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शुगर कंट्रोल नहीं की तो दिल से लेकर आंखों तक हो सकता है बड़ा नुकसान! जानिए डायबिटीज किन अंगों को सबसे ज्यादा करती है बर्बाद


अनकंट्रोल्ड ब्लड शुगर दिल, किडनी, आंखों और नसों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है, जानिए डायबिटीज के खतरे और बचाव।

आज के समय में डायबिटीज तेजी से बढ़ती हुई गंभीर बीमारी बन चुकी है. कई लोग लंबे समय तक बढ़ी हुई ब्लड शुगर को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अनकंट्रोल्ड शुगर शरीर के कई जरूरी अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकती है. लगातार हाई ब्लड शुगर रहने से दिल, किडनी, आंखें, नसें और पैरों तक पर असर पड़ सकता है. कई मामलों में शुरुआती लक्षण साफ दिखाई नहीं देते, जिसके कारण बीमारी समय के साथ ज्यादा खतरनाक रूप ले लेती है. डॉक्टरों के मुताबिक समय पर जांच, सही खानपान, नियमित व्यायाम और दवाओं के जरिए ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है.

दिल और किडनी पर सबसे ज्यादा पड़ता है असर

लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ी रहने से शरीर की ब्लड वेसल्स कमजोर होने लगती हैं. इसका सीधा असर दिल और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार डायबिटीज के मरीजों में हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा होता है. ब्लड में बढ़ी हुई शुगर धमनियों में फैट जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर सकती है, जिससे ब्लड फ्लो प्रभावित होता है.

इसके अलावा किडनी भी ब्लड को फिल्टर करने का काम करती है. लगातार हाई शुगर रहने से किडनी की छोटी रक्त नलिकाएं खराब होने लगती हैं. शुरुआत में इसके लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन समय के साथ किडनी की कार्यक्षमता कम हो सकती है. गंभीर मामलों में मरीज को डायलिसिस तक की जरूरत पड़ सकती है. यही कारण है कि डॉक्टर डायबिटीज मरीजों को नियमित किडनी जांच कराने की सलाह देते हैं.

आंखों और नसों को भी हो सकता है भारी नुकसान

अनकंट्रोल्ड ब्लड शुगर आंखों की रोशनी पर भी असर डाल सकती है. लंबे समय तक शुगर बढ़ी रहने पर आंखों की रेटिना की रक्त नलिकाएं कमजोर होने लगती हैं, जिससे धुंधला दिखना शुरू हो सकता है. कई मरीजों में धीरे-धीरे आंखों की रोशनी कमजोर होने लगती है. गंभीर स्थिति में डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी समस्या भी हो सकती है, जो अंधेपन तक का कारण बन सकती है.

इसके साथ ही नसों पर भी डायबिटीज का गहरा असर पड़ता है. हाई ब्लड शुगर नर्व्स को नुकसान पहुंचा सकती है, जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है. इसमें हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, जलन और दर्द जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं. कई मरीजों को पैरों में संवेदना कम महसूस होती है, जिससे चोट लगने पर समय पर पता नहीं चलता और घाव गंभीर हो सकते हैं.

इन संकेतों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें

डॉक्टरों के मुताबिक कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें हल्के में लेना भारी पड़ सकता है. बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, जल्दी थकान महसूस होना, अचानक वजन घटना और लगातार भूख लगना ब्लड शुगर बढ़ने के संकेत हो सकते हैं. कई लोगों में त्वचा संक्रमण, घाव देर से भरना और धुंधला दिखना जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं.

अगर परिवार में पहले से डायबिटीज की हिस्ट्री है या व्यक्ति मोटापे, हाई बीपी और खराब लाइफस्टाइल से जूझ रहा है, तो नियमित ब्लड शुगर जांच बेहद जरूरी मानी जाती है. शुरुआती स्टेज में पहचान होने पर बीमारी को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है.

ब्लड शुगर कंट्रोल रखने के लिए क्या करें?

डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के लिए सबसे जरूरी है सही लाइफस्टाइल अपनाना. एक्सपर्ट्स संतुलित डाइट लेने की सलाह देते हैं. मीठी चीजें, ज्यादा तला-भुना खाना और प्रोसेस्ड फूड कम मात्रा में लेना चाहिए. हरी सब्जियां, साबुत अनाज, फल और प्रोटीन युक्त भोजन शरीर के लिए बेहतर माना जाता है.

इसके अलावा रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक या एक्सरसाइज करना भी जरूरी है. नियमित फिजिकल एक्टिविटी शरीर में इंसुलिन के काम करने की क्षमता को बेहतर बना सकती है. पर्याप्त नींद लेना और तनाव कम रखना भी ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मददगार माना जाता है.

डॉक्टरों की सलाह के अनुसार दवाएं समय पर लेना और नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है. कई लोग दवा शुरू होने के बाद लापरवाही करने लगते हैं, जिससे भविष्य में गंभीर जटिलताएं बढ़ सकती हैं. इसलिए डायबिटीज को हल्के में लेने की बजाय समय रहते सतर्क रहना जरूरी है.

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