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सावधान! ITR 2026 में फर्जी डिडक्शन क्लेम किया तो होगी 7 साल की जेल, लगेगा 200% जुर्माना


ITR Filing 2026 में टैक्स बचाने के लिए फर्जी डिडक्शन या फेक रसीदें लगाने पर 200% जुर्माना और 7 साल तक की जेल हो सकती है। जानें नियम।

​अगर आप भी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR 2026) में टैक्स बचाने के लिए मेडिकल, एजुकेशन या अन्य फर्जी रसीदें लगाकर डिडक्शन क्लेम करने की सोच रहे हैं, तो तुरंत सावधान हो जाएं। इनकम टैक्स विभाग अब पूरी तरह से डेटा-बेस्ड हो गया है। आपकी छोटी सी चालाकी AIS और Form 26AS के जरिए तुरंत पकड़ी जा सकती है। ऐसा करने पर न सिर्फ आपको बचाए गए टैक्स से दोगुना (200% तक) जुर्माना भरना पड़ सकता है, बल्कि 7 साल तक के लिए जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं टैक्स के सख्त नियम।

​फर्जी एंट्री पर लगेगा 100% जुर्माना

​इनकम-टैक्स एक्ट की धारा 271AAD के अनुसार, यदि असेसमेंट के दौरान टैक्स विभाग को पता चलता है कि टैक्सपेयर ने अपनी बुक्स में कोई गलत एंट्री की है या जानबूझकर टैक्स देनदारी कम करने के लिए कोई जानकारी छिपाई है, तो भारी जुर्माना लगेगा। ऐसे मामलों में उस गलत या छोड़ी गई एंट्री की वैल्यू के 100 फीसदी के बराबर जुर्माना लगाने का प्रावधान है।

​मिस-रिपोर्टिंग पर 200% की तगड़ी पेनल्टी

​धारा 270A के तहत इनकम छिपाने पर दो तरह से जुर्माना लगता है। अगर आपने गलती से या कैलकुलेशन में गड़बड़ी के कारण कम इनकम बताई है (अंडर-रिपोर्टिंग), तो देय टैक्स का 50% जुर्माना लगेगा। लेकिन, अगर आपने जानबूझकर फर्जी खर्च दिखाए हैं या तथ्य छिपाए हैं (मिस-रिपोर्टिंग), तो आपके ऊपर देय टैक्स का 200% तक अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा।

​फ्रॉड साबित होने पर 7 साल तक की जेल

​अगर विभाग को लगता है कि टैक्सपेयर ने जानबूझकर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी करने की कोशिश की है, तो धारा 276C और 277 के तहत कानूनी कार्रवाई और मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। फर्जी रसीदें बनाने या वेरिफिकेशन में गलत जानकारी देने के मामले में दोषी पाए जाने पर टैक्स चोरी की रकम के आधार पर 3 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।


क्रेडिट: मीडिया रिपोर्ट्स और इनकम टैक्स गाइडलाइंस।

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