बहराइच की घाघरा नदी में मगरमच्छ ने 12 साल के अनाथ बच्चे को जिंदा चबा लिया। भतीजे को बचाने के लिए चाचा 8 मिनट तक लड़ता रहा।
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां टिकुरी गांव के पास घाघरा नदी में हाथ-पैर धो रहे 12 वर्षीय अनाथ बच्चे सुनील को एक खूंखार मगरमच्छ ने अपना निवाला बना लिया। बच्चे के चाचा ने उसे बचाने के लिए मगरमच्छ से करीब 8 मिनट तक संघर्ष किया, लेकिन नाकाम रहे। तीन घंटे की मशक्कत के बाद क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।
खेत से लौटते वक्त हुआ दर्दनाक हादसा
गुरुवार की देर शाम 12 साल का सुनील अपने चाचा विजय राज सिंह और उदय राज सिंह के साथ खेत में धान की रोपाई करके घर लौट रहा था। रास्ते में वह घाघरा नदी के किनारे हाथ-पैर धोने के लिए रुका। इसी दौरान पानी के भीतर घात लगाए बैठे एक विशाल मगरमच्छ ने अचानक उस पर हमला कर दिया और उसे दबोच लिया।
भतीजे को बचाने के लिए मगरमच्छ से भिड़ा चाचा
सुनील की चीख पुकार सुनकर उसके चाचा विजय राज सिंह ने बिना अपनी जान की परवाह किए नदी में छलांग लगा दी। उन्होंने करीब 7 से 8 मिनट तक मगरमच्छ के जबड़े से अपने भतीजे को छुड़ाने की जद्दोजहद की, लेकिन जानवर की ताकत के आगे वे बेबस हो गए। मगरमच्छ बच्चे को गहरे पानी में खींच ले गया और उसे 3 से 4 बार हवा में उछालकर पटका। देखते ही देखते मगरमच्छ ने बच्चे के आधे शरीर को खा लिया।
3 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मिला शव
घटना की खबर फैलते ही गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीण अरविंद श्रीवास्तव के अनुसार, मगरमच्छ बच्चे को मुंह में दबाकर बार-बार पानी के ऊपर आ रहा था। स्थानीय लोगों ने बांस के डंडों से नदी में तलाश शुरू की। जल्द ही मौके पर पुलिस, वन विभाग और एनडीआरएफ (NDRF) की टीम भी पहुंच गई। करीब तीन घंटे के सघन तलाशी अभियान के बाद, घटनास्थल से 300 मीटर दूर पानी में सुनील का क्षत-विक्षत शव उतराता हुआ मिला, जिसे जाल डालकर बाहर निकाला गया। शुक्रवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शाम को गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
चादर से लिपटकर रोईं बहनें, पहले ही उठ चुका था माता-पिता का साया
इस हादसे ने एक अनाथ परिवार को पूरी तरह से तोड़ कर रख दिया है। सुनील के सिर से पिता बुधराज का साया 5 साल पहले और मां का साया 7 साल पहले बीमारी के चलते उठ गया था। चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर का सुनील अपने चाचा के पास रहकर परिवार का सहारा बन रहा था। घटना के बाद जब सुनील के शव को लपेटकर लाई गई चादर घर पहुंची, तो उसकी बहनें सुमन और सीमा उस आखिरी निशानी से लिपटकर फूट-फूट कर रोने लगीं। यह हृदयविदारक दृश्य देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। अब इस परिवार में दोनों बहनों के अलावा सिर्फ 10 साल का छोटा भाई संजय ही बचा है। इस पूरी घटना और परिजनों के विलाप का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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