यूपी में बिजली कटौती पर बड़ा एक्शन, गाजियाबाद और मेरठ के दो इंजीनियर सस्पेंड, CM योगी ने बुलाई हाई लेवल बैठक।
उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही बिजली कटौती ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। जनता के विरोध प्रदर्शन और पावर हाउस घेराव के बीच यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ने बड़ा कदम उठाते हुए गाजियाबाद और मेरठ के दो अधिशासी अभियंताओं को सस्पेंड कर दिया है। 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों में लगातार सामने आ रही तकनीकी खराबियों और बिजली आपूर्ति व्यवस्था में लापरवाही को लेकर यह कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए रविवार सुबह हाई लेवल समीक्षा बैठक बुलाई है, जिसमें ऊर्जा मंत्री और विभागीय अधिकारी शामिल होंगे।
मेरठ और गाजियाबाद में तकनीकी फॉल्ट के बाद कार्रवाई
प्रदेश में बिजली संकट को लेकर यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ने सख्त रुख अपनाया है। कॉरपोरेशन के एमडी मयूर माहेश्वरी ने बिजली व्यवस्था में लापरवाही और तकनीकी निगरानी में कमी पाए जाने के बाद दो वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। अधिशासी अभियंता पारेषण गाजियाबाद राहुल को सस्पेंड कर मेरठ मुख्यालय से अटैच किया गया है, जबकि अधिशासी अभियंता पारेषण मेरठ योगेश कुमार को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से मेरठ और आसपास के इलाकों में लगातार ट्रांसमिशन लाइनों में खराबियां सामने आ रही थीं। विभागीय रिपोर्ट में कई तकनीकी कमियां सामने आईं, जिसके बाद कार्रवाई का फैसला लिया गया। अधिकारियों के खिलाफ यह एक्शन ऐसे समय पर हुआ है जब प्रदेश में तापमान लगातार बढ़ रहा है और बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
132 केवी लाइन ट्रिप होने से बढ़ा संकट
रिपोर्ट के मुताबिक 19 मई 2026 को 132 केवी मोदीनगर-2 कंकरखेड़ा ट्रांसमिशन लाइन अचानक ट्रिप हो गई थी। जांच में सामने आया कि टावर नंबर 33 और 34 के बीच कंडक्टर टूट गया था, जिससे बड़े इलाके की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। इस घटना के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी और अगले ही दिन एक और बड़ी तकनीकी खराबी सामने आ गई।
20 मई को 132 केवी मोदीनगर-2 बेदवापुर लाइन भी ट्रिप हो गई। इस बार टावर नंबर 8 और 9 के बीच मिड स्पैन ज्वाइंट से कंडक्टर टूटने और टावर के ऊपरी हिस्से को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई। लगातार दो दिनों तक हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों में हुई खराबियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
ऊर्जा विभाग के सूत्रों का कहना है कि कई अन्य जिलों से भी इसी तरह की तकनीकी गड़बड़ियों की रिपोर्ट मिली है। शुरुआती जांच में रखरखाव में लापरवाही, समय पर निरीक्षण न होना और ट्रांसमिशन सिस्टम पर बढ़ते लोड को बड़ी वजह माना जा रहा है। यही कारण है कि सरकार अब इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने के मूड में दिखाई दे रही है।
बिजली कटौती से सड़कों पर उतरी जनता
प्रदेश के कई जिलों में घंटों बिजली कटौती से लोग परेशान हैं। भीषण गर्मी में लगातार हो रही कटौती ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई इलाकों में लोगों ने पावर हाउस का घेराव किया और बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों में भी लो वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़ और पश्चिमी यूपी के कई हिस्सों से लोगों ने सोशल मीडिया पर भी बिजली संकट को लेकर नाराजगी जाहिर की। कुछ जगहों पर लोगों ने रातभर बिजली नहीं आने का आरोप लगाया। गर्मी के कारण घरों में पानी की समस्या भी बढ़ गई क्योंकि बिजली कटने से मोटर और पंप नहीं चल सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन में कई-कई घंटे बिजली कटौती हो रही है, जबकि रात में भी सप्लाई स्थिर नहीं रह पा रही। लगातार ट्रिपिंग की वजह से इनवर्टर और घरेलू उपकरणों पर भी असर पड़ रहा है। बिजली विभाग के अधिकारियों को कई जगहों पर लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा।
सीएम योगी ने बुलाई हाई लेवल समीक्षा बैठक
बिजली संकट को लेकर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने रविवार सुबह 10:30 बजे ऊर्जा विभाग की बड़ी समीक्षा बैठक बुलाई है। इस बैठक में ऊर्जा मंत्री A. K. Sharma और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
बैठक में प्रदेशभर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। साथ ही ट्रांसमिशन लाइनों में बार-बार आ रहे फॉल्ट, ट्रिपिंग की घटनाएं, मेंटेनेंस सिस्टम और अधिकारियों की जवाबदेही पर विस्तार से चर्चा होगी। माना जा रहा है कि बैठक के बाद कई और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से साफ कहा है कि गर्मी के मौसम में बिजली व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार चाहती है कि शहरों और ग्रामीण इलाकों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।
सरकार पर बढ़ रहा दबाव
प्रदेश में लगातार बढ़ती बिजली मांग और तकनीकी खराबियों ने ऊर्जा विभाग पर दबाव बढ़ा दिया है। गर्मी के कारण बिजली खपत में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। एसी, कूलर और सिंचाई उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल से ट्रांसमिशन नेटवर्क पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने ट्रांसमिशन सिस्टम और समय पर अपग्रेडेशन न होने की वजह से कई जगहों पर ओवरलोडिंग की स्थिति बन रही है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में बिजली संकट और गहरा सकता है।
फिलहाल सरकार इस मामले में सख्ती दिखाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कर रही है। विभागीय स्तर पर भी कई ट्रांसमिशन लाइनों और पावर सिस्टम की जांच शुरू कर दी गई है। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक पर टिकी हुई है, जहां बिजली संकट को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।


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