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‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ नाम पर विवाद के बाद बदला बोर्ड, अब नए नाम से जाना जाएगा यह मंदिर


वाराणसी में पाकिस्तानेश्वर महादेव मंदिर का बोर्ड हटाकर सिंधु गंगेश्वर महादेव किया गया, नगर निगम में नाम दर्ज कराने की तैयारी।

वाराणसी के छोटी शीतला घाट स्थित शिव मंदिर का नाम विवाद के बाद बदल दिया गया है। मंदिर पर लगा ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ का बोर्ड हटाकर ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव मंदिर’ का बोर्ड लगाया गया है। सिंधी समाज ने पुराने नाम पर आपत्ति जताई थी। अब नए नाम को नगर निगम के सरकारी अभिलेखों में दर्ज कराने के लिए 8 अक्टूबर की कार्यकारिणी बैठक में प्रस्ताव लाने की तैयारी है।

छोटी शीतला घाट के मंदिर को लेकर शुरू हुआ विवाद

वाराणसी के छोटी शीतला घाट पर स्थित पुराने शिव मंदिर को लेकर नाम बदलने का मामला सामने आया है। मंदिर पर पहले ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ नाम का बोर्ड लगा हुआ था। इस नाम को लेकर सिंधी समाज और स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई थी। विवाद के बाद मंदिर से यह बोर्ड हटा दिया गया और उसकी जगह ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव मंदिर’ नाम का बोर्ड लगाया गया है।

अब इस नए नाम को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक में प्रस्ताव लाया जाना है।

8 अक्टूबर की बैठक में आ सकता है प्रस्ताव

जानकारी के मुताबिक, 8 अक्टूबर को नगर निगम की कार्यकारिणी की बैठक होनी है। इस बैठक में समाजवादी पार्टी के पार्षद राजकपूर चौधरी मंदिर के नाम से संबंधित प्रस्ताव रख सकते हैं।

सिंधी समाज की ओर से नगर निगम में आपत्ति दर्ज कराने के बाद इस मामले को आगे बढ़ाया गया है। कार्यकारिणी में प्रस्ताव पारित होने के बाद ही मंदिर के नए नाम को सरकारी अभिलेखों में दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

मंदिर पर लगाया गया था ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ का बोर्ड

सिंधी समाज के लोगों के मुताबिक, छोटी शीतला घाट स्थित इस पुराने शिव मंदिर पर कुछ समय पहले ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ नाम का बोर्ड लगाया गया था। इसके बाद स्थानीय स्तर पर मंदिर की पहचान इसी नाम से होने लगी।

सिंधी समाज ने इस नाम को लेकर आपत्ति जताई। समाज के लोगों का कहना है कि यह नाम सिंधु समाज की ऐतिहासिक पहचान और काशी की गंगा-जमुनी तहजीब के अनुरूप नहीं है। इसके बाद इस मामले में नगर निगम के सामने भी आपत्ति दर्ज कराई गई।

बंटवारे के दौर से जुड़ा बताया जाता है मंदिर का इतिहास

सिंधी समाज के लोगों के अनुसार, मंदिर का इतिहास देश के विभाजन के दौर से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि बंटवारे के समय पूर्वी बंगाल के बोगड़ा शहर से कुछ सिंधी परिवार वाराणसी पहुंचे थे।

इन परिवारों में जानकी बाई, जमना दास, निहाल चंद सोमानी और सीताराम विहानी के परिवार सहित करीब आठ से दस परिवार शामिल थे। बताया जाता है कि इन परिवारों की जड़ें पाकिस्तान के सिंध प्रांत से जुड़ी थीं।

समाज के लोगों के अनुसार, ये परिवार अपने साथ एक शिवलिंग लेकर वाराणसी आए थे। उन्होंने शिवलिंग को गंगा में प्रवाहित करने का फैसला किया था।

रामघाट पर शिवलिंग प्रवाहित करने से रोका गया

बताया जाता है कि जब परिवार शिवलिंग लेकर रामघाट पहुंचे और उसे गंगा में प्रवाहित करने लगे, तब स्थानीय लोगों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। इसके बाद बूंदी स्टेट की जमीन पर मंदिर का निर्माण कराया गया और उसी शिवलिंग को वहां स्थापित किया गया।

सिंधी समाज के अनुसार, शिवलिंग की स्थापना के बाद मंदिर को ‘हिंदू-सिंधी महादेव’ के नाम से जाना जाने लगा। लंबे समय तक स्थानीय लोग इसी नाम से मंदिर की पहचान करते रहे।

‘हिंदू-सिंधी महादेव’ से बदला नाम

सिंधी समाज के लोगों का आरोप है कि कुछ साल पहले अराजक तत्वों ने मंदिर पर ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ नाम का बोर्ड लगा दिया। इसके बाद मंदिर इसी नाम से पहचाना जाने लगा।

पुराने नाम को लेकर आपत्ति के बाद सिंधी समाज ने मंदिर के नाम को बदलने की मांग उठाई। समाज के लोगों ने इसके लिए नगर निगम में भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

27 सितंबर को हटाया गया पुराना बोर्ड

मामले को लेकर 27 सितंबर को सिंधी समाज के लोगों की बैठक हुई। बैठक में मंदिर के नाम को लेकर चर्चा की गई। इसके बाद मंदिर पर लगा ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ का बोर्ड हटा दिया गया।

उसकी जगह ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव मंदिर’ नाम का बोर्ड लगाया गया। सिंधी समाज के लोगों का कहना है कि नए नाम में सिंधु और गंगा, दोनों की सांस्कृतिक पहचान जुड़ी हुई है। इसी आधार पर समाज ने नए नाम को आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

नगर निगम रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की तैयारी

सिंधी समाज के शंकर विशनानी के मुताबिक, समाज की ओर से नगर निगम में आपत्ति दर्ज कराने के बाद मामले को आगे बढ़ाया गया। अब मंदिर का नाम सरकारी अभिलेखों में ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव मंदिर’ दर्ज कराने के लिए नगर निगम की कार्यकारिणी में प्रस्ताव लाने की तैयारी है।

बताया जा रहा है कि 8 अक्टूबर को होने वाली कार्यकारिणी की बैठक में सपा पार्षद राजकपूर चौधरी यह प्रस्ताव रखेंगे। कार्यकारिणी में प्रस्ताव पारित होने के बाद ही सरकारी रिकॉर्ड में मंदिर के नए नाम को दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

डीसीपी काशी के हस्तक्षेप का भी दावा

सिंधी समाज का कहना है कि मामले को लेकर विरोध के बाद पुलिस स्तर पर भी हस्तक्षेप हुआ। समाज के मुताबिक, डीसीपी काशी के हस्तक्षेप के बाद मंदिर से ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ का बोर्ड हटा दिया गया।

इसके बाद स्थानीय लोगों ने मंदिर पर ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव मंदिर’ नाम लिख दिया। फिलहाल मंदिर के सरकारी रिकॉर्ड में नाम बदलने का फैसला नगर निगम की कार्यकारिणी में प्रस्ताव पर निर्भर है। प्रस्ताव पारित होने के बाद ही नए नाम को सरकारी अभिलेखों में दर्ज किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।


साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

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