केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया मोड़। सिया गोयल के बयान के बाद 10 करोड़ का लीगल नोटिस, चेतन का गेट एनालिसिस टेस्ट।
पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में दो बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। एक ओर पुलिस मुख्य आरोपी चेतन चौधरी का गेट एनालिसिस (चाल-ढाल का वैज्ञानिक परीक्षण) कराने की तैयारी कर रही है, ताकि सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे संदिग्ध की पहचान मजबूत वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर की जा सके। वहीं दूसरी ओर, अदालत में दिए गए बयान के बाद शुरू हुए विवाद के बीच एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने आरोपी सिया गोयल के भाई साहिल गोयल को 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है।
अदालत में बयान के बाद शुरू हुआ कानूनी विवाद
मामले की सुनवाई के दौरान वडगांव मावल कोर्ट में आरोपी सिया गोयल ने कहा कि उनके वकील आशुतोष श्रीवास्तव नहीं बल्कि विपुल दुशिंग हैं। इसके बाद एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि साहिल गोयल ने उनके खिलाफ झूठे और मानहानिकारक आरोप लगाकर उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है।
इसी आधार पर उन्होंने साहिल गोयल को 10 करोड़ रुपये के हर्जाने का कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में आरोप वापस लेने, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और भविष्य में इस तरह के आरोप न लगाने का लिखित आश्वासन देने की भी मांग की गई है। अब इस नोटिस पर साहिल गोयल की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
3 जुलाई तक बढ़ी पुलिस हिरासत
इस बीच अदालत ने मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि जांच के कई महत्वपूर्ण पहलू अभी पूरे होने बाकी हैं, जिनमें घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण, घटनाक्रम का री-क्रिएशन और केतन अग्रवाल के लापता पासपोर्ट की तलाश शामिल है।
जांच एजेंसी का मानना है कि इन सभी पहलुओं की पुष्टि के लिए आरोपियों से आगे भी पूछताछ आवश्यक है, इसलिए अदालत से अतिरिक्त समय मांगा गया था।
चेतन चौधरी का होगा गेट एनालिसिस टेस्ट
पुणे पुलिस अब इस मामले में वैज्ञानिक जांच को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। पुलिस चेतन चौधरी का गेट एनालिसिस टेस्ट कराएगी, जिसके जरिए उसकी चाल-ढाल की तुलना लोहागढ़ किले के सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाले संदिग्ध व्यक्ति से की जाएगी।
पुलिस के अनुसार वारदात वाले दिन 18 जून को एक व्यक्ति हुडी और मास्क पहनकर लोहागढ़ किले की पहाड़ी पर जाता हुआ कैमरों में दिखाई दिया था। उसका चेहरा साफ नजर नहीं आ रहा था और उसने किले में प्रवेश के लिए टिकट भी नहीं लिया था। ऐसे में उसकी पहचान केवल चाल-ढाल के आधार पर स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञ इस प्रक्रिया में कदमों की लंबाई, शरीर की मुद्रा, हाथ-पैरों की गतिविधि और चलने के तरीके का विश्लेषण करेंगे। यदि यह रिपोर्ट सीसीटीवी फुटेज से मेल खाती है तो पुलिस इसे अदालत में महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्य के रूप में पेश कर सकती है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने पूछताछ के दौरान घटनास्थल पर मौजूद होने की बात स्वीकार की है, लेकिन अदालत में मजबूत और तकनीकी रूप से प्रमाणित साक्ष्य पेश करने के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी मानी जा रही है। इसी वजह से पुलिस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


0 टिप्पणियाँ
आपका विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण है, कृपया अपनी राय नीचे लिखें।