सागर में जहरीली शराब पीने से 9 लोगों की मौत, आबकारी विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल। पुलिस जांच और आरोपियों की तलाश में जुटी।
मध्य प्रदेश के सागर जिले की बंडा तहसील स्थित बराज गांव में जहरीली शराब पीने से 9 लोगों की जान चली गई। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात सामने आई इस दुखद घटना के बाद पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और छानबीन शुरू की। हादसे के बाद आबकारी विभाग की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
बराज गांव में पसरा सन्नाटा, शनिवार-रविवार की रात घटी घटना
सागर जिले की बंडा तहसील के अंतर्गत आने वाले बराज गांव में उस वक्त कोहराम मच गया, जब जहरीली शराब के सेवन से एक के बाद एक 9 ग्रामीणों की मौत की पुष्टि हुई। यह पूरी घटना शनिवार और रविवार की मध्य रात्रि के दौरान घटित हुई। एक साथ 9 मौतों की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीण इलाकों में शोक और दहशत का माहौल बन गया।
घटनास्थल पर पहुंचे एसपी अनुराग सुजानिया, जांच में जुटी पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए सागर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अनुराग सुजानिया वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस बल के साथ सीधे बराज गांव पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई। पुलिस की टीमें मौतों के स्पष्ट कारणों की पुष्टि करने के साथ-साथ यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह जानलेवा शराब कहां से लाई गई थी।
'बांबे व्हिस्की' के नाम से बिक रही थी नकली शराब, विभाग ने नहीं दिया ध्यान
इस दर्दनाक हादसे के बाद आबकारी विभाग की भूमिका पर गंभीर उंगलियां उठ रही हैं। सामने आई जानकारी के मुताबिक, इलाके में ‘बांबे व्हिस्की’ के नाम से धड़ल्ले से बेची जा रही नकली शराब को लेकर हाल ही में आबकारी कार्यालय में बाकायदा शिकायत दर्ज कराई गई थी। यह शिकायत शहर के ही एक लाइसेंसी शराब ठेकेदार ने की थी। आरोप है कि लिखित शिकायत के बावजूद आबकारी विभाग ने नकली शराब के इस अवैध कारोबार पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।
हादसे से चार दिन पहले बैठक में उठी थी चेतावनी, फिर भी अनदेखी
इस भीषण त्रासदी से महज चार दिन पहले आबकारी विभाग ने एक औपचारिक बैठक की थी। इस बैठक में उपस्थित लाइसेंसी शराब ठेकेदारों ने आबकारी अधिकारियों के सामने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध शराब के कारोबार और मिलावटी शराब की बिक्री पर कड़ा विरोध जताया था। ठेकेदारों ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि बाजार में नकली शराब बेची जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इन आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया। इसी घोर लापरवाही का खामियाजा 9 लोगों को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ा।
शराब के स्रोत और सप्लायरों की तलाश तेज
फिलहाल पुलिस प्रशासन पूरे नेटवर्क की पड़ताल में लगा हुआ है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि मृतकों ने शराब किस स्थान से खरीदी थी और इस अवैध सप्लाई चेन में कौन-कौन से तस्कर व असामाजिक तत्व शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच के बाद ही आगे की स्थिति साफ हो पाएगी।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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