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लखनऊ अग्निकांड: 'पापा मुझे बचा लो...', एक बंद दरवाजा और 15 मौतें, अलीगंज हादसे की खौफनाक कहानी


लखनऊ अलीगंज अग्निकांड में 15 युवाओं की दर्दनाक मौत। लापरवाही और दर्द की खौफनाक कहानी।

​लखनऊ के अलीगंज स्थित सेक्टर-H में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने 15 परिवारों को जिंदगी भर का दर्द दे दिया है। व्यावसायिक इमारत में चल रहे 'हेड हॉपर स्टूडियो' में भड़की आग और दमघोंटू धुएं ने 18 से 30 साल के 15 होनहार युवाओं की जान ले ली। मरने वालों में कोई अपने घर का इकलौता चिराग था, कोई परिवार का इकलौता सहारा, तो किसी के सिर पर जल्द ही सेहरा सजने वाला था। घटना के वक्त इमारत की छत का दरवाजा बंद था और फायर सेफ्टी न होने के कारण ये युवा अंदर ही फंस गए।

'पापा मुझे बचा लो...' वो आखिरी फोन कॉल

​इस हादसे की सबसे दर्दनाक सच्चाई उन आखिरी फोन कॉल्स में है, जो मौत से ठीक पहले फंसे हुए युवाओं ने अपने परिजनों को किए थे। बाराबंकी के 18 वर्षीय शाहजान और गेम डिजाइनर सुखमणि सिंह ने धुएं के बीच अपने पिता को फोन कर आखिरी बार कहा था- "पापा, मुझे बचा लो।" लेकिन बेबस परिवार चाहकर भी कुछ नहीं कर सके। वहीं, 28 वर्षीय नीलेश और 30 वर्षीय अनामिका की जल्द ही शादी होने वाली थी, लेकिन आग ने दोनों की जिंदगी छीन ली। हरियाणा के 23 वर्षीय भविष्य शर्मा ने तो महज 6 दिन पहले ही यह नौकरी जॉइन की थी।

खिड़की और पाइप के सहारे बची चंद जान

​हादसे में बाल-बाल बचे कर्मचारियों ने खौफनाक मंजर बयां किया। लवप्रीत कौर, भूवन श्रीवास्तव और मोहम्मद आसिफ जैसे कुछ कर्मचारी केवल इसलिए बच पाए क्योंकि उन्हें एक खुली खिड़की और नीचे लटकता हुआ पाइप मिल गया था। लवप्रीत बताती हैं कि लंच के समय अचानक ऑफिस में धुआं भर गया, लाइट कट गई और चारों तरफ अंधेरा छा गया। जान जोखिम में डालकर लोग पाइप के सहारे नीचे उतरे। प्रोडक्शन हेड भूवन ने दो साथियों को तो बचा लिया, लेकिन अपने ही चचेरे भाई आदित्य को नहीं बचा सके।

सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था, दम घुटने से हुईं मौतें

​पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डॉक्टरों के मुताबिक, ज्यादातर युवाओं की जान आग से झुलसने के कारण नहीं, बल्कि घने धुएं में दम घुटने (सफोकेशन) की वजह से गई है। इसी वजह से शवों पर जलने के ज्यादा निशान नहीं थे। बचे हुए कर्मचारियों ने सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि छत पर जाने के रास्ते पर ताला जड़ा हुआ था, जिससे लोग ऊपर नहीं भाग सके। नीचे मौजूद पेट शॉप वालों ने समय रहते आग की सूचना नहीं दी और फायर ब्रिगेड भी कथित तौर पर देरी से पहुंची। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी लापरवाही है जिसने 15 परिवारों की दुनिया हमेशा के लिए वीरान कर दी।

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