चित्रकूट में 23 साल बाद भीषण बाढ़, डोडा डैम टूटने से 400 से ज्यादा मकान-दुकानें डूबीं, 750 लोगों का रेस्क्यू हुआ।
चित्रकूट और सतना में लगातार 20-24 घंटे हुई मूसलाधार बारिश और मानिकपुर स्थित डोडा डैम के ओवरफ्लो होकर टूटने से मंदाकिनी नदी उफान पर आ गई। वर्ष 2003 के बाद आई इस भीषण बाढ़ में 400 से ज्यादा मकान-दुकानें जलमग्न हो गईं। सेना के दो हेलिकॉप्टर, NDRF और SDRF ने अभियान चलाकर करीब 750 लोगों को एयरलिफ्ट और नावों से सुरक्षित निकाला।
मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर
चित्रकूट और मध्य प्रदेश के सतना जिले में लगातार हुई तेज बारिश के बाद हालात बिगड़ गए। मानिकपुर में डोडा डैम के ओवरफ्लो होकर टूटने के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और कई निचले इलाकों में पानी भर गया। नदी का पानी खतरे के निशान से कई फीट ऊपर पहुंचने के बाद रामघाट और भरतघाट समेत आसपास के इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई।
सड़कों पर पानी भरने के कारण कई रास्ते पूरी तरह जलमग्न हो गए। कई घरों की पहली मंजिल तक पानी पहुंच गया। हालात बिगड़ने पर परिवारों को बुजुर्गों और बच्चों के साथ घरों की छतों पर शरण लेनी पड़ी।
400 से ज्यादा मकान और दुकानें पानी में डूबीं
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर निचले इलाकों में देखने को मिला। रामघाट, भरतघाट सहित प्रभावित क्षेत्रों में 400 से ज्यादा मकान और दुकानें पानी में डूब गईं। पानी तेजी से घरों के भीतर पहुंचने के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने का मौका भी कम मिला, जिसके चलते कई परिवार छतों पर फंस गए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राहत और बचाव दलों को सक्रिय किया गया। भारतीय सेना के दो हेलिकॉप्टरों के साथ NDRF और SDRF की टीमें रेस्क्यू अभियान में जुटीं।
750 लोगों को एयरलिफ्ट और नावों से सुरक्षित निकाला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, राहत एवं बचाव टीमों ने करीब 750 लोगों को जलमग्न इमारतों और छतों से सुरक्षित निकाला। लोगों को कुछ स्थानों से हेलिकॉप्टर के जरिए एयरलिफ्ट किया गया, जबकि कई लोगों को नावों की मदद से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए प्रमोद वन, विकास प्राधिकरण, मदन गोपाल और गायत्री पीठ में आश्रय स्थल बनाए गए हैं। यहां प्रभावित लोगों के लिए भोजन और सूखा राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।
डोडा डैम टूटने से रेल ट्रैक पर तीन फीट से ज्यादा पानी
मूसलाधार बारिश और डोडा डैम टूटने का असर रेल यातायात पर भी पड़ा। सतना-मानिकपुर रेलखंड में चितहरा रेलवे स्टेशन के पास रेलवे पटरियां पूरी तरह पानी में डूब गईं। ट्रैक पर तीन फीट से अधिक पानी भर जाने के कारण रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।
इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें जलमग्न रेल पटरियों पर रेलकर्मी और लाइनमैन पानी के बीच काम करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में एक रेलकर्मी हाथ में लाल झंडी लेकर ट्रेन के इंजन से आगे पैदल चलते हुए ट्रैक की स्थिति जांचता दिखाई दे रहा है। उसके पीछे ट्रेन पानी के बीच से धीरे-धीरे आगे बढ़ती नजर आती है।
प्रमुख रास्तों पर आवाजाही बंद
बाढ़ के कारण चित्रकूट को नयागांव से जोड़ने वाले मुख्य पुल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सुरक्षा को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर आवाजाही रोक दी है।
सतना-अटरा मार्ग, सभापुर-नयागांव मार्ग, पिंडरा-नकैला-बरौंदा मार्ग और मझगवां-पटना-पहाड़ी मार्ग समेत आधा दर्जन से अधिक रास्तों पर आवागमन बंद किया गया है।
धार्मिक और पर्यटन स्थलों का संपर्क प्रभावित
भारी जलभराव के कारण चित्रकूट के कई धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी प्रभावित हुई है। आरोग्यधाम, गुप्त गोदावरी, सती अनुसुइया आश्रम और कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर पानी भरने के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों का संपर्क टूट गया है।
बाढ़ के चलते इलाके में सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं और कई बाजार बंद हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लिया बाढ़ का जायजा
बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद चित्रकूट पहुंचे। उन्होंने प्रभावित लोगों से मुलाकात की और अधिकारियों को राहत एवं पुनर्वास से जुड़े जरूरी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पानी उतरने के बाद घर-घर सर्वे कराया जाए। इसमें जनहानि, मकान क्षति और पशुहानि का आकलन कर प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की कार्रवाई की जाए।
अगले दो-तीन दिन सतर्क रहने के निर्देश
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि समय रहते अलर्ट जारी होने और रेस्क्यू टीमों के सक्रिय रहने के कारण कोई जनहानि नहीं हुई। हालांकि, उन्होंने अगले दो-तीन दिनों तक विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत बताई है।
फिलहाल मंदाकिनी नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को कुछ राहत मिली है। हालांकि, बाढ़ का पानी उतरने के बाद घरों और दुकानों में जमा कीचड़, खराब हुआ सामान और बंद बाजारों के कारण प्रभावित इलाकों के सामने सामान्य स्थिति बहाल करने की चुनौती बनी हुई है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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