब एक पीड़िता खुद सटीक लोकेशन, तकनीकी साक्ष्य और दस्तावेज उपलब्ध करा रही थी, तब भी त्वरित और प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह सवाल अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

अस्सी घाट और आसपास मोबाइल चोरी का गढ़

स्थानीय निवासियों के अनुसार अस्सी घाट और उसके आसपास के क्षेत्रों में भारी भीड़ का फायदा उठाकर रोजाना कई मोबाइल चोरी की घटनाएं होती हैं। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक अक्सर इन घटनाओं का शिकार होते हैं। बावजूद इसके, ठोस कार्रवाई और नियमित निगरानी के अभाव में ऐसे गिरोह लंबे समय से सक्रिय हैं।

तकनीक और जिद ने बदली कहानी का अंत

अंकिता गुप्ता की यह कहानी केवल एक मोबाइल चोरी की घटना नहीं है, बल्कि यह उस हौसले की मिसाल है, जहां एक आम नागरिक ने सिस्टम की सुस्ती के आगे घुटने नहीं टेके। जीपीएस, तकनीकी समझ और दृढ़ निश्चय के बल पर उन्होंने न केवल अपना महंगा मोबाइल वापस पाया, बल्कि एक बड़े चोरी के नेटवर्क का भी पर्दाफाश कर दिया।

श्रद्धा नगरी में सुरक्षा पर फिर उठा सवाल

काशी जैसे विश्व प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल पर इस तरह की घटनाएं प्रशासन और पुलिस के लिए चेतावनी हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, पर्यटकों का भरोसा और शहर की छवि—इन सबके लिए जरूरी है कि ऐसी घटनाओं पर त्वरित और सख्त कार्रवाई हो। अंकिता की कहानी यह याद दिलाती है कि जब तक व्यवस्था सतर्क नहीं होगी, तब तक आम नागरिक को खुद ही अपने हक के लिए लड़ना पड़ेगा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ