लखनऊ PGI में लीवर कैंसर मरीज ने इलाज के खर्च और दर्द से परेशान होकर वॉर्ड में गला काट लिया, मौत से सनसनी फैल गई।
लखनऊ के मशहूर संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PGI) में उस वक्त सनसनी फैल गई जब लीवर कैंसर से जूझ रहे एक मरीज ने अस्पताल के वॉर्ड के अंदर ही ब्लेड से अपना गला काट लिया। मरीज लंबे समय से कैंसर के दर्द, मानसिक तनाव और इलाज के बढ़ते खर्च से परेशान बताया जा रहा था। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। परिजनों का कहना है कि मरीज लगातार इलाज के खर्च और बीमारी की तकलीफ को लेकर तनाव में रहता था।
PGI के वॉर्ड में हुई दर्दनाक घटना से दहला अस्पताल
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित पीजीआई अस्पताल देश के बड़े सरकारी मेडिकल संस्थानों में गिना जाता है, जहां दूर-दराज से गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। लेकिन सोमवार को अस्पताल के एक वॉर्ड में जो हुआ उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। जानकारी के मुताबिक लीवर कैंसर से पीड़ित मरीज पिछले करीब एक महीने से अस्पताल में भर्ती था और लगातार उसका इलाज चल रहा था।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार मरीज की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। कैंसर के दर्द के साथ-साथ इलाज का खर्च भी परिवार के लिए बड़ा बोझ बन चुका था। बताया जा रहा है कि मरीज मानसिक रूप से काफी टूट चुका था। इसी बीच उसने किसी तरह ब्लेड हासिल कर लिया और वॉर्ड के भीतर ही अपना गला काट लिया।
घटना के दौरान वॉर्ड में मौजूद अन्य मरीजों और तीमारदारों में अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल स्टाफ जब तक मौके पर पहुंचता तब तक काफी खून बह चुका था। डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन उसकी मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया।
इलाज का खर्च और कैंसर का दर्द बना मौत की वजह
परिजनों के मुताबिक मरीज लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज पहले से ही बेहद महंगा माना जाता है। दवाइयों, टेस्ट, ऑपरेशन और अस्पताल में रहने के खर्च ने परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह हिला दिया था। परिवार का कहना है कि मरीज लगातार यही कहता था कि अब इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है।
बताया जा रहा है कि मरीज बीमारी की वजह से शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो चुका था। लगातार दर्द और मानसिक तनाव ने उसे अंदर से तोड़ दिया था। परिवार के लोग भी उसकी हालत देखकर परेशान थे लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगा।
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विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर जैसी बीमारियां केवल शरीर को ही नहीं बल्कि मानसिक स्थिति को भी बुरी तरह प्रभावित करती हैं। लंबे इलाज और आर्थिक दबाव के कारण कई मरीज डिप्रेशन और तनाव का शिकार हो जाते हैं। यही वजह है कि गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए मानसिक परामर्श और भावनात्मक सहयोग भी बेहद जरूरी माना जाता है।
पुलिस जांच में जुटी, अस्पताल प्रशासन भी सवालों के घेरे में
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई। दक्षिण जोन के पुलिस उपायुक्त अमित कुमार आनंद ने भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने मौके से ब्लेड बरामद कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और अस्पताल स्टाफ व परिजनों से पूछताछ की जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर अस्पताल के हाई सिक्योरिटी वॉर्ड में मरीज के पास ब्लेड कैसे पहुंचा। इस पहलू पर भी जांच की जा रही है।
अस्पताल प्रशासन ने घटना पर दुख जताते हुए कहा है कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों इसके लिए अतिरिक्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।
इस घटना ने एक बार फिर देश में गंभीर बीमारियों के इलाज से जुड़े आर्थिक और मानसिक संकट को सामने ला दिया है। सरकारी अस्पतालों में इलाज के बावजूद कई परिवार आर्थिक रूप से टूट जाते हैं। वहीं मरीज लगातार दर्द, अनिश्चित भविष्य और मानसिक दबाव के बीच जिंदगी से हार मानने लगते हैं। लखनऊ PGI की यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं बल्कि उस दर्दनाक सच्चाई की तस्वीर है जिससे हजारों कैंसर मरीज और उनके परिवार हर दिन गुजरते हैं।


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