ITR Filing 2026 से पहले सही टैक्स रिजीम, AIS और Form 26AS का मिलान करें। छोटी गलती से रिफंड अटक सकता है।
आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इस बार टैक्सपेयर्स के लिए कुछ अहम बदलाव भी किए गए हैं। यदि आप वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) का ITR भरने जा रहे हैं, तो जल्दबाजी में की गई छोटी गलती भी आपके टैक्स रिफंड में देरी, आयकर विभाग की नोटिस या अतिरिक्त जुर्माने की वजह बन सकती है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी जरूरी दस्तावेजों का मिलान और सही जानकारी भरना बेहद जरूरी है।
ITR-1 समेत कई फॉर्म और एक्सेल यूटिलिटी जारी
आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR-1 (सहज), ITR-2, ITR-3 और ITR-4 (सुगम) की एक्सेल यूटिलिटी जारी कर दी है। इसके अलावा ITR-1 से ITR-5 तक सभी रिटर्न फॉर्म भी अधिसूचित किए जा चुके हैं। एक्सेल यूटिलिटी के जरिए करदाता ऑफलाइन अपना रिटर्न तैयार कर सकते हैं और बाद में उसे ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। सामान्य श्रेणी के करदाताओं के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।
इस वर्ष ITR-1 फॉर्म में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब पात्र करदाता दो स्वयं के उपयोग वाली (Self-Occupied) मकानों की जानकारी भी इसी फॉर्म में दे सकेंगे। साथ ही 'अनरियलाइज्ड रेंट' यानी ऐसा किराया जो मिलना था लेकिन प्राप्त नहीं हुआ, उसके लिए अलग कॉलम जोड़ा गया है। वहीं विदेशी रिटायरमेंट बेनिफिट्स की रिपोर्टिंग की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है।
रिटर्न भरने से पहले इन दस्तावेजों का जरूर करें मिलान
आयकर विभाग ने सलाह दी है कि ITR भरने से पहले Form-16, Annual Information Statement (AIS), Form-26AS, बैंक स्टेटमेंट, ब्याज प्रमाणपत्र और निवेश से जुड़े सभी दस्तावेजों का अच्छी तरह मिलान कर लें। इसके साथ ही PAN, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, पता और बैंक खाते जैसी प्री-फिल्ड जानकारी भी जांच लें ताकि बाद में किसी तरह की समस्या न आए।
करदाताओं को अपनी आय के अनुसार सही ITR फॉर्म का चयन करना चाहिए। यदि गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल किया जाता है तो आयकर विभाग उसे डिफेक्टिव रिटर्न घोषित कर सकता है, जिससे रिफंड और प्रोसेसिंग दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
ई-वेरिफिकेशन नहीं किया तो रिटर्न नहीं होगा मान्य
ITR दाखिल करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। यदि निर्धारित समय के भीतर ई-वेरिफिकेशन नहीं किया जाता तो रिटर्न को वैध नहीं माना जाएगा। जिन करदाताओं के लिए ऑनलाइन वेरिफिकेशन संभव नहीं है, वे ITR-V की हस्ताक्षरित कॉपी 30 दिनों के भीतर CPC, बेंगलुरु भेज सकते हैं।
यदि किसी करदाता ने पिछले चार असेसमेंट वर्षों में आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो वह ITR-U के माध्यम से अपडेटेड रिटर्न भी भर सकता है। वहीं अंतिम तिथि के बाद ITR दाखिल करने पर 5,000 रुपये तक की लेट फीस और बकाया टैक्स पर ब्याज भी देना पड़ सकता है।
समय पर सही दस्तावेजों के साथ और उचित ITR फॉर्म का चयन कर रिटर्न दाखिल करना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है। इससे रिफंड में अनावश्यक देरी और आयकर विभाग की कार्रवाई से बचा जा सकता है।


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