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शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से हो रही ठगी, प्रशासन भी मौन



1...नए सत्र में निजी विद्यालयों द्वारा खुलेआम संसाधनों के बदले वसूला जा रहा है अधिक धन


2...शिक्षा माफियाओं पर नकेल कसने में प्रशासन फेल,बच्चो की पढ़ाई भी हो रही प्रभावित

इंद्रेश तिवारी की रिपोर्ट

मछली शहर(जौनपुर).....स्थानीय क्षेत्र के विभिन्न निजी विद्यालय शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का जम कर शोषण कर रहे है।जहा एक ओर सरकार विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने का दावा ठोक रही है,वही दूसरी ओर विकास की धुरी मानी जाने वाली शिक्षा व्यवस्था को ही शिक्षा माफिया ध्वस्त करने पर आमादा है।आश्चर्य तो  तब और बढ़ जाता है जब प्रशासन भी इन माफियाओं पर नकेल कसने से कतराती है।

          सूत्रों की माने तो मछली शहर के आस - पास ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा माफिया सक्रिय है,जहा बड़ी बड़ी इमारतें बनाकर अभिभावकों को अपने जाल में फसा रहे है।और जब अभिभावक वहा अपने बच्चों के भविष्य के लिए दाखिला करवाता है, तो उसके बाद वह अपने आप को ठगा महसूस करता है।विद्यालय के किताब के नाम पर तो कही टर्म फीस और एग्जाम फीस इत्यादि के नाम पर समय समय पर अभिभावकों से वसूली शुरू हो जाती है।

विस्वस्त सूत्रों की माने तो अभिभावक अपने बच्चे के भविष्य के खातिर इन विद्यालयों के झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई को मनमाने ढंग से खर्च करने पर मजबूर है।नाम ना छापने की शर्त पर कुछ अभिभावकों ने उपरोक्त बातों को स्वीकार करते हुए बताया कि निजी विद्यालयों के संचालक शिक्षा के नाम पर हमसे ठगी कर रहे है।उनका यह भी कहना है कि भाजपा सरकार आने के बाद ऐसा लगा था कि इन शिक्षा माफियाओं पर नकेल कसेगी पर आज भी वही ढाख के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।

वैसे समाज के लिए शिक्षा एक आवश्यक अंग है पर शिक्षा माफियाओं द्वारा खुले किताब की तरह अभिभावकों का शोषण जग जाहिर होने के बाद भी प्रशासन का आंखे मूंदे होना वाकई आश्चर्यचकित करने वाली बात है।

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